दिल से नाता जोड़िए

Original Post : Connecting From the Heart, Nov 17th, 2010 by Steve Pavlina)

आप कैसे, अपने किसी करीबी व्यक्ति के साथ हार्दिक सम्बंध बनाएंगे?

मेरे विचार से सबसे अच्छा तरीका है कि आप दूसरे व्यक्ति को यह इजाजत दें कि वह आपको बिना परदों(curtains) के देख सके|

मेरे उद्देश्य, यहाँ शारीरिक परदों से नहीं है बल्कि भावनात्मक-आध्यात्मिक परदों से है|

जब आप दूसरे व्यक्ति के साथ बातचीत कर रहे हों, तो अपने कैरियर के बारे में बात करें; और फिर उस विषय पर अधिक जोर न देकर, उसे विषय को छोड दीजिए| अपने गुजरे हुए कल के बारे में बात करें; और फिर उसे छोड दीजिए| अपने दूसरे संबंधों के बारे में बात करें; और फिर उन्हें भी जाने दें|

बिना किसी विषय को दोहराए, बातचीत करना और सम्बंध बनाना जारी रखिए| आखिरकार आप, एक ऐसे विचार से जा टकराएंगे जिसके बारे में सोचने से आपको तकलीफ होती है| और यहीं पर आपको हिम्मत जुटाने की जरुरत होगी ताकि आप इस विषय की छानबीन कर सकें और इसे दूसरों के साथ बाँट सकें|

अगर यहाँ पर कोई अंतिम लक्ष्य निर्धारित किया जा सकता है तो वह एक ऐसे बिंदु पर पहुंचना ही होगा, जहाँ पर आप एक-दूसरे के साथ इतना सुरक्षित महसूस करें कि आप कुछ भी पूछ सकें और बदले में एक भावनात्मक रूप से गहन(deep) और ईमानदार जवाब पा सकें, और इससे कोई भी फर्क न पडे कि सवाल कितने शर्मनाक से लग रहे हैं या फिर अंदरूनी जख्म कितने तकलीफदेह हैं| आप एक दूसरे के सामने पूरी तरह से बेपर्दा हो जाते हैं और छुपाने के लिए कुछ भी नहीं बचता|

हकीकत में, इस दौरान आप कई तरह के उतार-चढावों से गुजरते हैं| कई बार आपका सामना ऐसी नई हकीकत से होता है जोकि बेहद गहन(intense) होती है या फिर जिसका सामना, अभी इसी वक्त, करना बेहद मुश्किल होता है| कई बार आप खुद को, अपनी अंदरूनी वास्तविकता से गहराई से जुडा हुआ महसूस नहीं करते हैं, इसलिए आप समझ ही नहीं पाते कि आखिर क्या कहें? अगर ऐसा होता है तो आप थोड़ा पीछे हटकर, कुछ समय के लिए, साधारण बातचीत या फिर बाहरी दुनिया के बारे में चर्चा कर सकते हैं, या कुछ देर के लिए रुक(break) सकते हैं| फिर बाद में जब आप तैयार हों, तो आप एक बार फिर, खुद के भीतर खोज-बीन का काम जारी रख सकते हैं|

जब दूसरा व्यक्ति(महिला), अपने मन की बात आपसे बांटता है, तो उसे बताइए कि आप उसे बिना किसी शर्त के प्यार करते हैं और उसे पूरी तरह से स्वीकार करते हैं| न तो उसे परखिये और न ही उसके अनुभवों को सिरे से खारिज कीजिए| सिर्फ खुले दिल से बात सुनिए और शांत रहकर उसकी बात पर ध्यान दीजिए|

अपनी सच्चाई को दूसरों के साथ बाँट कर, खुद को असुरक्षित बनाने के फलस्वरूप, दूसरे व्यक्ति के लिए यह महसूस करना आसान हो जाता है कि वह आपके द्वारा स्वीकार कर लिया गया है क्योंकि आप पहले उसे, आपको स्वीकार करने का अवसर दे रहे होते हैं|

इंतज़ार मत कीजिए – पहल कीजिए| जब कभी भी यह दुविधा हो कि आखिर किसे पहले, अपनी बेहद व्यक्तिगत बात, दूसरे को बतानी चाहिए, तो पहल आप करेंगे| जीवन को, सृष्टि को और अपने साथी(partner) को इस बात का सबूत दीजिए कि आप जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं और यह कि आप भरोसा करने के भी इच्छुक(willing) हैं| जब आप ऐसा करेंगे तो कुछ अनोखी चीजे होने लगेंगी|

भावनात्मक रूप से जोखिम उठाना, भावनात्मक गहराई का निर्माण करता है| जब आप, अपने दिल को किसी के सामने खोल कर रख देते हैं और अपनी बेहद निजी बातों को उसके साथ बांटते हैं, और सामने वाला व्यक्ति भी ऐसा ही करता है, तो आप धीरे-धीरे छल(self-deception) और कपट (झूठ, falsehood) के परदे हटाते जाते हैं, और खुद को, और भी गहरी सच्चाइयों के साथ, एक सीध में ला खडा करते हैं| इसे किसी दूसरे के साथ करना, जुड़ाव का एक अनोखा एहसास कराता है|

किसी व्यक्ति को उसके वास्तविक रूप में देख पाना, और उसे, अपने वास्तविक रूप को देखने की इजाजत देना – अपनी, अंदरूनी खूबसूरती और भव्यता(magnificence) की, झलक को दूसरे व्यक्ति की आँखों में देखना… और खुद को गहराई से उसमें महसूस करना, एक जीवन बदल देने वाला अनुभव होता है|

आप प्यार के काबिल हैं!

[यह article आपको कैसा लगा, कृपया comments के जरिए इस पर अपनी राय जाहिर करें, अगर आपके पास इस article से जुडी कोई जानकारी या सुझाव हो तो आप उसे admin@kkkbi.com पर भेज कर हमारे साथ share कर सकते हैं | ]


नए लेख ई-मेल से प्राप्त करें :

Some related links (कुछ सम्बंधित लिंक)

डिप्रेशन (अवसाद) को कैसे दूर भगाएं? 
कैसे आप अलार्म के बजते ही फ़ौरन उठ सकते हैं?
खुद को साधिए ! 
अपने लक्ष्य को हासिल करने का बेहतर तरीका कौन सा है…
Read More Articles in Hindi

4 thoughts on “दिल से नाता जोड़िए

  • February 22, 2012 at 1:40 am
    Permalink

    बेहद साहसी और गहन लेख है. प्यार पर लिखी अज्ञेय जी की एक कविता याद आ रही है कि प्यार करना है अपने आप को वध्य बनाना. मगर यही खुलापन -अपने को वध्य बनाना शक्ति भी देता है.
    आपके इस एख के लिए धन्यवाद और मैं आपको अनुशरण भी कर रहा हूँ.

    Reply
  • February 22, 2012 at 7:42 am
    Permalink

    शुक्रिया रारावी जी| इस ब्लॉग में आपका स्वागत है|:)

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *