अपने काम को खुशी से कीजिए या फिर काम ही मत कीजिए|

(Original Post : Love Your Work or Don’t Work at All Dec 19th, 2007 by Steve Pavlina)

 

ऐसा क्यों है कि इतने अधिक व्यक्ति, उस काम (आजीविका/व्यवसाय) को सहन करने के लिए सहर्ष ही तैयार हो जाते हैं, जिसे करने से उनको जरा भी खुशी नहीं मिलती, सिर्फ उस तनख्वाह के चैक(check) की खातिर जो उन्हें महीने के अंत में मिलता है? मैं(स्टीव पव्लीना) सोचता हूँ कि इसकी वजह यह है कि उनमें से अधिकतर को इस बात को कोई अंदाजा नहीं है कि अपने काम से प्यार हो जाना, कैसा होता है? उनके डर, उनकी शक्ति पर हावी हो जाते है, इसलिए, वे कभी, आगे बढ़ कर, यह जान ही नहीं पाते कि काम को, पैसे के बजाय, प्यार के लिए करना कैसा होता है|

अब आइए, खलील गिब्रान के ग्रंथ “पैगम्बर(The Prophet)” से लिए गए, इस परिच्छेद पर जरा गौर करें|

“कार्य प्यार को दर्शाता है|

और अगर आप काम को प्यार के बजाय, सिर्फ अरुचि से ही कर सकते हैं, तो अच्छा यही होगा कि आप, अपना काम छोड कर, मंदिर(धार्मिक स्थल) के दरवाजे पर बैठ जाएँ और उनसे भिक्षा(दान) लें जो अपना काम आनंद से करते हैं|

क्योंकि अगर आप रोटियाँ, बेरुखी से बनाते है तो आप बेस्वाद रोटियाँ बनाएंगे जो किसी की भूख को आधा-अधूरा ही शांत कर पाएंगी|

और अगर आप अंगूर पीसने में, अपना द्वेष(बैर, grudge), भी मिला देंगें तो आप शराब को जहरीला बना देंगें|

और अगर आपको एक सुरीला गीत गाना है और आपको संगीत से प्यार नहीं है तो आप सुनने वाले के कानों में दिन-रात का शोर-शराबा भर देंगें|”

तो क्या खलील गिब्रान नें यह कह कर कि, जो काम आपको पसंद नहीं है, उसे छोड कर आपको उनसे भिक्षा मांगनी चाहिए जो अपना काम खुशी से करते हैं, हद ही नहीं कर दी? अगर आप जानते हैं कि अपने काम से प्यार करना वाकई में कैसा होता है, तो फिर आपको शायद इसमें कुछ भी अतिशयोक्ति न लगे|

जब आप वह काम करते है जोकि आपको पसंद नहीं है, आप अपने उत्पाद(output) को विषाक्त बना देते हैं| अगर आपको सिर्फ यही काम आता है तो बेहतर यही होगा कि आप कुछ भी न करें| अगर  इसकी नौबत आती है तो भिक्षा मांग कर अपनी जरूरतें पूरी करें, क्योंकि तब आप, कम से कम, अपने डर और रोष(resentment) से दूसरों को विषाक्त(poisoning) तो नहीं करेंगे|

अगर आप खुशी की अवस्था में काम नहीं कर सकते हैं तो काम न ही करें| नहीं तो आप फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे, खुद को भी और दूसरों को भी, तब भी जब आपके पास सुरीले सुर में गाने की प्रतिभा ही क्यों न हो| ऐसा करके, धन-दौलत चाहे आप जितनी भी कमा लें लेकिन वह इससें होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती है|

आज ही निर्णय लें कि अब आप और अधिक विष नहीं फैलाएँगे|

आप जिसके काबिल हैं उससे कम पर समझौता न करें| खुद से अपेक्षा करें कि आप या तो वह काम करेंगे जिससे आपको लगाव है – या फिर काम ही नहीं करेंगे| आपकी नकारात्मक भावनाओं का मकसद, सिर्फ आपको परेशान करना या आपका ध्यान भंग करना नहीं है| वे आपसे चीख-चीख कर यह कह रही हैं कि “यह गलत है और आपको कुछ और करना चाहिए|” आप, आत्म-अनुशासन का जितना चाहे अभ्यास करें और इसे हमेशा अस्वीकार करते रहें लेकिन इससे आप, अपने अंदर की आवाज को नहीं दबा सकते हैं|

डर और रोष की इन भावनाओं से दूर भागने के बजाए, इनका सामना कीजिए| इनसे मुलाक़ात कीजिए, बातचीत कीजिए| डायरी में इनके बारे में लिखिए| कान लगाईए और पूरे ध्यान से सुनिए कि ये आपसे क्या कहती हैं? अपने अंतर्मन के उस हिस्से के संपर्क में रहिए, जिसके बारे में आपकी ख्वाइश(इच्छा) है कि वो बस किसी तरह से आपको परेशान करना छोड दे ताकि आप खुद को अपने काम के मुताबिक़ ढाल सकें| आप इस दुनिया में, समझौता करने, ढलने या पैसे के लिए काम करने के लिए नहीं आए हैं| आप यहाँ ‘हीरे की तरह जगमगाने’ (shine) के लिए आए हैं| और अगर आप, आज इस स्थिति में नहीं है जहाँ पर आप जगमगा सकें तो बस उठ खड़े होइए और इसे अलविदा कह दीजिए| अभी|

[यह article आपको कैसा लगा, कृपया comments के जरिए इस पर अपनी राय जाहिर करें, अगर आपके पास इस article से जुडी कोई जानकारी या सुझाव हो तो आप उसे [email protected] पर भेज कर हमारे साथ share कर सकते हैं | ]


नए लेख ई-मेल से प्राप्त करें :

 

My Other Blogs :
http:/silverlinelabs.blogspot.in
http://mindisatool.blogspot.com/Websites :
http://www.kkkbi.com

2 Replies to “अपने काम को खुशी से कीजिए या फिर काम ही मत कीजिए|”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *