How many Blinds (कितने नेत्रहीन)(Akbar Birbal Stories in Hindi)

(दोस्तों अकबर-बीरबल के किस्से सदियों से हमारे देश में सुने-सुनाये जाते हैं| ये किस्से न केवल मनोरंजक होते हैं बल्कि इनमें कुछ ने कुछ सीखने के लिए भी होता है| पेश हैं इन्हीं में से एक मशहूर किस्सा|)

एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा कि बीरबल क्या तुम जानते हो कि हमारे राज्य में कितने नेत्रहीन व्यक्ति हैं?

बीरबल ने इस सवाल का जवाब ढूँढने के लिए अकबर से एक हफ्ते का समय माँगा|

अगले दिन लोगों ने देखा कि बीरबल बाजार में बैठकर दुसरे लोगों के जूते सिल रहे हैं| यह देखकर सभी को बड़ी हैरानी हुई कि आखिर बीरबल ऐसा क्यों कर रहे हैं|  उनमें से कुछ लोगों ने बीरबल से पूछ ही लिए कि “बीरबल! आप क्या कर रहे है?”



अब जब भी बीरबल से कोई यह सवाल पूछता तो वे कुछ लिखने लगते थे| यह सिलसिला लगभग एक हफ्ते तक चला| सातवें दिन आखिरकार राजा अकबर नें यही सवाल बीरबल से पूछ लिया|

बीरबल ने कोई जवाब नहीं दिया और वे अगले दिन अपने वादे के मुताबिक़ अपना जवाब एक कागज़ पर लिखकर महाराज अकबर के पास दरबार में पहुँच गए| अकबर नें कागज़ को ध्यान से पढ़ा और पाया कि अंधे लोगों की संख्या काफी अधिक थी| पढ़ते-पढ़ते सम्राट अकबर ने देखा कि उनका नाम भी इस list में शामिल है, आगबबूला होकर अकबर ने बीरबल से पुछा कि आखिर उनका नाम इस list में क्यों है?

 

बीरबल ने जवाब दिया “महाराज! दुसरे लोगों की तरह आपने भी मुझे जूते सिलते हुए देखा और फिर भी मुझसे पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ| इसलिए मुझे आपका नाम भी इस list में डालना पडा|”

अकबर बीरबल का जवाब सुनकर हंस पड़े और सभी लोगों ने बीरबल के sense of humour का आनंद लिया|
.

सीख : जैसा कि भगवान् गौतम बुद्ध ने भी कहा है कि “यह दुनिया अंधी है! बहुत ही कम लोग चीजों को उसके सही स्वरूप में देख पाते हैं| ” भविष्य या फिर गुजरे हुए कल की चिंता करने के बजाय हमारा पूरा ध्यान वर्तमान में और जो काम हमारे हाथ में है उस पर होना चाहिए| 

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तीन तोहफे!

एक बार की बात है कि किसी राज्य में एक राजकुमार रहता था जिसे उसके राज्य के सभी लोग पसंद करते थे और उसका सम्मान करते थे|

उसी राज्य में एक बेहद गरीब आदमी भी रहता था जो उस राजकुमार से बहुत चिढ़ता था, और वह लगातार उसके बारे में अपनी कडवी जुबान से अनाप-शनाप बातें बोलता रहता था|

राजकुमार को यह बात पता थी, फिर भी वह उसे अनदेखा कर दिया करता था|

लेकिन एक ऐसा वक्त भी आया जब राजकुमार के लिए उस व्यक्ति को अनदेखा करना मुश्किल हो गया; और फिर सर्दी की एक रात उस व्यक्ति के दरवाजे पर राजकुमार का एक नौकर आया जिसके पास आटे की एक बोरी, साबुन का एक बैग और चीनी का एक cone था|

नौकर उस व्यक्ति से कहा, “राजकुमार नें यादगार के तौर पर तुम्हें ये तोहफे भेजे हैं.”


अब वह व्यक्ति तो फूला नहीं समाया, क्योंकि उसे लगा कि राजकुमार नें उसका सम्मान बढाते हुए उसे ये तोहफे दिए हैं और गर्व से भरा हुआ वह अपने दोस्त के पास पहुंचा और उसे यह बात बताकर बोला, “अब तुम्हें पता लगा कि राजकुमार मेरा कितना सम्मान करता है?”

लेकिन उसके दोस्त ने ऐसा जवाब दिया जिसकी उसे उम्मीद भी नहीं थी| उसके दोस्त ने कहा, “ओह! कितना समझदार राजकुमार है, और तुम कितना थोडा समझ पाए हो| उसने symbols(प्रतीकों) की भाषा में बात की है| आटा तुम्हारे खाली पेट को भरने के लिए है; साबुन तुम्हारे विचारों की गंदगी को साफ़ करने के लिए है; और चीनी तुम्हारी कडवी जुबान को मीठा बनाने के लिए है|”

उस दिन के बाद से उस व्यक्ति को खुद से ही शर्म आने लगी| वह राजकुमार से और भी ज्यादा नफरत करने लगा, और उसे अपने उस दोस्त से भी नफरत हो गई जिसने उसे राजकुमार के तोहफों का असली अर्थ बताया था|

लेकिन उसके बाद उसने कडवा बोलना छोड़ दिया|

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मूर्ति

एक बार की बात है, बहुत दूर पहाड़ियों में एक आदमी रहता था, उसके पास एक मूर्ति थी जो उसके गुरु ने उसे दी थी| यह उसके दरवाजे की बाहर बेकार पडी हुई थी और वह उसे ठीक से रखने की कोई चिंता भी नहीं करता था|

एक बार शहर में रहने वाला एक समझदार आदमी वहां से गुजरा, मूर्ति को देखकर उसने मालिक से इसे खरीदने की इच्छा जाहिर की|

मालिक हंसा और बोला, “आखिर कौन उस बेरंग और गंदे पत्थर को खरीदना पसंद करेगा?”

शहरी आदमी ने कहा, “मैं तुम्हें इसके बदले में चांदी का एक सिक्का देने के लिए तैयार हूँ|”

मूर्ति का मालिक हैरान भी था और खुश भी|

उस मूर्ति को हाथी की पीठ पर लाद कर शहर ले जाया गया| कई महीनों के बाद पहाड़ों में रहने वाला वह व्यक्ति शहर घूमने के लिए आया और जब वह शहर में घूम रहा था तो उसने एक दूकान के बाहर भीड़ देखी, जहां पर एक आदमी खडा होकर चिल्ला रहा था, “आईये और दुनिया की सबसे खूबसूरत और लाजवाब कलाकृति को देखिए| सिर्फ दो चांदी के सिक्कों देकर इस कलाकारी के नायब नमूने का दर्शन कीजिये|”


उस पहाड़ों में रहने वाले उस व्यक्ति नें चांदी के दो सिक्के देकर दूकान में प्रवेश किया और वह यह देखकर हैरान रह गया कि यह तो वही मूर्ति थी जो उसने खुद चांदी के एक सिक्के के बदले में बेच दी थी|

[Friends, हमेशा खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करते रहना मानव-स्वभाव है, लेकिन इस दौरान हम कई बार, चीजों को हासिल करने की इस दौड़ में, उन चीजों की कद्र नहीं करते जो कि हमारे पास पहले से ही होती हैं| किसी महान व्यक्ति ने कहा भी है, “मैं इसलिए उदास था क्योंकि मेरे पास पहनने के लिए अच्छे जूते नहीं थे, लेकिन गली में एक ऐसा आदमी भी था जिसके पैर ही नहीं थे|”

Nick Vujicic इसका जीता-जागता उदाहरण हैं जिनका एक वीडियो आप नीचे दिए link पर click करके देख सकते हैं| मुझे इस विडियो को देख कर हमेशा motivation मिलती है|]

 

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मोती

एक सीप(oyster) ने अपने साथी सीप से कहा, “मुझे अपने अंदर बहुत ज्यादा pain महसूस हो रहा है| यह बहुत भारी और गोल सा है और इसकी वजह से मैं बड़ी तकलीफ में हूँ|”

दूसरी सीप ने घमंड भरी प्रसन्नता से जवाब दिया, “भगवान् का शुक्र है कि मुझे अपने अंदर कोई दर्द नहीं महसूस हो रहा है| मैं अंदर और बाहर दोनों तरह से स्वस्थ और सम्पूर्ण हूँ|”

उसी वक्त एक केंकड़ा(crab) वहां से गुजरा जिसने दोनों सीपियों की बाते सुनी, और वह उस सीप से बोला, जोकि अंदर और बाहर दोनों तरह से स्वस्थ और सम्पूर्ण थी, “यह सही है कि तुम हर तरह से स्वस्थ और सम्पूर्ण हो; लेकिन तुम्हारी साथी सीप को जो दर्द महसूस हो रहा है वह उस बेहद खूबसूरत मोती की वजह से है जोकि उसके पेट में है|”

[Friends, जीवन में कई बार हमें लगता है कि हम बड़े कठिन समय से गुजर रहे हैं या फिर कि दूसरे लोगों का जीवन कहीं ज्यादा आसन है, लेकिन हम अगर यह याद रखें कि जिन्दगी में problems का मकसद हमें और ज्यादा मजबूत और बेहतर बनाना होता है न कि हमें नष्ट करना तो हम बड़ी से बड़ी problem को भी सहजता से सुलझा  सकते हैं|]

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माफ़ करना बेटा !
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पैगंबर और बच्चा

एक बार की बात है, एक दिन पैगंबर(Prophet) शरीयत की मुलाकात बगीचे में एक बच्चे से हुई। बच्चा भाग कर उनके पास आ गया और बोला, “Good-morning, Sir,” और पैगम्बर ने जवाब दिया, “Good-morning, Sir.” और एक पल सोच कर कहा, “तुम अकेले ही आए हो|”

बच्चा, हंसा और आनंद से बोला, “मुझे अपनी आया(nurse) से पीछा छुड़ाने में काफी वक्त लग गया| उसे लग रहा है कि मैं उन झाड़ियों के पीछे छुपा हुआ हूँ, लेकिन आप तो देख सकते हो कि मैं तो यहाँ पर खडा हूँ?” फिर उसने पैगम्बर के चेहरे को गौर से दिखा और कहा, “आप भी तो अकेले हैं| आपने अपनी नर्स से कैसे पीछा छुडाया?”

पैगम्बर ने जवाब दिया, “आह! यह तो बिलकुल अलग बात है| सच कहूं तो मैं कई बार उससे पीछा नहीं छुडा पाता| लेकिन अब, जबकि मैं इस बगीचे में आया हूँ, वह मुझे उन झाड़ियों के पीछे ढूंढ रही है|”

बच्चा खुशी से ताली बजाकर बोला, “आप तो बिलकुल मेरी तरह हो! खो जाने में बड़ा मजा आता है, है न?” और फिर उसने पूछा, “आप कौन हैं?”


उस व्यक्ति ने जवाब दिया, “वे मुझे पैगम्बर कहते हैं| अब यह बताओ कि तुम कौन हो?”

“मैं तो केवल मैं ही हूँ,” बच्चा बोला, “मेरी नर्स मुझे ढूंढ रही है, और उसे नहीं पता कि मैं कहाँ पर हूँ|”

पैगम्बर ने सर उठाकर आसामान की तरफ दिखा और कहा, “मैंने भी थोड़ी देर के लिए अपनी नर्स से पीछा छुड़ा लिया है, लेकिन वह मुझे ढूंढ ही निकालेगी|”

और बच्चा बोला, “मुझे भी पता है कि मेरी नर्स भी मुझे ढूंढ ही लेगी|”

उसी वक्त एक महिला की आवाज सुनाई दी जोकि बच्चे को उसके नाम से पुकार रही थी, “देखा,” बच्चा बोला, “मैंने आपको बताया था कि वह मुझे ढूंढ लेगी|”

उसी समय एक और आवाज सुनाई दी, “आप कहाँ हैं पैगम्बर?”

और पैगम्बर ने कहा, “देखा मेरे बच्चे, उन्होंने मुझे भी ढूंढ ही निकाला.”

और फिर अपना चेहरा उठा कर पैगम्बर ने जवाब दिया, “मैं यहाँ पर हूँ|”

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माफ़ करना बेटा !
आंसू और हंसी
बाज और अबाबील(skylark)
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मेले में…

एक बार मेले में दूर के गावं में रहने वाली एक लडकी आई, जोकि बहुत ही खूबसूरत थी| उसका चेहरा गुलाबी था| उसकी जुल्फें रात की तरह काली थी, और एक दिलकश मुस्कान उसके होठों पर खिली रहती थी|

उस खूबसूरत अजनबी के आने की देर थी कि जवान लड़कों ने उसे ढूंढ लिया और उसके करीब आने की कोशिश करने लगे| एक उसके साथ dance करना चाहता था तो दूसरा उसके सम्मान में cake काटना चाहता था| वे सभी उसके गालों पर kiss करना चाहते थे| अब इसमें हर्ज ही क्या था, आखिर यह एक मेला ही तो था|

लेकिन लडकी इससे shocked हो गयी और चौक पडी, उसके मन में जवान लोगों को लेकर बुरे ख्याल आने लगे| उसने, उन्हें बुरा-भला कहा, और यहाँ तक कि एक-दो को तो उसने थप्पड़ भी लगा दिए| और फिर वह उनसे दूर भाग गई|


उस शाम को वापस घर लौटते समय, वह खुद से मन-ही-मन कह रही थी, “मैं तो तंग आ गई| ये आदमी कितने जंगली और असभ्य हैं| यह सब तो बर्दाश्त से बाहर है|”

एक साल यूं ही गुजर गया और इस दौरान उस बहुत ही खूबसूरत लडकी ने मेलों और आदमियों के बारे में काफी कुछ सोचा| फिर वह लडकी दुबारा मेले में आई, उसका चेहरा गुलाबी था| उसकी जुल्फें रात की तरह काली थी, और एक दिलकश मुस्कान उसके होठों पर खिली हुई थी|

लेकिन अब जवान लड़के उसे देखकर इधर-उधर हो गए| और पूरे दिन उससे कोई नहीं मिला और वह अकेली घूमती रही|

शाम को जब वह, अपने घर की ओर जाने वाली सड़क पर, चलती हुई जा रही थी तो वह अपने मन में कह रही थी, “मैं तो तंग आ गई| ये आदमी कितने जंगली और असभ्य हैं| यह सब तो बर्दाश्त से बाहर है|”

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The Love Song
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आंसू और हंसी!
बाज और अबाबील(skylark)
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आंसू और हंसी

(Khalil Gibran)

एक बार शाम के समय नील नदी के किनारे पर, एक hyena (लकड़बग्घा-एक तरह का कुत्ते जैसा जानवर) की मुलाक़ात एक crocodile(घड़ियाल) से हुई उन्होंने एक दुसरे को देखकर good-afternoon कहा|

Hyena ने बातचीत शुरू की और crocodile से पूछा, “Sir, आज आपका दिन कैसा गुजरा?”

और crocodile ने जवाब दिया, “मेरा दिन तो बड़ा ही खराब रहा| कभी-कभी तो मैं इतना उदास और दुखी हो जाता हूँ कि रोने लगता हूँ, लेकिन दुनिया हमेशा ही यही कहती है कि ‘ये तो सिर्फ घडियाली आंसूं हैं|’ और इससे मुझे कितनी तकलीफ होती है, मैं बयान नहीं कर सकता|”

अब hyena ने जवाब दिया, “आप तो अपने दुःख और उदासी की बात कर रहे हैं, ज़रा एक पल के लिए मेरे बारे में भी तो सोचिए| मैं तो दुनिया की खूबसूरती को निहारता हूँ, इसके चमत्कारों और अजूबों को देखता हूँ, और जब मैं खुशी के मारे गाना गाने लगता हूँ, तो जंगल के लोग कहते हैं, ‘यह तो लकड़बग्घे की नकली हंसी है|’ ”

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दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे ? (article)
माफ़ करना बेटा !
बाज और अबाबील(skylark)
खुशी पहले, बाकी सब बाद में  (article)
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The Love Song

(Khalil Gibran)
एक बार एक poet ने एक love song लिखा जो बहुत ही खूबसूरत था| और उसने इसकी बहुत सी duplicate copies बनाई और उन्हें अपने दोस्तों और चाहने वालों को भेज दिया जिसमें स्त्री और पुरुष दोनों ही शामिल थे| और उसने अपने इस song को उस जवान लडकी को भी भेजा जिसे कि वह केवल एक बार मिला था और जो पहाड़ों के दूसरी तरफ रहती थी|
और एक-दो दिन में ही एक आदमी, उस जवान लड़की का सन्देश लेकर उसके पास आ गया| और उस letter  में उस लड़की ने लिखा “जो love song तुमनें मुझे लिखा था वह मेरे दिल को छु गया| अभी आकर मेरे माता-पिता से मिल लो, ताकि हम शादी की तैयारी कर सकें|”
उसके letter के जवाब में poet ने उसे लिखा, “मेरी दोस्त, मैंने यह गीत तुम्हारे लिए नहीं लिखा था यह तो केवल एक poet के दिल से निकला हुआ एक love song था जिसे कि हरेक आदमी हर स्त्री को सुनाता है|”

उस लडकी का जवाब भी जल्दी ही आ गया जिसमें उसनें लिखा, “झूंठे, पाखंडी शब्द लिखने वाले! तुम्हारी वजह से, इस दिन से लेकर अपनी अंतिम सांस तक, अब मैं  सभी कवियों से नफरत करूंगी|”

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माफ़ करना बेटा !
बाज और अबाबील(skylark)

बाज और अबाबील(skylark)

(Khalil Gibran)
एक बार की बात है कि एक skylark (अबाबील) और एक बाज की मुलाक़ात एक ऊँची चोटी पर हुई| अबाबील ने बाज से “good morning” कहा| और बाज ने नीचे झुक कर उसे देखा और धीरे से कहा “good morning|”

फिर अबाबील ने पूछा, “उम्मीद है sir कि आपके साथ सब कुछ बढ़िया चल रहा होगा|”

“हां,” बाज ने जवाब दिया, “हमारे साथ सब कुछ ठीक चल रहा है| लेकिन क्या तुम्हें पता है कि हम पक्षियों के राजा हैं, और इसलिए तुम्हें तब तक हमसे बात नहीं करनी चाहिए जब तक हम खुद तुमसे बात नहीं  करना चाहें?”

अबाबील ने कहा, “मुझे तो लगता था कि हम दोनों एक ही परिवार(family) से हैं”|

बाज ने उपेक्षा से उसे देखा और बोला, “यह तुमसे किसने कह दिया कि हम और तुम एक ही परिवार से हैं?”

अबाबील ने जवाब दिया, “लेकिन आपको याद रखना चाहिए कि, मैं, आपसे कहीं ऊंचा उड़ सकता हूँ, और गाना भी गा सकता हूँ और इस तरह धरती के दूसरे जीवों को खुशी दे सकता हूँ| वहीं आप न तो खुशी दे पाते हैं और न ही आनंद|”

अब तो बाज को गुस्सा आ गया, “ ‘खुशी और आनंद!’, तुम एक छोटे से जीव हो और अपनी औकात से बढ़ कर बोल रहे हो| अपनी चोंच के एक ही वार से मैं तुम्हें ख़त्म कर सकता हूँ| तुम तो मेरे पंजों के बराबर हो.”

अब तो झगडा बेहद बढ़ गया और अबाबील उड़ा और बाज की पीठ पर सवार हो गया और उसके पंखों को नोचने लगा| बाज परेशान हो गया, और तेजी से उड़ कर ऊँचाई पर पहुँच गया ताकि वह अबाबील से अपना पीछा छुड़ा सके| लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया| आखिरकार दुखी होकर वह बड़ी पहाडी की उसी चट्टान पर वापिस आकर बैठ गया, छोटा सा पक्षी अभी उसकी पीठ पर सवार था, और वह उस घड़ी को कोस रहा था जब उसका सामना अबाबील से हुआ था|

उसी समय एक छोटा सा कछुआ वहां से गुजरा और उन्हें देखकर हंसने लगा और हँसते-हँसते लोट-पोट हो गया|

बाज, कछुए की ओर देखकर बोला, “जमीन पर रहकर रेंगने वाले छोटे से जीव, तुम हंस किस बात पर रहे हो?”

कछुए ने उसे जवाब दिया, “तुम तो घोड़े की तरह बन गए हो, और एक छोटा सा पक्षी तुम्हारी सवारी कर रहा है, लेकिन उस छोटे पक्षी के तो मजे हैं|”

अब बाज ने उसे जवाब दिया, “चलो जाओ और अपना काम करो| यह मेरे और मेरे भाई ‘अबाबील’ के बीच का मामला है|”

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माफ़ करना बेटा !

                                  (W. Livingston Larned)
“सुनो बेटे; मैं तुमसे यह तब कह रहा हूँ जब तुम गहरी नींद में सोये हुए हो, एक छोटा सा हाथ तुम्हारे गाल के नीचे रखा हुआ है और घुंघराले बालों की एक लट तुम्हारे पसीने से भीगे हुए माथे से सटी हुई है| मैं अकेला ही तुम्हारे कमरे में चुपके से आ गया हूँ| कुछ ही मिनट पहले, जब मैं अपने कमरे में बैठा अखबार पढ़ रहा था, आत्म-ग्लानी की एक लहर मुझ पर छा गई थी| पश्चाताप करते हुए, मैं तुम्हारे सिराहने पर आकर बैठ गया हूँ|
मैं कुछ चीजों के बारे में सोच रहा था, बेटे : जिन्हें मैंने तुम्हें करने से रोका था| मैं तुम्हें तब कोस रहा था जब तुम स्कूल के लिए तैयार हो रहे थे क्योंकि तुमने केवल गीले तौलिये से अपना चेहरा पोंछ लिया था| मैंने तुम्हारे गंदे जूतों के लिए तुम्हें डांटा था| मैं तुम पर तब चिल्लाया था जब तुम्हें अपनी कुछ चीजें फर्श पर फेंक दी थी|
नाश्ते के समय भी मैं कमियाँ ही ढूंढ रहा था| तुम्हें चीजों को बिखेर दिया था| तुमने अपने खाने को, ठीक से चबाये बिना ही, निगल लिया था| तुमने अपनी कोहनियों को टेबल पर रखा था| तुमने अपनी ब्रेड पर मक्खन की ज्यादा मोटी परत लगाई थी| और जब तुम खेलने के लिए तैयार हुए और मैं अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए जा रहा था, तुमने पीछे मुडकर और एक हाथ हिलाकर कर कहा “गुडबाय डैडी!” और मैंने नाराज होकर चिल्लाया था, “सामने देखो|”
और फिर दोपहर बाद यह सिलसिला फिर से शुरू हो गया था| जब मैं सड़क पर आया, तब मैंने उस समय तुम्हारी जासूसी की, जब तुम अपने घुटनों को जमीन पर टिकाकर कंचों से खेल रहे थे| तुम्हारी जुराबों में सुराख थे| मैंने तुम्हारे दोस्तों के सामने तुम्हारा अपमान किया और तुम्हें, अपने आगे-आगे घर तक चलने के लिए मजबूर किया| जुराबे महंगी होती हैं – और अगर तुम्हें इन्हें खरीदना पड़ता तो तुम अपनी जुराबों का ज्यादा ध्यान रखते! इसे एक पिता के नजरिये से देखने की कल्पना करो, मेरे बच्चे!
तुम्हें याद है कि बाद में, जब मैं अपने कमरे में बैठा पढ़ रहा था, तो तुम झिझकते हुए आए थे, तुम्हारी आखों में एक तकलीफ का एहसास था? जब मैंने, अपना ध्यान टूटने की वजह से झल्लाते हुए, अपने अखबार से नजरें हटाकर देखा, तो तुम दरवाजे पर ठिठक गए थे| “तुम्हें क्या चाहिए?” मैं, कड़क आवाज में चिल्लाया था|
तुमने कुछ नहीं कहा, लेकिन तुम भागते हुए मेरे पास आए, और अपनी बाहों में भर कर मुझे चूम लिया, और तुम्हारी छोटी-छोटी बाहें, मेरे चारों ओर उस असीम प्यार के साथ, कस गईं, जिसका बीज भगवान् ने तुम्हारे दिल में बोया था और जिसे उपेक्षा(neglect) भी नहीं मिटा पायी थी| और फिर तुम, सीढ़ियों पर अपनी चप्पलों से आवाज करते हुए चले गए|
इसके कुछ ही पलों के बाद बेटा, कुछ ऐसा हुआ कि अखबार मेरे हाथों से फिसल गया और एक भयानक लाचार करने वाले डर ने मुझे घेर लिया| आदत मेरे साथ क्या कर रही थी ? गलतियां ढूँढने और निंदा करने की आदत – क्या एक लड़के होने के लिए, मेरी तरफ से यही तुम्हारा इनाम था| ऐसा नहीं था कि मैं तुमसे प्यार नहीं करता था; बस मैं नई जनरेशन से जरूरत से ज्यादा मांग बैठा था| मैं तुम्हें, अपने खुद के बचपन के पैमाने पर तोलने लगा था|
और तुम्हारे अन्दर इतनी अच्छाई, नेकी और सच्चाई है| तुम्हारा छोटा सा दिल इतना बड़ा है कि बड़ी-से-बड़ी पहाड़ियों को भी अपने भीतर समा सकता है| जिस तरह से तुम दौड़ कर आए और मुझे चूम कर गुड नाईट कहा, यह इस बात से ही जाहिर होता है| बेटा, आज और कुछ मायने नहीं रखता| मैं, अँधेरे में तुम्हारे बिस्तर के पास आ गया हूँ और यहाँ मैं, शर्मिन्दा होकर, सर झुकाए बैठा हूँ!
यह प्रयाश्चित करने की एक कमजोर सी कोशिश है; मैं जानता हूँ कि अगर मैं इन बातों को तुमसे तब कहता जब तुम जागे हुए होते, तो तुम इन चीजों को नहीं समझ पाते| लेकिन मैं कल से एक सच्चा पिता बनूंगा! मैं तुम्हारा सच्चा दोस्त बनूंगा और तुम्हारी तकलीफ को मैं भी महसूस करूंगा और तुम्हारे साथ-साथ मैं भी हंसूंगा| जब कभी झुंझलाहट में कुछ कडवा कहने की इच्छा होगी तो मैं अपनी जीभ दांतों तले दबा लूंगा| मैं, इस बात को बार-बार, एक आदत की तरह दोहराता रहूँगा : “आखिर वह एक बच्चा ही तो है-एक छोटा सा बच्चा!”
मैं शर्मिन्दा हूँ कि वक्त से पहले, एक आदमी के रूप में मैंने तुम्हारी कल्पना कर ली| लेकिन अभी बेटे, जब मैं तुम्हें अपने बिस्तर पर थक कर और सिमट कर सोते हुए देख रहा हूँ, तो मैं समझ रहा हूँ कि तुम तो अभी भी बच्चे ही हो| कल की ही बात है कि तुम अपनी माँ की बाहों में थे, तुम्हारा सर उसके कन्धों पर था| मैंने तुमसे बहुत जल्दी-बहुत कुछ मांग लिया, कुछ ज्यादा ही.”
[दूसरों की आलोचना करने और उनकी निंदा करने की बजाए, शायद उन्हें समझने की कोशिश करना ज्यादा अच्छा रहेगा, यह पता करना कि आखिर वह ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं| ऐसा करना, आलोचना के मुकाबले कहीं ज्यादा फायदेमंद और दिलचस्प होगा; और इससे उपेक्षा की बजाय, साहनुभूति, धैर्य और अच्छाई का विकास भी होगा…!!!]

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