How many Blinds (कितने नेत्रहीन)(Akbar Birbal Stories in Hindi)

(दोस्तों अकबर-बीरबल के किस्से सदियों से हमारे देश में सुने-सुनाये जाते हैं| ये किस्से न केवल मनोरंजक होते हैं बल्कि इनमें कुछ ने कुछ सीखने के लिए भी होता है| पेश हैं इन्हीं में से एक मशहूर किस्सा|)

एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा कि बीरबल क्या तुम जानते हो कि हमारे राज्य में कितने नेत्रहीन व्यक्ति हैं?

बीरबल ने इस सवाल का जवाब ढूँढने के लिए अकबर से एक हफ्ते का समय माँगा|

अगले दिन लोगों ने देखा कि बीरबल बाजार में बैठकर दुसरे लोगों के जूते सिल रहे हैं| यह देखकर सभी को बड़ी हैरानी हुई कि आखिर बीरबल ऐसा क्यों कर रहे हैं|  उनमें से कुछ लोगों ने बीरबल से पूछ ही लिए कि “बीरबल! आप क्या कर रहे है?”



अब जब भी बीरबल से कोई यह सवाल पूछता तो वे कुछ लिखने लगते थे| यह सिलसिला लगभग एक हफ्ते तक चला| सातवें दिन आखिरकार राजा अकबर नें यही सवाल बीरबल से पूछ लिया|

बीरबल ने कोई जवाब नहीं दिया और वे अगले दिन अपने वादे के मुताबिक़ अपना जवाब एक कागज़ पर लिखकर महाराज अकबर के पास दरबार में पहुँच गए| अकबर नें कागज़ को ध्यान से पढ़ा और पाया कि अंधे लोगों की संख्या काफी अधिक थी| पढ़ते-पढ़ते सम्राट अकबर ने देखा कि उनका नाम भी इस list में शामिल है, आगबबूला होकर अकबर ने बीरबल से पुछा कि आखिर उनका नाम इस list में क्यों है?  

बीरबल ने जवाब दिया “महाराज! दुसरे लोगों की तरह आपने भी मुझे जूते सिलते हुए देखा और फिर भी मुझसे पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ| इसलिए मुझे आपका नाम भी इस list में डालना पडा|”  

अकबर बीरबल का जवाब सुनकर हंस पड़े और सभी लोगों ने बीरबल के sense of humour का आनंद लिया|
.

सीख : जैसा कि भगवान् गौतम बुद्ध ने भी कहा है कि “यह दुनिया अंधी है! बहुत ही कम लोग चीजों को उसके सही स्वरूप में देख पाते हैं| ” भविष्य या फिर गुजरे हुए कल की चिंता करने के बजाय हमारा पूरा ध्यान वर्तमान में और जो काम हमारे हाथ में है उस पर होना चाहिए| 

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Swami Vivekananda inspirational quotes in hindi

(Swami Vivekanand)

Narendranath Datta (popularly known as Swami Vivekanand) (12 January 1863 – 4 July 1902) :– He was Founder of Ramakrishna Mission, graduated from Calcutta University, he had acquired a vast knowledge of different subjects, especially Western philosophy and history. He introduced Indian philosophies of Vedanta and Yoga to the Western world.

1.    You cannot believe in God until you believe in yourself.

आप भगवान पर तब तक भरोसा नहीं कर सकते जब तक आप खुद पर भरोसा नहीं करते|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

2.    Arise! Awake! and stop not until the goal is reached.

उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक तुम अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच जाते|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

3.    You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.

आप का विकास अंदर से बाहर की ओर ही होता है कोई आपको कुछ सिखा नहीं सकता| आपकी अपनी आत्मा के अलावा कोई दूसरा टीचर नहीं होता|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

4.    The whole secret of existence is to have no fear. Never fear what will become of you, depend on no one.

अस्तित्व का पूरा रहस्य है डर का ख़त्म हो जाना| कभी भी इस बात से मत डरिये कि आपका क्या होगा, किसी पर भी निर्भर न रहें|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

5.    Truth can be stated in a thousand different ways, yet each one can be true.

सच को कहने के हजारों तरीके हो सकते हैं और फिर भी सच तो वही रहता है|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)


6.    The more we come out and do good to others, the more our hearts will be purified, and God will be in them.

जितना हम दूसरों के साथ अच्छा करते हैं उतना ही हमारा हृदय पवित्र हो जाता है और भगवान उसमें बसता है|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

7.    We are what our thoughts have made us; so take care about what you think. Words are secondary. Thoughts live; they travel far.

हम वैसे ही होते हैं जैसे कि हमारे विचार हमें बनाते हैं; इसलिए आप क्या सोचते हैं इसका ध्यान रखें| शब्द तो बाद की बात है| विचार ज़िंदा होते हैं और वे बड़ी दूर तक जाते हैं|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

8.    Take up one idea. Make that one idea your life – think of it, dream of it, live on that idea. Let the brain, muscles, nerves, every part of your body, be full of that idea, and just leave every other idea alone. This is the way to success.

एक विचार को लें| और उस विचार को अपने जीवन का लक्ष्य बना लें, उसके बारे में सोचें, उसके सपने देखें, उस विचार को जियें| अपने दिमाग, muscles, nerves, और अपने शरीर के हर हिस्से में उस विचार को उतार लें, और दूसरे सारे विचारों को छोड़ दें| सफल होने का यही तरीका है|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

9.    That man has reached immortality who is disturbed by nothing material.

जो व्यक्ति सांसारिक चीजों से दुखी नहीं होता वह अमर है|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

10.    Our duty is to encourage every one in his struggle to live up to his own highest idea, and strive at the same time to make the ideal as near as possible to the Truth.

हमारा फर्ज है कि हम हर उस व्यक्ति की उसके जीवन-संघर्ष में आगे बढ़ने में मदद करें, और इसके साथ-साथ सच्चाई के जितना नजदीक रह पायें, रहने की कोशिश करें|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

11.    The world is the great gymnasium where we come to make ourselves strong.

संसार एक बड़े से gym के तरह है जहां पर हम हम सब खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

12.    Where can we go to find God if we cannot see Him in our own hearts and in every living being.

भगवान् हमें कहाँ मिलेगा अगर उसे हम अपने खुद के ह्रदय में और हरेक जीवित वस्तु में नहीं देख पाते ?

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)



13.    All differences in this world are of degree, and not of kind, because oneness is the secret of everything.

संसार में जो भी मतभेद है वह इस वजह से नहीं है कि हम सब अलग हैं क्योंकि एकता वह नियम है जिससे हरेक चीज जुड़ी हुई है|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

14.    If money help a man to do good to others, it is of some value; but if not, it is simply a mass of evil, and the sooner it is got rid of, the better.

अगर धन से आप दुसरे लोगों की मदद कर सकते हैं तो फिर इसका होना सार्थक है; अगर ऐसा नहीं है तो यह सिर्फ आपको बर्बाद ही करेगा और आप इससे जितना जल्दी पीछा छुड़ा लें उतना ही बेहतर रहेगा|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

15.    The moment I have realized God sitting in the temple of every human body, the moment I stand in reverence before every human being and see God in him – that moment I am free from bondage, everything that binds vanishes, and I am free.

जिस पल मैंने पाया कि भगवान् तो हर इंसानी शरीर रूपी मंदिर में बस्ता है, उसी पल से मैं हर इंसान के सामना श्रधा से खडा हो जाता हूँ और उस व्यक्ति में भगवान् को देख लेता हूँ, उस एक पल में मैं बंधन से मुक्त हो जाता हूँ, वो हरेक चीज जोकि मुझे बांधती है वह गायब हो जाती है और मैं आजाद हो जाता हूँ|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

16.    All the powers in the universe are already ours. It is we who have put our hands before our eyes and cry that it is dark.

संसार में जितनी भी शक्तियां हैं वे तो पहले ही से हमारी हैं| ये तो हम ही हैं जोकि अपने हाथों से अपनी आखों को ढककर चिल्लाने लगते हैं कि आखिर इतना अन्धेरा क्यों है|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

17.    The will is not free – it is a phenomenon bound by cause and effect – but there is something behind the will which is free.

इच्छा आजाद नहीं होती – यह तो कारण-परिणाम के नियम से बंधी होती है – लेकिन इच्छा के पीछे कुछ होता है जोकि आजाद होता है |

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

18.    Never think there is anything impossible for the soul. It is the greatest heresy to think so. If there is sin, this is the only sin; to say that you are weak, or others are weak.

कभी भी यह मत सोचिये कि किसी काम को आप नहीं कर सकते हैं| ऐसा सोचना अपराध है| अगर दुनिया में कोई पाप है तो वह यही है| खुद से यह कहना कि मैं तो कमजोर हूँ या फिर दुसरे लोग कमजोर हैं|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

19.    Condemn none: if you can stretch out a helping hand, do so. If you cannot, fold your hands, bless your brothers, and let them go their own way.

कभी भी आलोचना मत कीजिये : अगर आप किसी की तरफ मदद का हाथ बढ़ा सकें तो जरूर बढाइए| और अगर ऐसा नहीं कर सकते तो अपनी हाथों को बाँध कर अपने भाइयों को शुभकामनाएं दीजिये और उन्हें उनके रास्ते पर जाने दीजिये|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

20.    Cowards only sin, brave men never, no, not even in mind.

कायर ही पाप करते हैं, बहादुर व्यक्ति कभी अपने मन में भी कोई पाप नहीं करता|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

21.    Do not be afraid of a small beginning. great things come afterwards. Be courageous. Do not try to lead your brethren, but serve them. The brutal mania for leading has sunk many a great ships in the waters of life. Take care especially of that, i.e. be unselfish even unto death, and work.

छोटी शुरुआत से कभी भी मत घबराइये| बड़ी चीजे बाद में ही आती हैं| बहादुर बनिए | अपने भाइयों के सामने नेता मत बनिए बल्कि सेवक बनिए| नेतृत्व करने के इसी नशे  की वजह से कई बड़े जहाज जीवन के समुद्र में डूब चुके हैं| इसका बात का ख़ास  ध्यान रहिये| मरते दम तक निस्वार्थ रहकर अपना काम कीजिये|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

22.    Do not figure out big plans at first, but, begin slowly, feel your ground and proceed up and up.

पहले से ही बड़ी-बड़ी प्लानिंग मत कीजिए बल्कि धीरे-धीरे शुरुआत कीजिये| अपनी जमीन को पहचानिए और फिर धीरे-धीरे आगे बढिए|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)



23.    Do not wait for anybody or anything. Do whatever you can. Build your hope on none.

किसी भी व्यक्ति या चीज का इन्जार मत कीजिये| आप जो कर सकते हैं वह कीजिये| किसी से कोई भी उम्मीद मत रखिये|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

24.    Go on bravely. Do not expect success in a day or a year. Always hold on to the highest. Be steady. Avoid jealousy and selfishness. Be obedient and eternally faithful to the cause of truth, humanity, and your country, and you will move the world.

बहादुरी से आगे बढिए| एक दिन या एक ही साल में सफलता की उम्मीद मत कीजिये| हमेशा बड़ा सोचिए| स्थिर रहिये| इर्ष्या और स्वार्थ से दूर रहिये| सचाई, मानवता और अपने देश के प्रति वफादार और ईमानदार रहिये और फिर देखिये आप दुनिया को बदल देंगे|

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

Youtube पर स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध विचारों का विडियो देखें

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Trust Yourself – दूसरों से पहले खुद की सुनिए|

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बार बार मैंने देखा है कि लोग एक्सपर्ट की सलाह पर भरोसा करते हैं फिर उनको पता लगता है कि वह सलाह तो उनके लिए काम ही नहीं कर रही| उन्हें लगने लगता है कि जरुर इसमें उनकी ही कोई गलती होगी क्योंकि इस सलाह को तो काम करना चाहिए आखिर यह एक एक्सपर्ट की सलाह है|  मुझे हर हफ्ते एक ऐसी ई-मेल जरुर मिलती है जिसका अंत कुछ इस तरह से होता है क्या मैं नासमझ हूं? क्या मुझ में कोई कमी है जिसकी वजह से यह सलाह मेरे लिए काम नहीं कर रही ?

ऐसा मत कीजिए, ऐसी advice इसलिए काम नहीं करती क्योंकि यह बुरी सलाह होती है| Personal Development की उन सैकड़ों किताबों को जिन्हें मैंने पढ़ा है मैं तो यही कहूंगा कि उनमें से ज्यादातर में बुरी सलाह दी गई थी इसका मतलब यह है कि उन सुझावों और सलाहों ने मेरे लिए कोई काम नहीं किया तो क्या वह लेखक झूठ बोल रहा था? नहीं मैं ऐसा बिलकुल नहीं समझता| कई बार मुझे पता होता है क्यों उस सलाह ने लेखक के लिए तो अच्छे से काम किया लेकिन उसने मेरे लिए कोई काम क्यों नहीं किया| और इसकी साधारण सी वजह यह है कि हम सब अलग इंसान हैं जो चीज एक आदमी या कुछ लोगों के एक group के लिए काम करती है जरूरी नहीं है कि वह सलाह  हरेक एक इंसान के लिए काम करें|

उदाहरण के तौर पर मैंने बहुत से किताबों में पढ़ा है कि हमें रोज अपने goals को दोहराना चाहिए, हो सकता है कि कुछ लोगों के लिए यह सलाह काम करे लेकिन मेरा अनुभव यह बताता है कि ऐसा करना तो सिर्फ समय की बर्बादी है| उन मामलों में भी जब इसने मेरे लिए काम किया है इसके नतीजे खराब रहे हैं| जिस तरीके ने मेरे लिए काम किया है वह है कि चुपचाप बैठ कर अपना काम करने में लग जाओ बजाय अपने Goals को रोज दोहराने के|
इस ब्लॉग मैंने जब कभी भी कोई आईडिया दिया है तो कुछ लोगों के लिए उसने बहुत अच्छी तरह से काम किया लेकिन बाकी लोगों को इस से कोई फायदा नहीं हुआ|

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि एक्सपर्ट कितना बड़ा है या फिर वह अपने अपने दावे को साबित करने के लिए कितने सबूत पेश करता है| जब तक वह आप को व्यक्तिगत रुप से नहीं जानता तब तक उसकी सलाह पर आँख बंद करके भरोसा न करें| अच्छा यही रहेगा कि आप इस सलाह पर काम करके देखें और अगर आपके लिए काम करती है तो ठीक है वरना इसे भूल जाइए|
आप ही बताइए कि कोई सलाह जो कि जोकि आम लोगों के लिए काम करती है जरुरी है कि वह उन लोगों के लिए भी काम करें जो कि आम नहीं हैं| क्या आप एक आम इंसान हैं| मैं तो आम इंसान नहीं हूं| क्या आप खुद में कोई ऐसी खूबी नहीं ढूंढ सकते कि जिससे आपको पता लगे कि आप दुनिया के बाकी लोगों से बिल्कुल अलग है?


एक्सपर्ट क्या कहते हैं इसके बारे में इतनी चिंता मत कीजिए| उनके सलाह वैसे भी कुछ सालों के बाद गलत साबित होने वाली है| खुद को दूसरों से इंसान की तरह देखने की कोशिश कीजिये| एक्सपर्ट की सलाह को जो काम आप करना चाहते हैं उसके लिए एक आम सुझाव की तरह लीजिए,  इस बात पर ज्यादा ध्यान दीजिए क्या चीज आपके लिए काम करती है और क्या चीज आपके लिए काम नहीं करती| अपने आप पर भरोसा रखिये| अगर एक्सपर्ट आपसे एक बात कह रहे हैं लेकिन आपका अपना अनुभव आपसे कुछ और कह रहा है तो अपने अनुभव पर भरोसा रखिये| खुद पर भरोसा रखना, आपको पर्सनल डेवलपमेंट दिशा में कहीं आगे ले जा सकता है बजाय खुद को इस बात के लिए धिक्कारने के कि आम लोगों के लिए दी गयी सलाह आपके लिए काम क्यों नहीं कर रही?


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Dheerubhai Ambani motivational quotes in hindi – धीरुभाई अम्बानी के प्रसिद्द विचार

Dheerubhai Ambani (Source : flickr)

Dhirajlal Hirachand “Dhirubhai” Ambani (28 December 1932 – 6 July 2002) :– He was an Indian business tycoon, founded Reliance Industries in Bombay with his cousin. He had been figured in the The Sunday Times as top 50 businessmen in Asia, the combined fortune of the family was $60 billion, making the Ambanis the third richest family in the world, honored posthumously with the Padma Vibhushan for his contribution in  the field of Trade and Industry.

1.  Often people think opportunity is a matter of luck. I believe opportunities are all around us. Some seize it. Others stand and let it pass by.
ज्यादातर लोगों का विचार है कि अवसर मिलना किस्मत की बात होती है| मैं इस बात में यकीन करता हूँ कि हम सब अवसरों से घिरे हुए हैं| कुछ उनका फायदा उठा लेते है| दूसरे सिर्फ खड़े रहकर उनके गुजरने का इंतज़ार करते हैं|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)
2.  I, as school kid, was a member of the Civil Guard, something like today’s NCC. We had to salute our officers who went round in jeeps. So I thought one day I will also ride in a jeep and somebody else will salute me.
जब मैं स्कूल में एक स्टूडेंट था तो उस वक्त मैं सिविल गार्ड का सदस्य भी था, यह कुछ-कुछ NCC की तरह का ही संस्थान था| जब हमारे अफसर जीपों में बैठकर गश्त कर रहे होते थे तो हमें उन्हें सलूट करना करना पड़ता था| तो मैं अक्सर सोचा करता था कि एक दिन मैं जीप में बैठा हूँगा और कोई और मुझे सलूट कर रहा होगा|
 –– धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

3.  We must always go for the best. Do not compromise on quality. Reject if it is not the best — not
only the best in India, but globally.
हमें हमेशा अपना बेहतरीन देना चाहिए| कभी पर क्वालिटी पर समझौता न करें| अगर यह सबसे अच्छा नहीं है तो इसे रिजेक्ट कर दें – न केवल भारत में बल्कि दुनिया में कहीं पर भी|
 –धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)
4.    Reliance’s success is a reflection of India’s capabilities, the talent of her people and the  potential of her entrepreneurs, engineers, managers, and workers.
रिलायंस की सफलता, भारत की क्षमताओं का एक प्रतिबिम्ब है, इसके लोगों, इसके इंटरप्रेन्योर, इंजिनियरों, मैनेजरों और कामगारों के हुनर का|
 –धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

5.    We cannot change our rulers, but we can change the way they rule us.
हम अपने शासकों को तो नहीं बदल सकते, लेकिन हम उस तरीके को बदल सकते हैं जिस तरीके से वे हम पर शासन करते हैं|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)


6.   Pursue your goal, even in the face of difficulties. Convert difficulties into opportunities.
अपने लक्ष्य का पीछा करना न छोड़ें, तब भी जब आपका सामना मुश्किलों से हो| मुश्किलों को अवसरों में बदल दीजिये|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

7.    I dream of India becoming a great economic superpower.
मैं भारत के एक आर्थिक महाशक्ति बनने का सपना देखता हूँ|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

8.    Challenge negative forces with hope, self-confidence and conviction. I believe that ambition and initiative will ultimately triumph.
नकारात्मक शक्तियों को, उम्मीद, सेल्फ-कॉन्फिडेंस और लगन से चुनौती दीजिए| मुझे पूरा यकीन है कि आखिर में जीत महत्वाकांशा और ‘पहला कदम उठाने की हिम्मत’ की ही होती है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

9.  Secret of my success was to have ambition and know minds of men.
मेरी सफलता का रहस्य है मेरा महत्वाकांशा और व्यक्ति के मन को समझना|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

10.  Our dreams have to be bigger. Our ambitions higher. Our commitment deeper. And our efforts greater.
हमारे सपने विशाल होने चाहिएं| हमारी महत्वाकांशा ऊँची होनी चाहिए| हमारे संकल्प गहरे होने चाहिएं| और हमारी प्रयत्न बड़े होने चाहिएं|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

11.   Does making money excite me? No, but I have to make money for my shareholders. What excites me is achievement, doing something difficult.
क्या पैसा कमाना मुझे रोमांचित करता है? जी नहीं, लेकिन मुझे अपने शेयरधारकों के लिए पैसा तो कमाना ही होगा| जो चीज मुझे रोमांच से भर देती है वह है सफलता और किसी मुश्किल काम को करना|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

12.    A motivated manpower is the most important thing.
प्रेरणा से भरे हुए लोग सबसे जरुरी चीज है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)


13.   I consider myself a pathfinder. I have been excavating the jungle and making the road for others to walk. I like to be the first in everything I do.
मैं खुद को एक खोजी की तरह मानता हूँ| मैं जंगल में चल कर दूसरों के लिए रास्ता तैयार कर रहा हूँ| किसी भी काम को करने के लिए पहला कदम मैं ही उठाना चाहता हूं| 
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

14.    My commitment is to produce at the cheapest price and the best quality.
मेरा, सबसे बेहतरीन चीजों को सस्ते से सस्ते दाम पर उपलब्द्ध करने का वादा है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

15.    There is no question about that (retirement). Business is my hobby. It is not a burden to me. In  any case Reliance now can run without me.
रिटायर होने का तो कोई सवाल ही नहीं है| बिजनेस तो मेरा शौक है| यह मुझ पर कोई बोझ नहीं है| और जहां तक रिलायंस का सवाल है तो यह अब मेरे बिना भी चल सकती है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

16.   You do not require an invitation to make profits.
आपको प्रॉफिट कमाने के लिए किसी invitation की जरूरत नहीं होती|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

17.  I am deaf to the word ‘no’.
मुझें “न” शब्द सुनाई ही नहीं देता|
 –धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

18.    I live the Gita.
मैं गीता को जीता हूँ|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

19.    Meeting the deadlines is not good enough, beating the deadlines is my expectation.
तय समय पर काम पूरा करना काफी नहीं है, मैं उम्मीद रखता हूँ कि हम तय समय से पहले ही काम को पूरा करेंगे|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

20.   You will never reach your destination if you stop and throw stones at every dog that barks.
अगर आप बार-बार रुक कर हरेक भौंकने वाले कुत्ते पर पत्थर फेंकने लगेंगे तो आप कभी भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच पायेंगे|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

21.   I sincerely believe that Indians have the ability to compete with the best in the world.
मुझें पूरा यकीन है कि भारतीयों के पास पूरी दुनिया से मुकाबला करने की क्षमता है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

22.    Between my past, the present and the future, there is one common factor: Relationship and Trust. This is the foundation of our growth.
मेरे गुजरे हुए कल, वर्तमान और भविष्य में एक चीज कॉमन है : रिश्ते और भरोसा| यही हमारी सफलता की बुनियाद है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)


23.   Keep your morale high, in spite of setbacks. At the end you are bound to succeed.

मुश्किल वक्त के दौरान भी अपने हौंसले को बुलंद रखें| और अंत में आपकी ही जीत होगी|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

24.   If you work with determination and with perfection, success will follow.
अगर आप काम को लगन और अपना 100 % देकर पूरा करेंगे, सफलता आपकी पीछे आएगी|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

25.   Never. Till my last breath I will work. To retire there is only one place–the cremation ground.
नहीं! कभी नहीं! अपनी आख़िरी सांस तक मैं काम करता रहूँगा | आपको रिटायर तभी होना चाहिए जब आप श्मशान घाट में हों|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

26.    Yes, I believe in God, but I don’t perform a daily puja. I don’t have any gurus. Ek baat hai,destiny, koi cheez hai.
हाँ, मैं भगवान् में यकीन रखता हूँ, लेकिन मैं रोज पूजा नहीं करता| मेरे कोई गुरु नहीं है| एक बात है, नियति भी कोई चीज है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

27.    There is no difference between our methods and those of anybody else–the only difference is  that our motivation and dedication is much greater.
हमारे काम करने के तरीके और दुसरे लोगों के काम करने के तरीकों में कोई अंतर नहीं है – फर्क सिर्फ यही है कि हमारी प्रेरणा और लगन कहीं ज्यादा बड़ी है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

28.  The problem with Indians is that we have lost the habit of thinking big!
हम भारतीयों के साथ समस्या यह है कि हम बड़ा सोचने की आदत को भुला चुके हैं!
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

29.   For those who dare to dream, there is a whole world to win!
जो व्यक्ति सपना देखने से डरता नहीं है उसके पास जीतने के लिए पूरी दुनिया होती है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

30.    If you’re born poor it’s not your fault but if you die poor it’s your fault.
अगर आप गरीबी में पैदा हुए हैं तो इसमें आपकी कोई गलती नहीं है लेकिन अगर आप गरीबी में मरते हैं तो यह पूरी तरह से आपकी ही गलती है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

31.   Don’t give up, courage is my conviction.
हिम्मत मत हारिए, हिम्मत में मेरा पक्का यकीन है|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

32.    Only when you dream it you can do it.
आप सपना देखेंगे तभी उसे पूरा कर पायेंगे|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

33.   We bet on people.
मैं लोगों पर शर्त लगाता हूँ|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

34.    You have to take the calculated risk, to earn something.
कुछ कमाने के लिए, सोच-समझ कर जोखिम उठाना ही पड़ता है|
 –धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

35.   Think big, think fast, think ahead. Ideas are no one’s monopoly.
बड़ा सोचो, तेजी से सोचो, आगे के बारे में सोचो| आईडिया किसी की जागीर नहीं होते|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

36.   The success of the young entrepreneur will be the key to India’s transformation in the new millennium.
नए इंटरप्रेन्योर को मिलने वाली सफलता ही, नयी सदी में भारत के काया-कल्प की चाबी बनेगी|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

37.  A vision has to be within reach not in the air. It has to be achievable.
भविष्य को लेकर आपकी सोच आपकी पहुँच के अंदर होनी चाहिए, हवा में नहीं| यह कुछ ऐसा हो जिसे की आप हासिल कर सकें|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

38.    True entrepreneurship comes only from risk-taking.
सच्चा इंटरप्रेन्योर बन्ने की कला केवल रिस्क उठाने से ही आती है |
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

39.   Play on the frontiers of technology. Be ahead of the tomorrows.
टेक्नोलॉजी में हमेशा आगे रहना चाहिए| कल से आगे बढ़ कर चलिए|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

40.  I don’t think that ambition should not be in the dictionary of entrepreneurs. But our ambition
should be realistic. You have to realise that you can’t do everything.
मुझे लगता है कि इंटरप्रेन्योर की डिक्शनरी में महत्वाकांशा नाम का शब्द जरूर होना चाहिए| लेकिन हमारी महत्वाकांशा प्रैक्टिकल होनी चाहिए| आपको समझना होगा कि आप सब कुछ नहीं कर सकते|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

41.   One thing you won’t find in me and that is an ego.
मुझमें आपको एक चीज नहीं मिलेगी और वह है अहंकार|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

42.    It [further education] is most essential, otherwise I would not have educated my sons. I learnt  the hard way. Maybe if I had some education my success and growth would have been quicker.
आगे पढ़ना बहुत जरुरी है, अगर ऐसा नहीं होता तो मैंने अपने बेटों को नहीं पढ़ाया होता| मैंने इस सबक को कठिनाई से गुजर का सीखा है| अगर मेरे पास कुछ ज्यादा शिक्षा होती तो मुझे सफलता और तरक्की तेजी से मिल जाती|
  – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

43.    I think that our fundamental belief is that for us growth is a way of life and we have to grow at all times.
मेरे विचार से हमारा बुनियादी सिद्धांत यह है कि हमारे लिए तरक्की जिन्दगी जीने का एक तरीका है और हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना होगा|
 – धीरुभाई अम्बानी(Dheerubhai Ambani)

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फ़कीर बन कर भी आप कैसे खुश रह सकते हैं ?

(Based on Post : “Be a Fun Broke Person” by Steve Pavlina)  
दोस्तों हम सभी के जीवन में कभी न कभी ऐसा मुकाम जरूर आता है जब हम जीवन में एक स्तर पर आकर ठहर जाते हैं| हम आगे तो बढना चाहते हैं लेकिन असफल होने का डर हमें आगे बढ़ने नहीं देता| उदाहरण के तौर पर अगर आप अपनी जॉब से खुश नहीं हैं और आप इसे छोड़ कर अपना बिज़नस करना चाहते हैं और आपने इसके फायदे और नुक्सान का भी अनुमान लगा कर उसकी तैयारी भी कर ली है लेकिन फिर भी आपको यह डर सताता है कि अगर बिज़नस नहीं चला तो क्या होगा? बिज़नस तो दूर की बात है नौकरी से भी हाथ धोना पडेगा| कंगाल होने का यह डर आपको कभी भी आगे बढ़ने नहीं देगा| 
मान लीजिए कि आपने हिम्मत करके अपना बिज़नस शुरू भी कर दिया और कुछ समय तक ठीक-ठाक चलने के बाद वह बुरी तरह से असफल हो गया| अब आप क्या करेंगे? कैसे खुद को संभालकर अपने जीवन को वापस पटरी पर लायेंगे| स्टीव पव्लीना नें इस विषय पर एक आर्टिकल लिखा है “Be a Fun Broke Person” जिस पर आधारित लेख आपके सामने हाजिर है|
अगर आपको कंगाल होने का डर सताता है तो आप चाहे जितनी भी तैयारी कर लें आप आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे|
क्या ऐसा हो सकता हैं कि आप जीवन भर के लिए कंगाल होकर भी खुशी से झूमते रह सकते है? अगर आपको ऐसा सोचना भी मजाक लगता हैं तो फिर :
1.    आप समझ ही नहीं पा रहे कि जीवन में आखिर क्या मायने रखता है ?
2.   आपको लगता है कि पैसे के आते ही आपके जीवन की सभी problems चुटकी बजाते ही हल हो जायेंगी|
3.   आप एक बोरिंग किस्म के इंसान हैं|

आपको क्या लगता है कि आखें बंद करना, खुद को लाचार समझना, और एक बोरिंग इंसान होना आपको आगे बढ़ने में किसी भी तरह से मदद करता है| अगर आपको किसी व्यक्ति को एक नौकरी पर  रखना हो तो आप क्या इस तरह के इंसान को नौकरी देना पसंद करेंगे?


फ़कीर होने का अपना मजा है|
यह एक रोमांचक अनुभव है|
यह आपकी क्रिएटिविटी के लिए एक चैलेंज है – इससे दूर भागने की कोशिश न करें बल्कि फ़कीर होने के इस अनुभव का पूरी तरह से आनंद लें|
सिर्फ इसलिए कि आपके पास पैसे नहीं हैं आपका जीवन रुकना नहीं चाहिए|
आप अभी भी किसी से प्यार कर सकते हैं|
आप हंस सकते हैं|
आप एक्सरसाइज कर सकते हैं|
आप महान व्यक्तियों द्वारा लिखी गई किताबें पढ़ सकते हैं|
आप लिख सकते हैं| आप संगीत रच सकते हैं| आप कलाकारी कर सकते हैं| अगर आपके पास पेन्टिंग का सामान खरीदने की लिए पैसे नहीं हैं, तो आप रेत से कला का नमूना बना सकते हैं| अगर आपके पास संगीत के साज खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं तो आप गाना गा सकते हैं|
आप लिफ्ट मांग कर दूर-दूर की यात्रा कर सकते हैं|
आप अपने सोशल स्किल्स पर काम कर सकते हैं और ढेरों नए दोस्त बना सकते है|
जब मैं कंगाल हुआ तो मैं एक कार्डबोर्ड बॉक्स को मेज की तरह इस्तेमाल करता था| तो क्या मुझे इस बात का बुरा लगता था ? क्या अच्छा नहीं होता कि मैं इस बात को मजाक में उड़ा देता| जब आप कंगाल होते हैं  हैं तो आपको ऐसे ही बेफकूफी भरे काम करने पड़ते हैं|
आप कंगाल हैं, तो क्या? कृपया करके राई का पहाड़ मत बनाइये और इसे कोई ऐसी चीज मत समझिए जिससे कि आप जितनी जल्दी हो सके भागने की कोशिश करें| इसके बारे में चिंता करना छोड़ दीजिए| वैसे भी अगर दुनिया के हिसाब से देखें तो अगर आप इसे आर्टिकल को पढ़ पा रहें हैं तो आप बहुत से लोगों से बहुत अच्छी हालत में है| आप शायद अभी भी दुनिया के उस हिस्से से ताल्लुक रखते  हैं जो कि अमीर है|  इस दुनिया के बहुत से लोग खुशी-खुशी आपके जैसे कंगाल होने के लिए तैयार हो जायेंगे, और उनके हिसाब से तो यह बहुत ही शान की बात होगी, आपके पास पीने के लिए साफ़ पानी है? आपको रोज हिंसा का सामना नहीं करना पड़ता ? इन्टरनेट – वो क्या होता है ? अगर आप इसका प्रयोग करते हैं तो जरूर आप बहुत ही अमीर होंगे !


ज़रा अपनी जिन्दगी को उनके नजरिए से देखने की कोशिश करें| इसे महसूस करें कि जहां आप यह मान बैठे हैं आप बिलकुल कंगाल हो चुके हैं, वहीं हकीकत में आप इतने अमीर हैं!
और भगवान् के लिए इतने बोरिंग इंसान मत बनिए| कंगाल होने का बहाना नहीं चलेगा| खुशी को अपने जीवन में वापस लाइए,| वह काम जो आपको खुशी देता है उसे मत छोडिए तब भी जब आप पूरी तरह से दिवालिया हो चुके हों, इसलिए नहीं कि इससे आप अपना गम थोड़ी देर के लिए भुला सकते है बल्कि इसलिए कि आप इस बात को महसूस कर चुके हैं कि आपके पास पहले ही इतना कुछ है| डरना और खुद को दोषी ठहराना छोडिए| अपने जीवन को आज और अभी खुशियों से पूरी तरह से भर दीजिए| अपने सपनों को सिर्फ इसलिए ठन्डे बस्ते में मत डालिए क्योंकि आपके पास उन्हें पूरे करने के लिए पैसे नहीं हैं| यह तो कोरी नासमझी ही है| और कोई भी ऐसा करना पसंद नहीं करता| आप ही बताइए कि क्या आप ऐसी फिल्म को देखना पसंद करेंगे जिसके अंत में हीरो हार मानकर बैठ जाता है|
आपके पास ज्यादा पैसे नहीं हैं इसके बार-बार सोचकर खुद को परेशान मत कीजिए| इस फकीरी में भी गर्व महसूस कीजिये| इसमें कुछ भी गलत नहीं है| वही हुआ जिससे आपको हमेशा डर लगता था और आप अभी भी अपने पैरों पर खड़े हैं और उसका सामना कर रहे हैं क्या ऐसा करने के लिए हिम्मत नहीं चाहिए?
जीवन में आगे बढ़ने के लिए आपको जरूर कोशिश करनी चाहिए लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वर्तमान को नजरअंदाज करके आप सुंदर भविष्य के सपनों में खोए रहें| आप पहले ही कितने अमीर हैं ज़रा इस पर गौर कीजिये| आज और अभी से जीवन के हरेक पल का पूरा मजा लीजिए|
अपने रिश्तों को अभी से संभालना शुरू कीजिये इस काम को आने वाले कल पर मत टालिए|
इन दिनों मेरे पास धन-दौलत की कमी नहीं है| लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेरा सबसे बड़ा खजाना क्या है? वह यह है कि अब मुझे कंगाल होने से डर नहीं लगता| मैंने तभी अमीर होना सीख लिया था जब कि मेरे पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी| इसलिए अब मैं कंगाल होने के डर से आजाद हूँ| अगर ऐसा फिर से होता है तो न तो यह असफलता होगी और न ही कोई ऐसी चीज जिसे लेकर मुझे शर्मिन्दा होना चाहिए| बल्कि यह तो और भी मजेदार और बड़ी चुनौती होगी|


अब कुछ लोग कहेंगे, “मैं गरीब भी रह चुका हूँ और अमीर भी| अमीर होना अच्छा है|”
मैं तो इसे खुशफहमी ही मानता हूँ! अमीरी-गरीबी से बेहतर नहीं होती| बस यह उससे अलग होती है| आपको यकीन न हो तो अपने किसी ऐसे करीबी रिश्तेदार से पूछ कर देख लीजिए जो आपके हिसाब से बहुत अमीर हो| क्या उसे रात को ठीक से नींद आती है| क्या उसे भूख लगती है? और क्या वह खुश है? अमीर वो होता है जो अपने जीवन के हर पल को पूरी तरह से जीना जानता है| अगर आप वाकई में अमीर हैं तो फिर आप हमेशा अमीर ही रहेंगे और इससे कोई फर्क नहीं पडेगा कि आपके पास कितने पैसे हैं| तो अमीरी-गरीबी का पता इंसान सोच से लगता है न कि उसके पास कितनी धन-दौलत है इससे|
मैं फिर से आप से कहता हूँ कि एक उदास फ़कीर मत बनिए| आखिर दुनिया में कोई भी व्यक्ति कैसे आपकी मदद कर पायेगा अगर आप हमेशा इतने बोरिंग किस्म के इंसान बने रहेंगे?
मुझे ऐसे लोगों से मिलना बहुत अच्छा लगता है जिनके पास ज्यादा पैसे नहीं होते, लेकिन बोरिंग किस्म के व्यक्तियों से नहीं… और ऐसे लोगों से तो बिलकुल भी नहीं जोकि खुद को कोसते रहते हैं… और न ही उन लोगों से जोकि हमेशा इस चिंता में डूबे रहते हैं कि उनके जीवन में पता नहीं आगे क्या गड़बड़ होने वाली है|
जो चीजें बनी हैं वे कभी खराब भी होंगी, उनके चिंता मत कीजिये और इसे हंसी में उड़ा दीजिए|
तो आपके ऊपर late fees लगा दी गई है? आप अपने मकान का किराया नहीं दे सकते| आपकी कार भी खराब होनी वाली है| इतनी बड़ी दुनिया में आपकी यह चिंताएं आखिर क्या मायने रखती हैं? क्या आपका इन बातों को लेकर इतना दुखी हो जाना सही है? दुनिया तो इंसान को मंगल गृह पर भेजने की तैयारी कर रही है और आप अपने किराए को लेकर परेशान हो रहें है| आपको नहीं लगता कि आपको भी अपनी चिंता का स्टैण्डर्ड थोड़ा बढ़ाना चाहिए|
एक मस्त फ़कीर बनिए|
ज्यादा हंसिये, ख़ास कर कि अपनी परेशानियों पर|
पढ़िए
एक्सरसाइज कीजिये
मुस्कराइए
दोस्तों को गले लगाइए
और एक खिलाड़ी बनकर जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना कीजिये|

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Srinivas Ramanujan biography in Hindi

Srinivasa Ramanujan

श्रीनिवास रामानुजन् इयंगर (22 दिसम्बर 1887 – 26 अप्रैल 1920) एक महान भारतीय गणितज्ञ थे। इन्हें आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में गिना जाता है। इन्हें गणित में कोई ख़ास ट्रेनिंग नहीं मिली लेकिन फिर भी अपनी प्रतिभा और लगन से न केवल गणित के क्षेत्र में कमाल के अविष्कार किए बल्कि भारत के नाम को दुनिया भर में रौशन कर दिया।
ये बचपन से ही बेहद प्रतिभावान थे। इन्होंने अपने आप ही गणित सीखा और अपने जीवनभर में गणित के 3,884 theorems को इकट्ठा किया। इनमें से ज्यादातर theorems सही साबित किये जा चुके हैं। इन्होंने गणित के सहज ज्ञान और algebra की अपनी समझ के बल पर बहुत से ओरिजनल और अनोखे परिणाम निकाले जिन पर आधारित रिसर्च आज तक हो रही है।

रामानुजन का जन्म 22 दिसम्बर 1887 को भारत में कोयंबटूर के ईरोड नाम के गांव में हुआ था। वह पारंपरिक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। इनकी की माता का नाम कोमलताम्मल और इनके पिता का नाम श्रीनिवास अय्यंगर था। यह तीन वर्ष की आयु तक बोलना भी नहीं सीख पाए थे। जब इतनी बड़ी आयु तक जब रामानुजन ने बोलना आरंभ नहीं किया तो सबको चिंता हुई कि कहीं वे गूंगे तो नहीं हैं। बाद के वर्षों में जब उन्होंने स्कूल में एडमिशन लिया तो भी पढ़ाई में इनका कभी भी मन नहीं लगा। फिर भी रामानुजन ने दस वर्ष की उम्र में प्राइमरी परीक्षा में पूरे जिले में सबसे अधिक नंबर हासिल किये|

रामानुजन को सवाल पूछना बहुत पसंद था। उनके सवाल अध्यापकों को कभी-कभी बहुत अटपटे लगते थे। जैसे कि इस संसार में पहला पुरुष कौन था? पृथ्वी और बादलों के बीच की दूरी कितनी होती है? रामानुजन का व्यवहार बड़ा ही मधुर था। इनका गोल-मटोल शरीर और जिज्ञासा से चमकती आखें इन्हें एक अलग ही पहचान देती थीं। इनके साथियों के अनुसार इनका व्यवहार इतना अच्छा था कि कोई इनसे नाराज हो ही नहीं सकता था। स्कूल में इनकी प्रतिभा ने दूसरे पढने वाले स्टूडेंट्स और शिक्षकों पर छाप छोड़ना शुरू कर दिया। इन्होंने स्कूल के समय में ही कालेज लेवल के गणित को पढ़ लिया था। इनके स्कूल के प्रिंसिपल ने तो यहाँ तक कह दिया था कि स्कूल में होने वाली परीक्षाओं के नियम रामानुजन के लिए लागू नहीं होते हैं। हाईस्कूल की परीक्षा पास करने के बाद इन्हें गणित और अंग्रेजी मे अच्छे अंक लाने के कारण सुब्रमण्यम स्कालरशिप मिली और आगे कालेज की शिक्षा के लिए प्रवेश भी मिला।


तभी एक परेशानी आई। रामानुजन गणित को इतना अधिक पसंद करते थे कि वे दूसरे विषयों पर ध्यान ही नहीं देते थे। यहां तक की वे हिस्ट्री, बायोलॉजी की क्लास में भी गणित के प्रश्नों को हल किया करते थे। इसका नतीजा यह हुआ कि ग्यारहवीं कक्षा के एग्जाम में वे गणित को छोड़ कर बाकी सभी सब्जेक्ट्स में फेल हो गए और परिणामस्वरूप उनको स्कालरशिप मिलनी बंद हो गई। अब एक तो घर की खराब आर्थिक स्थिति और ऊपर से स्कालरशिप भी नहीं मिल रही थी। रामानुजन के लिए यह बड़ा ही कठिन समय था। घर की स्थिति सुधारने के लिए इन्होने गणित के कुछ ट्यूशन तथा बही-खाते का काम भी किया। कुछ समय बाद 1907 में रामानुजन ने फिर से बारहवीं कक्षा की प्राइवेट परीक्षा दी और फेल हो गए। और इसी के साथ रामानुजन की पढ़ाई का यहीं अंत हो गया|

स्कूल छोड़ने के बाद के पांच साल का समय इनके लिए बहुत हताशा भरा था। भारत इस समय गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा था। चारों तरफ भयंकर गरीबी थी। ऐसे समय में रामानुजन के पास न तो कोई नौकरी थी और न ही किसी institution अथवा प्रोफेसर के साथ काम करने का मौका। बस उनका ईश्वर पर अटूट विश्वास और गणित के प्रति उनकी लगन ने उन्हें अपना काम करते रहने के लिए हमेशा प्ररित किया। वे इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी गणित की अपनी रिसर्च को चलाते रहे। इस समय रामानुजन को ट्यूशन से कुल पांच रूपये महीने की कमाई होती थी और इसी में गुजारा होता था। रामानुजन का यह जीवन काल बहुत कष्ट और दुःख से भरा था। इन्हें हमेशा अपने भरण-पोषण के लिए और अपनी शिक्षा को जारी रखने के लिए इधर उधर भटकना पड़ता और अनेक लोगों से वह मदद भी मांगनी पड़ती जो उन्हें कभी भी नहीं मिलती थी।

सन 1908 में इनके माता पिता ने इनकी शादी जानकी नाम की लडकी से कर दी। शादी हो जाने के बाद अब इनके लिए सब कुछ भूल कर गणित में डूबना संभव नहीं था। इसलिए वे नौकरी की तलाश में मद्रास आए। बारहवीं की एग्जाम में फेल होने की वजह से इन्हें नौकरी नहीं मिली और उनका सेहत भी बुरी तरह से गिर रही थी। अब डॉक्टर की सलाह पर इन्हें वापस अपने घर लौटना पड़ा। बीमारी से ठीक होने के बाद वे वापस मद्रास आए और फिर से नौकरी की तलाश शुरू कर दी। ये जब भी किसी से मिलते थे तो उसे अपना एक रजिस्टर दिखाते थे। इस रजिस्टर में इनके द्वारा गणित में किए गए सारे कार्य होते थे। आखिरकार उनकी मुलाक़ात डिप्टी कलेक्टर श्री वी. रामास्वामी अय्यर से हुई जोकि गणित के जाने-माने विद्धवान थे उनकी मदद से इन्हें 25 रूपये महीने की स्कालरशिप मिलनी शुरू हो गई। यहां एक साल पूरा होने पर इन्होने मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में क्लर्क की नौकरी की। 

सौभाग्य से इस नौकरी में काम का बोझ कुछ ज्यादा नहीं था और यहां इन्हें अपने गणित के लिए पूरा समय मिलता था। यहां पर रामानुजन रात भर जाग कर नए-नए गणित के formulae लिखा करते थे और फिर थोड़ी देर तक आराम कर के फिर दफ्तर के लिए निकल जाते थे। रामानुजन गणित की अपनी रिसर्च को स्लेट पर लिखते थे। और बाद में उसे एक रजिस्टर में लिख लेते थे। रात को रामानुजन के स्लेट और खड़िए की आवाज के कारण परिवार के अन्य सदस्यों की नींद चौपट हो जाती थी।


इस समय भारतीय और पश्चिमी रहन सहन में एक बड़ी दूरी थी और इस वजह से सामान्यतः भारतीयों को अंग्रेज वैज्ञानिकों के सामने अपने बातों को कहने में काफी संकोच होता था। यहाँ पर रामानुजन के पुराने शुभचिंतक इनके काम आए और इन लोगों ने रामानुजन द्वारा किए गए काम को लंदन के प्रसिद्ध गणितज्ञों के पास भेजा। यहीं पर रामानुजन, प्रोफेसर हार्डी के संपर्क में आए| अब रामानुजन के जीवन में एक नए युग की शुरुआत हुई जिसमें प्रोफेसर हार्डी की बहुत बड़ी भूमिका थी। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जिस तरह से एक जौहरी हीरे की पहचान करता है और उसे तराश कर चमका देता है, रामानुजन के जीवन में वैसा ही कुछ स्थान प्रोफेसर हार्डी का है। शुरू-शुरू में रामानुजन ने जब अपनी रिसर्च को प्रोफेसर हार्डी के पास भेजा तो पहले उन्हें भी पूरा समझ में नहीं आया। जब उन्होंने अपने मित्र गणितज्ञों से सलाह ली तो वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि रामानुजन गणित के क्षेत्र में एक बेशकीमती हीरा हैं और इनके द्वारा किए गए कार्य को ठीक से समझने और उसमें आगे शोध के लिए उन्हें इंग्लैंड आना चाहिए। अतः उन्होने रामानुजन को कैंब्रिज आने के लिए आमंत्रित किया।

लेकिन कुछ व्यक्तिगत कारणों और धन की कमी के कारण रामानुजन ने प्रोफेसर हार्डी के कैंब्रिज के बुलावे को अस्वीकार कर दिया। प्रोफेसर हार्डी को इससे निराशा हुई लेकिन उन्होनें किसी भी तरह से रामानुजन को वहां बुलाने का निश्चय किया। इसी समय रामानुजन को मद्रास विश्वविद्यालय में स्कॉलरशिप मिल गई थी जिससे उनका जीवन कुछ आसान हो गया और उनको रिसर्च के लिए पूरा समय भी मिलने लगा था। इसी बीच आखिरकार प्रोफेसर हार्डी ने रामानुजन को कैंब्रिज आने के लिए मना ही लिया।

इंग्लैण्ड में रामानुजन को बस थोड़ी परेशानी थी और इसका कारण था उनका शर्मीला, शांत स्वभाव और शुद्ध शाकाहारी खान-पान। जब तक वे लंदन में रहे ज्यादातर वे अपना भोजन खुद ही बनाते थे। इंग्लैण्ड की इस यात्रा से उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। अपने एक विशेष रिसर्च के कारण इन्हें कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से बी.ए. की डिग्री भी मिली। लेकिन वहां की जलवायु और रहन-सहन उन्हें रास नहीं आया और उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा।

इसके बाद वहां रामानुजन को रॉयल सोसाइटी का फेलो nominate किया गया। ऐसे समय में जब भारत गुलामी में जी रहा था तब एक भारतीय को रॉयल सोसाइटी की सदस्यता मिलना एक बहुत बड़ी बात थी। रॉयल सोसाइटी के पूरे इतिहास में इनसे कम आयु का कोई सदस्य आज तक नहीं हुआ है। पूरे भारत में उनके शुभचिंतकों ने उत्सव मनाया और सभाएं की। अब ऐसा लग रहा था कि सब कुछ बहुत अच्छी जगह पर जा रहा है। लेकिन रामानुजन का स्वास्थ्य गिरता जा रहा था और अंत में डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें वापस भारत लौटना पड़ा।

भारत लौटने पर भी स्वास्थ्य ने इनका साथ नहीं दिया और हालत गंभीर होती जा रही थी। इस बीमारी की दशा में भी इन्होने मॉक थीटा फंक्शन पर एक बेहद अच्छी क्वालिटी का रिसर्च पेपर लिखा। आजकल उनके इस काम का प्रयोग न केवल गणित बल्कि चिकित्साविज्ञान में कैंसर को समझने के लिए भी किया जाता है।

इनका गिरता स्वास्थ्य सबके लिए चिंता का विषय बन गया और यहां तक की अब डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था। अंत में रामानुजन के विदा की घड़ी आ ही गई। 26 अप्रैल1920 के प्रातः काल में वे अचेत हो गए और दोपहर होते होते उन्होने प्राण त्याग दिए। इस समय रामानुजन की आयु मात्र 33 वर्ष थी। इनका असमय निधन गणित जगत के लिए अपूरणीय क्षति था।

रामानुजन और इनके द्वारा किए गए अधिकांश कार्य अभी भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बने हुए हैं। एक बहुत ही सामान्य परिवार में जन्म ले कर पूरे विश्व को आश्चर्यचकित करने की अपनी इस यात्रा में इन्होने भारत को अपूर्व गौरव प्रदान किया। उनका वह पुराना रजिस्टर जिस पर वे अपने थ्योरम और फोर्मुले लिखते थे 1976 में अचानक ट्रिनीटी कॉलेज के पुस्तकालय में मिला। करीब सौ पन्नों का यह रजिस्टर आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बना हुआ है। इस रजिस्टर को बाद में रामानुजन की नोट बुक के नाम से जाना गया। मुंबई के टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान द्वारा इसका प्रकाशन भी किया गया है। 

रामानुजन के शोधों की तरह उनके गणित में काम करने की शैली भी विचित्र थी। वे कभी कभी आधी रात को सोते से जाग कर स्लेट पर गणित से सूत्र लिखने लगते थे और फिर सो जाते थे। इस तरह ऐसा लगता था कि वे सपने में भी गणित के प्रश्न हल कर रहे हों। इन्होने शून्य और अनन्त को हमेशा ध्यान में रखा और इसके बीच के संबंध को समझाने के लिए गणित के सूत्रों का सहारा लिया। 

रामानुजन के कार्य करने की एक विशेषता थी। पहले वे गणित का कोई नया सूत्र या प्रमेंय पहले लिख देते थे लेकिन उसकी उपपत्ति पर उतना ध्यान नहीं देते थे| रामानुजन का आध्यात्म के प्रति विश्वास इतना गहरा था कि वे अपने गणित के क्षेत्र में किये गए किसी भी काम को आध्यात्म का ही एक अंग मानते थे। वे धर्म और आध्यात्म में केवल विश्वास ही नहीं रखते थे बल्कि उसे तार्किक रूप से प्रस्तुत भी करते थे। वे कहते थे कि “मेरे लिए गणित के उस सूत्र का कोई मतलब नहीं है जिससे मुझे आध्यात्मिक विचार न मिलते हों।

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Rudyard Kipling famous quotes in hindi

Rudyard Kipling

Rudyard Kipling(रुडयार्ड किपलिंग) (Born on 30 December 1865 Bombay, Died 18 January 1936, aged 70)) : – Short-story writer, novelist, poet, journalist, children’s literature, poetry, travel literature, science fiction, Famous Work : The Jungle Book, Kim, “The White Man’s Burden

1.  If you can keep your wits about you while all others are losing theirs, and blaming you. The world will be yours and everything in it, what’s more, you’ll be a man, my son.
अगर आप तब भी शांत रह सकें जब आपके आस-पास के सभी लोग अपना धीरज खोकर आपको दोष दे रहे हों, तो यह दुनिया और इसके अंदर की सभी चीजें तुम्हारे ही लिए हैं, और इससे बड़ी बात यह है कि मेरे बेटे तुम एक सच्चे पुरुष बनोगे|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)
2.   I never made a mistake in my life; at least, never one that I couldn’t explain away afterwards.
मैंने अपने जीवन में कोई भी गलती नहीं की, कम से कम ऐसी तो नहीं जिसे मैं बाद में स्वीकार न कर सकूं|
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

3.    I always prefer to believe the best of everybody, it saves so much trouble.
मैं हमेशा सभी के बारे में अच्छा ही सोचता हूँ, इससे मेरी परेशानियां कम हो जाती हैं| 
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)
4.   A woman’s guess is much more accurate than a man’s certainty.
एक औरत का अनुमान एक आदमी के यकीन से कहीं ज्यादा सही होता है|
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

5.   What is the Law of the Jungle? Strike first and then give tongue
जंगल का नियम क्या है? पहले हमला करो और फिर उसे खा लो|
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)


6.    Never look backwards or you’ll fall down the stairs.
पीछे मत देखिए वरना आप सीढ़ियों से नीचे गिर जायेंगे|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

7.   Of all the liars in the world, sometimes the worst are our own fears.

दुनिया में जो भी झूंठ बोले जाते हैं, उन सभी में से सबसे नुकसानदेह वे झूंठ होते हैं जो हम डर की वजह से खुद से बोलते हैं|
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

8.    For the strength of the Pack is the Wolf, and the strength of the Wolf is the Pack.
भेडियों के झुण्ड की ताकत एक भेड़िया होता है और भेडिये की ताकत उसके झुण्ड से होती है|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

9.  I am the Cat who walks by himself, and all places are alike to me.

मैं एक ऐसी बिल्ली हूँ जो आजादी  से घूमती है, और सभी जगह मेरे लिए एक जैसी ही हैं|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

10.   God could not be everywhere, and therefore he made mothers.
भगवान् हर कहीं नहीं हो सकता, और इसलिए उसने माँ को बनाया|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

11.   Words are, of course, the most powerful drug used by mankind.

शब्दों का नशा, बेशक, इंसानों के लिए सबसे ताकतवर नशा है|
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

12.   He travels the fastest who travels alone.
जो व्यक्ति अकेला सफ़र करता है वही सबसे तेज चलता है|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)



13.    All the people like us are we, and everyone else is They.

वे लोग जो हमारे जैसे हैं हमें अच्छे लगते हैं, और जो हमारे जैसे नहीं हैं वे हमें पसंद नहीं आते|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

14.   The first condition of understanding a foreign country is to smell it.
किसी भी अनजान देश को समझने का सबसे अच्छा तरीका है उसे महसूस करना| 
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

15.   If history were taught in the form of stories, it would never be forgotten.

अगर इतिहास को कहानियों के रूप में सिखाया जाता तो हम इसे कभी नहीं भूलते|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

16.    Everyone is more or less mad on one point.
हममें से हरेक ने, अपने जीवन में कभी न कभी, धैर्य जरूर खोया होता है|
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

17.    The silliest woman can manage a clever man; but it needs a very clever woman to manage a fool.

एक समझदार व्यक्ति को तो कोई नासमझ औरत भी संभाल सकती है, लेकिन एक मूर्ख व्यक्ति को संभालने के लिए एक बहुत ही समझदार महिला की जरूरत होती है|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

18.   Take everything you like seriously, except yourselves.
जिन व्यक्तियों को आप पसंद करतें हैं उन सभी को गंभीरता से लें, सिवाय खुद के|
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

19.   I keep six honest serving men (they taught me all i knew); Theirs names are What and Why and When And How And Where and Who.

मेरे पास छह सबसे अच्छे सेवक हैं(जो मुझे सब कुछ सिखा देते है); और वे हैं ‘क्या’,  ‘क्यों’ , ‘कब’, ‘कैसे’, ‘कहाँ’ और ‘कौन’|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

20.    No price is too high to pay for the privilege of owning yourself.
अगर आप अपनी आजादी को खरीद सकें तो कोई भी कीमत ज्यादा नहीं होती|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

21.   You must learn to forgive a man when he’s in love. He’s always a nuisance.

जो व्यक्ति प्यार में होता है, उसे आप माफ़ ही कर दें तो अच्छा रहेगा|  ऐसे लोग हमेशा ही गड़बड़ करते हैं|
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

22.    Buy a pup and your money will buy Love unflinching that cannot lie.
एक कुत्ता खरीद लीजिए और आप पैसा खर्च करके एक ऐसा प्यार खरीद लेंगे जोकि सच्चा होगा और कभी आपसे झूठ नहीं बोलेगा| 
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)



23.    There is no sin so great as ignorance. Remember this.

अज्ञान से बड़ा कोई पाप नहीं होता| इसे हमेशा याद रखें| 
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

24.    Gardens are not made by singing ‘Oh, how beautiful!’ and sitting in the shade
छायाँ में बैठकर और बगीचे की तारीफ़ करने से आप बगीचा नहीं बना सकते|
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

25.    It does not matter what people think of a man after his death.

आपके मरने के बाद लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता|
– रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

26.   This is a brief life, but in its brevity it offers us some splendid moments, some meaningful adventures.
यह जीवन तो बहुत ही छोटा होता है, लेकिन फिर भी यह हमें कुछ कमाल के पल और कुछ रोमांच दे जाता है|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

27.    Now, don’t be angry after you’ve been afraid. That’s the worst kind of cowardice.

जब कभी आपको डर लगे तो गुस्सा मत कीजिये यह कायरता का सबसे बुरा रूप है|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

28.  How can you do anything until you have seen everything,or as much as you can?
आप कोई काम आखिर कैसे कर सकते हैं जब तक कि आपने दुनिया को, जितनी आपकी क्षमता है उतने, ध्यान से नहीं देखा हो|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

29.  We be of one blood, ye and I

आप हो या फिर मैं हूँ, आखिर हमारे खून का रंग तो एक ही है|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

30.  The glory of the garden lies in more than meets the eye.
एक बगीचे की ख़ूबसूरती जितना की हमें नजर आती है उससे कहीं ज्यादा होती है|
 – रुडयार्ड किपलिंग(Rudyard Kipling)

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कबीर दास के दोहे(भाग-1)

(Quotes from Sant Kabir Das with meaning in Hindi – Part1)

दुख में सुमिरन सब करे, सुख मे करे न कोय ।
जो सुख मे सुमिरन करे, दुख काहे को होय ।

दोहे का अर्थ : दुःख-तकलीफ में तो सभी भगवान् को याद करते हैं, सुख में कोई उसे याद नहीं करता, जो व्यक्ति सुख में भी भगवान् को याद रखता है उसे फिर कोई भी दुःख-दर्द नहीं सता सकता|
तिनका कबहुँ ना निंदिये, जो पाँव तले होय ।
कबहुँ उड़ आँखो पड़े, पीर घानेरी होय । 
दोहे का अर्थ : उस तिनके कोई छोटा मत समझिये जो कि पैरों तले दबा होता है, क्योंकि जब हवा चलने पर वही तिनका आँखों में पड़ जाता है तो बड़ी तकलीफ देता है| अर्थात अपने से छोटे जीव का कभी तिरस्कार मत कीजिए|
साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय ।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय ।
दोहे का अर्थ : हे प्रभु मुझे इतना दीजिये कि मेरे परिवार का पेट भर जाए, न तो मैं ही भूखा रहूँ और ना ही मेरे घर में आने वाला कोई मेहमान ही भूखा जाए |

जाति न पूछो साधु की, पूछी लीजिए ज्ञान ।
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान ।
दोहे का अर्थ : बुद्धिमान पुरुष से उसकी जाति मत पूछिए, उससे उसका ज्ञान पूछिए| तलवार का मूल्य कीजिये और म्यान(तलवार रखने का खोल) को पडी रहने दीजिये|  
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ।
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ।
दोहे का अर्थ : हे मन, जरा धीरज रखो, सब काम धीरे-धीरे ही होते हैं| माली चाहे सौ घड़े पानी ही सिंचाई क्यों न कर ले, पेड पर फल तो मौसम के आने पर ही लगेंगे|  
पाँच पहर धंधे गया, तीन पहर गया सोय ।
एक पहर हरि नाम बिन, मुक्ति कैसे होय ।

दोहे का अर्थ : पांच पहर काम पर गए, तीन पहर नींद में बिताए, आखिरी एक पहर में भी भगवान् को याद नहीं किया, अब आप ही बताईये कि मुक्ति कैसे मिलेगी|
*(पहर = 2.5-3 hours time)
शीलवंत सबसे बड़ा, सब रतनन की खान ।
तीन लोक की संपदा, रही शील में आन ।
दोहे का अर्थ : जीवन में विनम्रता सबसे बड़ा गुण होता है, यह सब गुणों की खान है| सारे जहां की दौलत होने के बाद भी सम्मान, विनम्रता से ही मिलता है|
माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर ।
आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर ।
दोहे का अर्थ : ना तो धन-दौलत मरी और न ही मन, शरीर मरते रहे| न तो उम्मीद मरी और न ही लालच, कबीर दास कहते हुए चले गए|
माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रोंदे मोय ।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौदूंगी तोय ।
दोहे का अर्थ : मिट्टी, कुम्हार से कहती है, कि आज तू मुझे पैरों तले रोंद (कुचल) रहा है| एक दिन ऐसा भी आएगा कि मैं तुझे पैरों तले रोंद दूँगी|
रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय ।
हीना जन्म अनमोल था, कोड़ी बदले जाय । 
दोहे का अर्थ : कबीर जी कहते हैं कि रात सो कर गवां दी, और दिन खाने-पीने में गुजार दिया| हीरे जैसा अनमोल जीवन, बस यूं ही व्यर्थ गवां दिया|
जो तोकु कांटा बुवे, ताहि बोय तू फूल ।
तोकू फूल के फूल है, बाकू है त्रिशूल ।
दोहे का अर्थ : जो व्यक्ति आपके लिए कांटे बोता है, आप उसके लिए फूल बोइये| आपके आस-पास फूल ही फूल खिलेंगे जबकि वह व्यक्ति काँटों में घिर जाएगा|
आय हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर ।
एक सिंहासन चढ़ी चले, एक बँधे जात जंजीर ।
दोहे का अर्थ : जो भी व्यक्ति इस संसार में आता है चाहे वह अमीर हो या फिर गरीब हो वह आखिरकार, इस दुनिया से चला जाता है| एक व्यक्ति को धन-दौलत मिलती है जबकि दूसरा जात-पात की जंजीरों में जकड़ा रहता है|  

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