मोती

एक सीप(oyster) ने अपने साथी सीप से कहा, “मुझे अपने अंदर बहुत ज्यादा pain महसूस हो रहा है| यह बहुत भारी और गोल सा है और इसकी वजह से मैं बड़ी तकलीफ में हूँ|”

दूसरी सीप ने घमंड भरी प्रसन्नता से जवाब दिया, “भगवान् का शुक्र है कि मुझे अपने अंदर कोई दर्द नहीं महसूस हो रहा है| मैं अंदर और बाहर दोनों तरह से स्वस्थ और सम्पूर्ण हूँ|”

उसी वक्त एक केंकड़ा(crab) वहां से गुजरा जिसने दोनों सीपियों की बाते सुनी, और वह उस सीप से बोला, जोकि अंदर और बाहर दोनों तरह से स्वस्थ और सम्पूर्ण थी, “यह सही है कि तुम हर तरह से स्वस्थ और सम्पूर्ण हो; लेकिन तुम्हारी साथी सीप को जो दर्द महसूस हो रहा है वह उस बेहद खूबसूरत मोती की वजह से है जोकि उसके पेट में है|”

[Friends, जीवन में कई बार हमें लगता है कि हम बड़े कठिन समय से गुजर रहे हैं या फिर कि दूसरे लोगों का जीवन कहीं ज्यादा आसन है, लेकिन हम अगर यह याद रखें कि जिन्दगी में problems का मकसद हमें और ज्यादा मजबूत और बेहतर बनाना होता है न कि हमें नष्ट करना तो हम बड़ी से बड़ी problem को भी सहजता से सुलझा  सकते हैं|]

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2 Replies to “मोती”

  1. धन्यवाद, सारस्वत जी
    आपने सही कहा, खलील गिबरान जी बेहद थोड़े और सरल शब्दों में ही जीवन की उलझनों का हल बता देते हैं|

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