तीन तोहफे!

एक बार की बात है कि किसी राज्य में एक राजकुमार रहता था जिसे उसके राज्य के सभी लोग पसंद करते थे और उसका सम्मान करते थे|

उसी राज्य में एक बेहद गरीब आदमी भी रहता था जो उस राजकुमार से बहुत चिढ़ता था, और वह लगातार उसके बारे में अपनी कडवी जुबान से अनाप-शनाप बातें बोलता रहता था|

राजकुमार को यह बात पता थी, फिर भी वह उसे अनदेखा कर दिया करता था|

लेकिन एक ऐसा वक्त भी आया जब राजकुमार के लिए उस व्यक्ति को अनदेखा करना मुश्किल हो गया; और फिर सर्दी की एक रात उस व्यक्ति के दरवाजे पर राजकुमार का एक नौकर आया जिसके पास आटे की एक बोरी, साबुन का एक बैग और चीनी का एक cone था|

नौकर उस व्यक्ति से कहा, “राजकुमार नें यादगार के तौर पर तुम्हें ये तोहफे भेजे हैं.”


अब वह व्यक्ति तो फूला नहीं समाया, क्योंकि उसे लगा कि राजकुमार नें उसका सम्मान बढाते हुए उसे ये तोहफे दिए हैं और गर्व से भरा हुआ वह अपने दोस्त के पास पहुंचा और उसे यह बात बताकर बोला, “अब तुम्हें पता लगा कि राजकुमार मेरा कितना सम्मान करता है?”

लेकिन उसके दोस्त ने ऐसा जवाब दिया जिसकी उसे उम्मीद भी नहीं थी| उसके दोस्त ने कहा, “ओह! कितना समझदार राजकुमार है, और तुम कितना थोडा समझ पाए हो| उसने symbols(प्रतीकों) की भाषा में बात की है| आटा तुम्हारे खाली पेट को भरने के लिए है; साबुन तुम्हारे विचारों की गंदगी को साफ़ करने के लिए है; और चीनी तुम्हारी कडवी जुबान को मीठा बनाने के लिए है|”

उस दिन के बाद से उस व्यक्ति को खुद से ही शर्म आने लगी| वह राजकुमार से और भी ज्यादा नफरत करने लगा, और उसे अपने उस दोस्त से भी नफरत हो गई जिसने उसे राजकुमार के तोहफों का असली अर्थ बताया था|

लेकिन उसके बाद उसने कडवा बोलना छोड़ दिया|

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