ऊपर वाला मदद करने के लिए तैयार है, ज़रा छप्पर तो बड़ा कीजिए!

(Original Post : Allowing Yourself to Receive, September 8th, 2012 by Steve Pavlina)
आर्थिक सम्पन्नता की लहर(vibration) भी खुले संबंधों की लहरों की तरह होती है| यह बहाव में बहने के लिए निमंत्रण देती है, आपका स्वागत करती है और बदले में यह आपसे कुछ नहीं मांगती|
हम प्यार, धन-दौलत आदि और भी बहुत सी चीजों को आकर्षित करने और स्वीकार करने के मौकों से घिरे हुए होते हैं| लेकिन जब हम आभावग्रस्त(scarcity) विचारों में उलझे हुए होते हैं तो हम संभावनाओं के इस दायरे(spectrum) को बेहद सीमित कर देते है| और कई बार हमारी संकल्पनाएँ(intentions) इतनी बड़ी होती हैं कि हम, बिना उन्हें नुक्सान पहुंचाएं, उन्हें इस दायरे में फिट नहीं कर सकते हैं, और नतीजतन हम उन्हें साकार होने से रोक देते हैं|
हम यह इच्छा तो रखते हैं कि हमारा जीवन प्यार से भरपूर हो, और फिर यह मांग भी करते हैं कि सारा प्यार हमें किसी एक खास सम्बन्ध से ही मिलना चाहिए| हम ज्यादा धन तो कमाना चाहते हैं और फिर यह भी चाहते हैं कि सारी धन-दौलत, हमें अपनी इकलौती नौकरी से ही मिलनी चाहिए – या फिर अगर हम बेरोजगार हैं तो हमें एक ही नौकरी करनी चाहिए|

इतने संकरे(thin) दायरे से हमारा यह लगाव, हमारे संकल्पों में डर की मिलावट कर देता है| वास्तव में हम इस दायरे से बाहर कुछ भी स्वीकार करने से डरते हैं, क्योंकि वह सब हमारे कम्फर्ट-ज़ोन(सुविधा-छेत्र) से बाहर होता है|
क्या हो अगर, मैं जिस सैलरी के लायक हूँ, उसे पाने के लिए मुझे अपनी वर्तमान नौकरी को छोडना पड़े? क्या हो अगर इस इकलौते सम्बन्ध के बजाए और भी बहुत से खूबसूरत सम्बन्ध मेरा इन्तजार कर रहे हों?
हम ऐसे बदलावों के नतीजों का विरोध करते हैं, और इसलिए हम इन बदलावों का ही विरोध करने लगते हैं और हमें फंसे रहने को ही स्वीकार करना पड़ता है|
ऊपर वाला भी आपको छप्पर-फाड़कर आखिर कितना दे पाएगा अगर आपका छप्पर ही बेहद छोटा हो?
जब हम इस संकरे दायरे को बड़ा कर देते हैं और खुद को दायरे से बाहर की चीजों को स्वीकार करने की इजाजत देने लगते हैं, तो हम अपने संकल्पों के रास्ते की रुकावटों को कम कर देते हैं और नतीजतन हमारे जीवन में  इनका प्रवाह तेजी से बढने लगता है|
क्या सैलरी के एक से ज्यादा स्रोत होना वाकई में इतनी डरावनी बात हैं… या फिर एक से ज्यादा सम्बन्ध होना? क्या हम आराम से बैठ कर अपनी इच्छाओं को सामने आने की इजाजत नहीं दे सकते, उन्हें अपने डरों की सूची थमाए बिना जोकि उन्हें डरा कर चुप करा दे|

क्या आप खुद को इस दायरे से बाहर की संभावनाओं को स्वीकार करने की इजाजत दे सकते हैं, और इसमें वह छेत्र भी शामिल है जोकि आपकी सीमित मान्यताओं को जाहिर करता है और जो आपको संवेदनशील और डरावना लगता है? अगर आप ऐसा कर सकते हैं, तो फिर आप जल्द ही भूल जाएंगे कि आभावग्रस्त होना क्या होता है|

[यह article आपको कैसा लगा, कृपया comments के जरिए इस पर अपनी राय जाहिर करें, अगर आपके पास इस article से जुडी कोई जानकारी या सुझाव हो तो आप उसे [email protected] पर भेज कर हमारे साथ share कर सकते हैं | ]


नए लेख ई-मेल से प्राप्त करें :

 


कुछ सम्बंधित लेख :
खुशी पहले, बाकी सब बाद में

My Other Blogs :
http:/silverlinelabs.blogspot.in
http://mindisatool.blogspot.com/Websites :
http://www.kkkbi.com

5 Replies to “ऊपर वाला मदद करने के लिए तैयार है, ज़रा छप्पर तो बड़ा कीजिए!”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *