पैगंबर और बच्चा

(Khalil Gibran)

एक बार की बात है, एक दिन पैगंबर(Prophet) शरीयत की मुलाकात बगीचे में एक बच्चे से हुई। बच्चा भाग कर उनके पास आ गया और बोला, “Good-morning, Sir,” और पैगम्बर ने जवाब दिया, “Good-morning, Sir.” और एक पल सोच कर कहा, “तुम अकेले ही आए हो|”

बच्चा, हंसा और आनंद से बोला, “मुझे अपनी आया(nurse) से पीछा छुड़ाने में काफी वक्त लग गया| उसे लग रहा है कि मैं उन झाड़ियों के पीछे छुपा हुआ हूँ, लेकिन आप तो देख सकते हो कि मैं तो यहाँ पर खडा हूँ?” फिर उसने पैगम्बर के चेहरे को गौर से दिखा और कहा, “आप भी तो अकेले हैं| आपने अपनी नर्स से कैसे पीछा छुडाया?”

पैगम्बर ने जवाब दिया, “आह! यह तो बिलकुल अलग बात है| सच कहूं तो मैं कई बार उससे पीछा नहीं छुडा पाता| लेकिन अब, जबकि मैं इस बगीचे में आया हूँ, वह मुझे उन झाड़ियों के पीछे ढूंढ रही है|”

बच्चा खुशी से ताली बजाकर बोला, “आप तो बिलकुल मेरी तरह हो! खो जाने में बड़ा मजा आता है, है न?” और फिर उसने पूछा, “आप कौन हैं?”

उस व्यक्ति ने जवाब दिया, “वे मुझे पैगम्बर कहते हैं| अब यह बताओ कि तुम कौन हो?”

“मैं तो केवल मैं ही हूँ,” बच्चा बोला, “मेरी नर्स मुझे ढूंढ रही है, और उसे नहीं पता कि मैं कहाँ पर हूँ|”

पैगम्बर ने सर उठाकर आसामान की तरफ दिखा और कहा, “मैंने भी थोड़ी देर के लिए अपनी नर्स से पीछा छुड़ा लिया है, लेकिन वह मुझे ढूंढ ही निकालेगी|”

और बच्चा बोला, “मुझे भी पता है कि मेरी नर्स भी मुझे ढूंढ ही लेगी|”

उसी वक्त एक महिला की आवाज सुनाई दी जोकि बच्चे को उसके नाम से पुकार रही थी, “देखा,” बच्चा बोला, “मैंने आपको बताया था कि वह मुझे ढूंढ लेगी|”

उसी समय एक और आवाज सुनाई दी, “आप कहाँ हैं पैगम्बर?”

और पैगम्बर ने कहा, “देखा मेरे बच्चे, उन्होंने मुझे भी ढूंढ ही निकाला.”

और फिर अपना चेहरा उठा कर पैगम्बर ने जवाब दिया, “मैं यहाँ पर हूँ|”

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