आंसू और हंसी

(Khalil Gibran)

एक बार शाम के समय नील नदी के किनारे पर, एक hyena (लकड़बग्घा-एक तरह का कुत्ते जैसा जानवर) की मुलाक़ात एक crocodile(घड़ियाल) से हुई उन्होंने एक दुसरे को देखकर good-afternoon कहा|

Hyena ने बातचीत शुरू की और crocodile से पूछा, “Sir, आज आपका दिन कैसा गुजरा?”

और crocodile ने जवाब दिया, “मेरा दिन तो बड़ा ही खराब रहा| कभी-कभी तो मैं इतना उदास और दुखी हो जाता हूँ कि रोने लगता हूँ, लेकिन दुनिया हमेशा ही यही कहती है कि ‘ये तो सिर्फ घडियाली आंसूं हैं|’ और इससे मुझे कितनी तकलीफ होती है, मैं बयान नहीं कर सकता|”

अब hyena ने जवाब दिया, “आप तो अपने दुःख और उदासी की बात कर रहे हैं, ज़रा एक पल के लिए मेरे बारे में भी तो सोचिए| मैं तो दुनिया की खूबसूरती को निहारता हूँ, इसके चमत्कारों और अजूबों को देखता हूँ, और जब मैं खुशी के मारे गाना गाने लगता हूँ, तो जंगल के लोग कहते हैं, ‘यह तो लकड़बग्घे की नकली हंसी है|’ ”

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