प्रतिभा की कहानी

(Original Post : The Parable of Talents May1st, 2006 by Steve Pavlina)

विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में, व्यक्तित्व विकास के बारे में कई अनमोल, रोचक किस्से मिलते हैं| इनमें से एक किस्सा बाईबल में से है “प्रतिभा की कहानी”

प्रतिभा की कहानी – उन किस्सों में से एक है जिन्हें यीशु (ईसा मसीह, jesus) नें एक नैतिक शिक्षा देने के लिए सुनाया था| हालाँकि कहानी में ‘प्रतिभा(गुणों)’ का शाब्दिक रूप से प्रयोग धन-दौलत के लिए किया गया है, लेकिन आप जाहिर रूप से इसका विस्तार दूसरे क्षेत्रों में भी कर सकते हैं| इसकी रोचकता बढ़ जाऐगी अगर आप इसे गुणों की आम परिभाषा को ध्यान में रख कर पढ़ें|

तो लीजिए कहानी हाजिर है :

“प्रतिभा की कहानी

एक बार की बात है कि एक व्यक्ति को दूर विदेश यात्रा पर जाना था, तो उसने अपने नौकरों को बुलाया और अपनी जायदात उनके हवाले कर दी| एक नौकर को उसने धन-दौलत कमाने के पांच गुण दिए, दूसरे को उसने दो गुण दिए, और एक अन्य नौकर को उसने एक गुण दिया, गुणों का यह बंटवारा हर नौकर की काबलियत के मुताबिक था| और फिर वह अपनी यात्रा पर चला गया| वह आदमी जिसे पांच गुण मिले थे उसने अपने धन को व्यवसाय में लगा दिया और पांच गुण और कमा लिए| जिस व्यक्ति को दो गुण मिले थे उसने भी ठीक ऐसा ही किया और दो गुण और कमा लिए| लेकिन जिस आदमी को एक गुण मिला था, वह बाहर गया, जमीन में एक गढ्डा खोदा और अपने मालिक के धन को उसमें छुपा दिया|

आखिर काफी समय बीतने के बाद, उन सेवकों का मालिक वापस लौट आया और उनसे हिसाब-किताब करने लगा| वह व्यक्ति जिसे पांच गुण मिले थे, वह अपने कमाए हुए पांच गुण ले आया| और बोला “मालिक, आपने मुझे पांच गुण दिए थे| देखिए मैंने पांच गुण और कमा लिए”|

उसके मालिक नें जवाब में कहा, “शाबाश, तुम एक बहुत अच्छे और वफादार सेवक हो! मैंने तुम पर कुछ चीजों के लिए भरोसा किया जिसमें तुम खरे उतरे, अब मैं तुम्हें और ज्यादा चीजों का उत्तरदायित्व(in chrage) दूंगा| आओ और अपने मालिक की खुशी में भाग लो|”

फिर, वह आदमी जिसे दो गुण मिले थे आया और बोला “मालिक, आपने मुझे दो गुण दिए थे| देखिए मैनें दो गुण और कमा लिए|”

उसके मालिक नें जवाब में कहा, “शाबाश, तुम एक बहुत अच्छे और वफादार सेवक हो! मैंने तुम पर कुछ चीजों के लिए भरोसा किया जिसमें तुम खरे उतरे, अब मैं तुम्हें और ज्यादा चीजों का उत्तरदायित्व(in chrage) दूंगा| आओ और अपने मालिक की खुशी में भाग लो|”

अंत में वह व्यक्ति जिसे एक ही गुण मिला था आया और बोला “मालिक, मैं जानता था कि आप एक बहुत ही कठोर व्यक्ति हैं, आप तो वहाँ से भी फसल काट लेते हैं जहां आपने बीज नहीं बोया होता और वहाँ से भी बटोर लेते हैं जहां पर आपने बीज नहीं बिखराया होता| इसलिए मैं डर गया और आपके गुण को जमीन में छुपा दिया| अब देखिए जो आपका था आपके सामने है|”

उसके मालिक ने जवाब दिया “तुम एक दुष्ट और आलसी नौकर हो! तो तुम जानते थे कि मैं वहाँ से फसल काटता हूँ जहां पर मैंने बीज नहीं बोया होता और वहाँ से बटोरता हूँ जहां पर मैंने बीज नहीं बिखेरा होता| अगर ऐसा है तो तुम्हें मेरे धन को बैंक में जमा करा देना चाहिए था ताकि जब मैं वापिस आता तो मुझे अपना धन ब्याज के साथ वापिस मिलता|”

“इससे गुण वापस ले लो और उसे दे दो जिसके पास दस गुण हैं| क्योंकि हरेक व्यक्ति जिसके पास अधिक है उसे और भी अधिक दिया जाएगा, और उसके पास कभी किसी चीज की कमी नहीं होगी| जिसके पास अधिक नहीं है, उससे वह भी ले लिया जाएगा जो उसके पास है| और उस नालायक सेवक को बाहर अँधेरे में धेकेल दो, जहां वह रोता और दांत पीसता रहेगा|”

-Matthew 25:14-30 (NIV)”

यह साधारण सी कहानी उन कुछ रोचक तथ्यों को उजागर करती है जो कि व्यक्तित्व विकास के संदर्भ में उपयोग किए जा सकते हैं|

सबसे पहले, हम, सभी अलग-अलग परिस्थितियों से शुरुआत करते हैं| हममें से कुछ, प्रचुरता (abundance) (पांच गुणों) के साथ जन्म लेते हैं| तो कुछ आभाव (एक गुण) में पैदा होते हैं| लेकिन हमें क्या मिला है इससे फर्क नहीं पड़ता, बल्कि फर्क तो इससे पड़ता है कि हम इससे क्या करते हैं? इसलिए यीशु, जीवन के पक्षपात को स्वीकार करते हैं, लेकिन वह यह भी बताते हैं कि हमारी शुरुआत करने की स्थिति से फर्क नहीं पड़ता है| एक व्यक्ति, पांच गुण कमाता है, दुसरा केवल दो गुण ही कमा पाता है, लेकिन दोनों को एक समान बधाईयां मिलती हैं क्योंकि दोनों ने ही १००% मुनाफ़ा कमाया| (मैं यह जरुर जानना चाहूँगा कि उन्होंने अपना पैसा कहाँ निवेश किया?)

यह इस बात का भी अच्छा उदाहरण है कि हमें दूसरे मनुष्यों के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए? दूसरे मनुष्यों को, उनके शुरुआत करने की स्थिति, से आंकना चाहिए, और खुद को, अपनी शुरुआती स्थिति से| अगर आप, उन कुछ लोगों में से एक हैं जिन्हें कि पांच गुण मिले हैं, तो खुद अपनी पीठ मत थपथपाईये कि आप तो पहले ही औसत से ऊपर हैं| अगर आप के पास गुणों की प्रचुरता है तो आपको, खुद से, और भी अधिक की अपेक्षा करनी चाहिए| इसी तरह से, आपकी जिंदगी में ऐसे भी दौर आते हैं जब आपके पास केवल एक गुण ही होता है और आप उसका जितना बेहतर इस्तेमाल हो सके, करते हैं, हालाँकि आपका मुनाफ़ा, बाहरी पैमाने पर कम ही महसूस होगा, लेकिन तब भी, यीशु के पैमाने से आपने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है| मैं इस विषय पर पहले लेख ‘अपने मानक कैसे ऊपर उठाएं?’(लेख जल्दी ही उपलब्ध होगा) में लिख चुका हूँ|

इस कहानी का एक रोचक पहलु यह है कि हमारे गुण हमें सौंपे गए है, जैसे कि एक मालिक अपनी जायदात को अपने नौकरों को सँभालने के लिए देता है| हम अपनी संपत्ति के रखवाले हैं, और मैं यहाँ संपत्ति को बड़े खुले तौर पर परिभाषित कर रहा हूँ जो कि भौतिक धन-संपत्ति से कहीं बढ़कर हैं| मिसाल के तौर पर, अगर मैं अच्छी तरह से लिख और बोल सकता हूँ तो ये गुण मुझे सौंपे गए हैं| मैं इन्हें भय के कारण जमीन में भी दबा सकता हूँ, या फिर मैं अपने खोल से बाहर निकल कर सब के भले के लिए संघर्ष भी कर सकता हूँ|

इस कहानी में मुझे एक बात पर थोडा अचरज होता है : क्या होता अगर एक नौकर, जिसने धन, व्यवसाय में लगाया था, उसे फायदे के बजाय घाटा हुआ होता? यीशु इसका क्या जवाब देते?, इसका एक संकेत छिपा हो सकता हैं, उस तरीके में, जिससे मालिक ने अपने तीसरे नौकर को संबोधित किया : “तुम एक दुष्ट और आलसी नौकर हो!” बाद में मालिक ने नौकर को “नालायक” कह कर संबोधित किया और उसे उठा कर बाहर फिकवा दिया| यह देखते हुए कि नौकर ने फिर भी मालिक की सारी संपत्ति उसे वापिस कर थी, यह काफी कठोर भाषा है| तो क्या यीशु यह कहना चाहते हैं कि निष्क्रियता एक दुष्कर्म है? हाँ मैं तो ऐसा ही समझता हूँ| दूसरे शब्दों में, अगर आप अपने गुणों के साथ कुछ नहीं करते हैं…अगर आप उन्हें जमीन में दबा देते हैं और उन्हें बस बटोरते जाते हैं, तो आप दुष्ट, आलसी और नाकारा बनने का चुनाव कर रहे हैं| आपसे यह अपेक्षा की जाती है कि जो कुछ भी आपको मिला है उसका आप इस्तेमाल करेंगे| आलसी मत बनिए|

दूसरा संकेत छिपा है उस तरीके में, जिससे पहले दोनों नौकरों की प्रशंसा की गई| मालिक ने दोनों को ‘वफादार’ कहकर संबोधित किया| यह काफी दिलचस्प है| अगर मालिक उनकी तारीफ़ चालाक, उपयोगी या फायदेमंद कहकर करता तो यह बिलकुल ही अलग बात होती| लेकिन शाबाशी, उनकी वफादारी के लिए दी गई है न कि उनके नतीजों के लिए|

जहां तक भाषा की बात करें (अगर मेरा अंदाजा सही है) तो, मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि अगर किसी सेवक ने पूँजी को व्यवसाय में लगाया होता, उसे घाटा हुआ होता और वह कुछ या पूरी पूंजी ही गवां देता तो भी उसे, उसकी वफादारी के लिए शाबाशी मिलती| हालाँकि, यीशु नें इस स्थिति का कहानी में सीधे जिक्र नहीं किया है लेकिन उन्होंने, शायद यह भी बताया है कि विश्वास खुद ही सफलता की राह है – जोकि उनकी अन्य शिक्षाओं का भी मूल विषय रहा है| इसलिए, शायद अगर आप अपने गुणों का वफादारी से उपयोग करें तो आपको वास्तव में घाटा नहीं होने वाला|

कहानी में एक दूसरी ध्यान देने वाली बात यह है कि वहाँ पर कोई प्रतिस्पर्धा(competition) नहीं है| सेवक, वहाँ पर अपने मालिक की प्रशंसा पाने के लिए, आपस में कोई होड नहीं लगा रहे| यह कोई ‘शून्य हिसाब’(zero-sum) का खेल नहीं है (जिसमें एक के फायदे से दूसरे का नुकसान होता है)| पहले दोनों सेवकों ने, अपने मालिक की जायदात बढाने में, अपने तरफ से कुछ सार्थक योगदान ही दिया|

तो वफादार सेवक होने का आखिर ईनाम क्या है? हालाँकि यीशु नें इस पर कुछ स्पष्ट नहीं कहा है, फिर भी यह तो जाहिर है कि धन तो उनसे वापिस ले ही लिया गया| दोनों सेवक, फिर अपनी धन-दौलत बढ़ाने के लिए काम भी नहीं कर रहे थे| यह उन का धन नहीं था| वे तो अपने मालिक के धन की बढोतरी के लिए काम कर रहे थे, और उसकी जायदात के इजाफे में अपना योगदान दे रहे थे| उनका असली ईनाम था अपने मालिक की खुशी में हिस्सा लेना| तो खुशी ही ईनाम है, और खुशी तब मिलती है जब हम दूसरों की सेवा करते हैं|

मैं अपने अनुभव से जानता हूँ कि अगर मैं कोई काम अपने हाथ में लेता हूँ जिससे कि सिर्फ मुझे फायदा होता है तो मुझे ऐसा करने में अधिक उत्साह महसूस नहीं होता| और अमूनन इससे मेरी खुशी में भी कोई बढोतरी नहीं होती है| लेकिन जब मैं दूसरों के फायदे को ध्यान में रखकर कोई काम करता हूँ (जैसे कि लोगों को उनके विकास में मदद करना), तब मुझे ऐसा करने में बेहद खुशी महसूस होती है, और अंततः इससे मुझे भी फायदा होता है|

लेकिन, इसके अलावा भी इसमें बहुत कुछ है| खुशी वह चीज नहीं जो कि मुझे काम करने से हासिल होती है, बल्कि खुशी तो एक ऐसा गुण है जोकि मैं अपने काम में लगाता हूँ| जब मैं केवल अपने लिए काम करता हूँ तो मैं खुशी को, खुद से बाहर तलाशता हूँ| प्रसन्नता को हासिल करने का यह तरीका काम नहीं करता| लेकिन जब मैं दूसरों के फायदे के लिए काम करता हूँ और थोड़ी देर के लिए, स्वार्थ(इसमें मेरे लिए क्या है?), को भूल जाता हूँ तो मुझे खुशी के उन खजानों की चाबी हाथ लग जाती है जोकि मेरे अंदर, पहले ही से, मौजूद थे| और खुशी को हासिल करने की कोशिश के बजाए मैं खुश रहकर अपनी मंजिल तक पहुंचता हूँ| आनंद, मेरे अंदर से, बाहर की ओर मेरे काम में प्रवाहित होता है| इसलिए मैं प्रवाह को, बाहर की ओर जाता हुआ महसूस करता हूँ न कि अंदर की ओर|

खुशी, साँस छोड़ने की तरह है न कि साँस लेने की तरह| क्या आप उन लोगों की तरह हैं जो यह कहने के लिए मजबूर हैं कि, “आदरणीय सभासद, मेरे अंदर, आनंद का भण्डार मौजूद तो है लेकिन इसके खुदाई के लिए अभी मैंने प्रस्ताव(tender) आमंत्रित नहीं किया है|”

जैसे कि यीशु नें ‘प्रतिभा की कहानी’ में बताया है कि, विपुलता(abundance) के निर्माण के लिए आपको अपने डर से आगे जाना होगा| अगर आप अधिक भयभीत हैं, शक्की स्वभाव के हैं या फिर खुद पर भरोसा नहीं करते हैं तो आप अपने गुणों को दफन कर देंगे| और यह अंततः “रोते रहने और दांत पीसने,” अर्थात, उदासी और विषाद(depression) की ओर ले जाएगा|

आपको ऐसा लग सकता है कि डर और संदेह आपको मुसीबतों से दूर रखेंगे, परन्तु वास्तव में वे आपको केवल दुःख और तकलीफ ही देंगे| आपको भोला-भला मूर्ख साबित होने से बचने के लिए, डर की जरुरत नहीं है; उसके लिए तो सामान्य समझ (common sense) ही काफी है| विपुलता का जीवन जीने के लिए अंततः, आपको अपने डर से आगे जाकर, दूसरों के लिए विपुलता का निर्माण करना होगा| नहीं तो नाकारा समझ कर आपका बहिष्कार कर दिया जाएगा| यीशु ने यहाँ पर कोई टालमटोल की गुंजाईश नहीं छोड़ी है – करिये या भरिये|

दूसरों की भलाई के लिए काम कीजिए और प्रसन्नता आपका ईनाम होगी| अपने गुणों को दफन कर दीजिए, और फिर ‘रोते और दांत पीसते रहिए|” चुनाव आपका है|

और इसी के साथ आज की सभा समाप्त होती है| 🙂

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SMARTPHONE addiction-क्या आपको मोबाइल की लत है?

दोस्तों आज के इस तकनीक के युग में हम सभी mobile का use करते हैं| एक तरह से देखा जाय तो इसके काफी फायदे भी हैं और अगर इसका प्रयोग एक जरूरत की वस्तु की तरह किया जाये तो यह एक बड़े ही कमाल की चीज है लेकिन जैसे-जैसे mobile का प्रयोग बढ़ रहा है वैसे-वैसे इसके अनेक नुक्सान भी सामने आ रहे हैं जैसे कि :

1.    घंटों अपने mobile पर game खेलने, पढने और message करने से आखों पर पड़ने वाला तनाव जिसकी वजह से सिरदर्द, आखों का लाल होना और धुंधला जैसी problems होती हैं|

2. नींद ना आने की समस्या : अगर आप बिस्तर पर लेटकर आराम करने की बजाय message पढ़ते हैं या फिर दूसरों के messages को reply करते हैं तो आपकी नींद पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और आप ठीक से सो नहीं पाते|

3. दुनिया से अलग-थलग हो जाना : अगर आप अपने-अपनों के साथ होकर भी अपने मोबाइल को switch off नहीं कर पाते तो आज नहीं तो कल आपके रिश्तों पर इसका असर पढ़ना तय है|

तो आखिर कैसे पता लगे कि कहीं आप भी तो mobile के दुरूपयोग इस लत का शिकार तो नहीं है| इसका एक सीधा सा तरीका है कि आप कुछ देर के लिए अपने mobile को switch off कर दें| तो आखिर आप अपने mobile को कितनी देर बंद रख पाते हैं?

1. 1 घंटे के लिए
2. 4 घंटों के लिए
3. आधे दिन के लिए
4. दिन-भर के लिए

अगर आप अपने mobile के बिना पूरे दिन बिना किसी ख़ास परेशानी के रह सकते हैं तो आप बधाई के पात्र हैं| अगर आप आधे दिन के लिए अपने mobile को switch off कर सकते हैं तो फिर आप भी मोबाइल phone की इस लत के शिकार नहीं है| वहीं दूसरी ओर, अगर आप अपने mobile phone से 1 घंटे के लिए भी दूर नहीं रह सकते तो आपको इसकी लत है या नहीं इसका फैंसला आप खुद ही कर सकते हैं|

Mobile की लत से कैसे छुटकारा पायें ?

1. Notifications को बंद कर दें : आपका मोबाइल आपको notification के आने की सूचना देता है और आप के मन में उस message को लेकर एक curiosity पैदा होती है| हो सकता है कि आपके किसी दोस्त नें कोई मजेदार photo शेयर की हो या फिर कोई ऐसी जानकारी हो जिसे जानना आपके लिए जरुरी हो| आखिरकार आपकी curiosity इतनी बढ़ जाती है कि आप mobile पर उस message को पढने की इस इच्छा को दबा नहीं पाते और जब ऐसा बार-बार होता है तो यह एक लत बन जाती है| इसलिए इस आदत से छुटकारा पाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप mobile की setting में जा कर notifications को बंद कर दें|

2. दो मिनट रुकें :  अगर आपके मन में अचानक अपने mobile पर WhatsApp, Facebook, twitter आदि का status देखने की इच्छा होती है तो ऐसा करने से पहले  2 मिनट रुक जाएँ| ऐसा करने का फायदा यह होता है कि 2 मिनट के बाद आपकी इच्छा उतनी strong नहीं रहती और आप फिर से अपनी काम पर लग सकते हैं|

3. Mobile का प्रयोग करने को सीमत करें : खुद से वादा करें कि हर दिन कुछ वक्त के लिए आप mobile का इस्तेमाल नहीं करेंगे| जैसे कि –

* परिवार के साथ खाना-खाते समय
* रात को सोते समय
* किसी व्यक्ति से बात करते समय
* अपने परिवार या दोस्तों के साथ वक्त बिताते समय
4. Social Media (WhatsApp, Facebook, twitter आदि) पर आने वाले messages को आप दिन में सिर्फ 2-3 बार ही देखें या फिर उनका जवाब दें|
5. फ़ालतू के apps जिनका आप कभी इस्तेमाल नहीं करते उन्हें अपने फोन दे delete कर दें| ऐसा करने पर न केवल आपका समय बचेगा बल्कि आपके mobile की memory भी खाली रहेगी और battery भी ज्यादा देर चलेगी|

6. काम करते समय अपने phone को खुद से काफी दूर रखें| अगर आपको अपने mobile तक पहुँचने के लिए उठकर जाना पडेगा तो फिर आप उठने से पहले दो बार सोचेंगे|

7. अपने फ़ोन पर काफी लंबा Password लगा दें : अगर आपके mobile को अनलॉक करने वाला Password लंबा होगा तो आपको mobile खोलने में वक्त लगेगा और आप इस झंझट से बचने के लिए mobile को कम use करेंगे|

दोस्तों, Technology का प्रयोग करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि आप mobile का इस्तेमाल करें लेकिन उसे अपना इस्तेमाल न करने दें|

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Trust Yourself – दूसरों से पहले खुद की सुनिए|

बार बार मैंने देखा है कि लोग एक्सपर्ट की सलाह पर भरोसा करते हैं फिर उनको पता लगता है कि वह सलाह तो उनके लिए काम ही नहीं कर रही| उन्हें लगने लगता है कि जरुर इसमें उनकी ही कोई गलती होगी क्योंकि इस सलाह को तो काम करना चाहिए आखिर यह एक एक्सपर्ट की सलाह है|  मुझे हर हफ्ते एक ऐसी ई-मेल जरुर मिलती है जिसका अंत कुछ इस तरह से होता है क्या मैं नासमझ हूं? क्या मुझ में कोई कमी है जिसकी वजह से यह सलाह मेरे लिए काम नहीं कर रही ?
ऐसा मत कीजिए, ऐसी advice इसलिए काम नहीं करती क्योंकि यह बुरी सलाह होती है| Personal Development की उन सैकड़ों किताबों को जिन्हें मैंने पढ़ा है मैं तो यही कहूंगा कि उनमें से ज्यादातर में बुरी सलाह दी गई थी इसका मतलब यह है कि उन सुझावों और सलाहों ने मेरे लिए कोई काम नहीं किया तो क्या वह लेखक झूठ बोल रहा था? नहीं मैं ऐसा बिलकुल नहीं समझता| कई बार मुझे पता होता है क्यों उस सलाह ने लेखक के लिए तो अच्छे से काम किया लेकिन उसने मेरे लिए कोई काम क्यों नहीं किया| और इसकी साधारण सी वजह यह है कि हम सब अलग इंसान हैं जो चीज एक आदमी या कुछ लोगों के एक group के लिए काम करती है जरूरी नहीं है कि वह सलाह  हरेक एक इंसान के लिए काम करें|
उदाहरण के तौर पर मैंने बहुत से किताबों में पढ़ा है कि हमें रोज अपने goals को दोहराना चाहिए, हो सकता है कि कुछ लोगों के लिए यह सलाह काम करे लेकिन मेरा अनुभव यह बताता है कि ऐसा करना तो सिर्फ समय की बर्बादी है| उन मामलों में भी जब इसने मेरे लिए काम किया है इसके नतीजे खराब रहे हैं| जिस तरीके ने मेरे लिए काम किया है वह है कि चुपचाप बैठ कर अपना काम करने में लग जाओ बजाय अपने Goals को रोज दोहराने के|
इस ब्लॉग मैंने जब कभी भी कोई आईडिया दिया है तो कुछ लोगों के लिए उसने बहुत अच्छी तरह से काम किया लेकिन बाकी लोगों को इस से कोई फायदा नहीं हुआ|

 

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि एक्सपर्ट कितना बड़ा है या फिर वह अपने अपने दावे को साबित करने के लिए कितने सबूत पेश करता है| जब तक वह आप को व्यक्तिगत रुप से नहीं जानता तब तक उसकी सलाह पर आँख बंद करके भरोसा न करें| अच्छा यही रहेगा कि आप इस सलाह पर काम करके देखें और अगर आपके लिए काम करती है तो ठीक है वरना इसे भूल जाइए|
आप ही बताइए कि कोई सलाह जो कि जोकि आम लोगों के लिए काम करती है जरुरी है कि वह उन लोगों के लिए भी काम करें जो कि आम नहीं हैं| क्या आप एक आम इंसान हैं| मैं तो आम इंसान नहीं हूं| क्या आप खुद में कोई ऐसी खूबी नहीं ढूंढ सकते कि जिससे आपको पता लगे कि आप दुनिया के बाकी लोगों से बिल्कुल अलग है?


एक्सपर्ट क्या कहते हैं इसके बारे में इतनी चिंता मत कीजिए| उनके सलाह वैसे भी कुछ सालों के बाद गलत साबित होने वाली है| खुद को दूसरों से इंसान की तरह देखने की कोशिश कीजिये| एक्सपर्ट की सलाह को जो काम आप करना चाहते हैं उसके लिए एक आम सुझाव की तरह लीजिए,  इस बात पर ज्यादा ध्यान दीजिए क्या चीज आपके लिए काम करती है और क्या चीज आपके लिए काम नहीं करती| अपने आप पर भरोसा रखिये| अगर एक्सपर्ट आपसे एक बात कह रहे हैं लेकिन आपका अपना अनुभव आपसे कुछ और कह रहा है तो अपने अनुभव पर भरोसा रखिये| खुद पर भरोसा रखना, आपको पर्सनल डेवलपमेंट दिशा में कहीं आगे ले जा सकता है बजाय खुद को इस बात के लिए धिक्कारने के कि आम लोगों के लिए दी गयी सलाह आपके लिए काम क्यों नहीं कर रही?

 

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फ़कीर बन कर भी आप कैसे खुश रह सकते हैं ?

(Based on Post : “Be a Fun Broke Person” by Steve Pavlina)

दोस्तों हम सभी के जीवन में कभी न कभी ऐसा मुकाम जरूर आता है जब हम जीवन में एक स्तर पर आकर ठहर जाते हैं| हम आगे तो बढना चाहते हैं लेकिन असफल होने का डर हमें आगे बढ़ने नहीं देता| उदाहरण के तौर पर अगर आप अपनी जॉब से खुश नहीं हैं और आप इसे छोड़ कर अपना बिज़नस करना चाहते हैं और आपने इसके फायदे और नुक्सान का भी अनुमान लगा कर उसकी तैयारी भी कर ली है लेकिन फिर भी आपको यह डर सताता है कि अगर बिज़नस नहीं चला तो क्या होगा? बिज़नस तो दूर की बात है नौकरी से भी हाथ धोना पडेगा| कंगाल होने का यह डर आपको कभी भी आगे बढ़ने नहीं देगा|
मान लीजिए कि आपने हिम्मत करके अपना बिज़नस शुरू भी कर दिया और कुछ समय तक ठीक-ठाक चलने के बाद वह बुरी तरह से असफल हो गया| अब आप क्या करेंगे? कैसे खुद को संभालकर अपने जीवन को वापस पटरी पर लायेंगे| स्टीव पव्लीना नें इस विषय पर एक आर्टिकल लिखा है “Be a Fun Broke Person” जिस पर आधारित लेख आपके सामने हाजिर है|
अगर आपको कंगाल होने का डर सताता है तो आप चाहे जितनी भी तैयारी कर लें आप आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे|
क्या ऐसा हो सकता हैं कि आप जीवन भर के लिए कंगाल होकर भी खुशी से झूमते रह सकते है? अगर आपको ऐसा सोचना भी मजाक लगता हैं तो फिर :
1.    आप समझ ही नहीं पा रहे कि जीवन में आखिर क्या मायने रखता है ?
2.   आपको लगता है कि पैसे के आते ही आपके जीवन की सभी problems चुटकी बजाते ही हल हो जायेंगी|
3.   आप एक बोरिंग किस्म के इंसान हैं|
आपको क्या लगता है कि आखें बंद करना, खुद को लाचार समझना, और एक बोरिंग इंसान होना आपको आगे बढ़ने में किसी भी तरह से मदद करता है| अगर आपको किसी व्यक्ति को एक नौकरी पर  रखना हो तो आप क्या इस तरह के इंसान को नौकरी देना पसंद करेंगे?
फ़कीर होने का अपना मजा है|
यह एक रोमांचक अनुभव है|
यह आपकी क्रिएटिविटी के लिए एक चैलेंज है – इससे दूर भागने की कोशिश न करें बल्कि फ़कीर होने के इस अनुभव का पूरी तरह से आनंद लें|
सिर्फ इसलिए कि आपके पास पैसे नहीं हैं आपका जीवन रुकना नहीं चाहिए|
आप अभी भी किसी से प्यार कर सकते हैं|
आप हंस सकते हैं|
आप एक्सरसाइज कर सकते हैं|
आप महान व्यक्तियों द्वारा लिखी गई किताबें पढ़ सकते हैं|
आप लिख सकते हैं| आप संगीत रच सकते हैं| आप कलाकारी कर सकते हैं| अगर आपके पास पेन्टिंग का सामान खरीदने की लिए पैसे नहीं हैं, तो आप रेत से कला का नमूना बना सकते हैं| अगर आपके पास संगीत के साज खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं तो आप गाना गा सकते हैं|
आप लिफ्ट मांग कर दूर-दूर की यात्रा कर सकते हैं|
आप अपने सोशल स्किल्स पर काम कर सकते हैं और ढेरों नए दोस्त बना सकते है|
जब मैं कंगाल हुआ तो मैं एक कार्डबोर्ड बॉक्स को मेज की तरह इस्तेमाल करता था| तो क्या मुझे इस बात का बुरा लगता था ? क्या अच्छा नहीं होता कि मैं इस बात को मजाक में उड़ा देता| जब आप कंगाल होते हैं  हैं तो आपको ऐसे ही बेफकूफी भरे काम करने पड़ते हैं|
आप कंगाल हैं, तो क्या? कृपया करके राई का पहाड़ मत बनाइये और इसे कोई ऐसी चीज मत समझिए जिससे कि आप जितनी जल्दी हो सके भागने की कोशिश करें| इसके बारे में चिंता करना छोड़ दीजिए| वैसे भी अगर दुनिया के हिसाब से देखें तो अगर आप इसे आर्टिकल को पढ़ पा रहें हैं तो आप बहुत से लोगों से बहुत अच्छी हालत में है| आप शायद अभी भी दुनिया के उस हिस्से से ताल्लुक रखते  हैं जो कि अमीर है|  इस दुनिया के बहुत से लोग खुशी-खुशी आपके जैसे कंगाल होने के लिए तैयार हो जायेंगे, और उनके हिसाब से तो यह बहुत ही शान की बात होगी, आपके पास पीने के लिए साफ़ पानी है? आपको रोज हिंसा का सामना नहीं करना पड़ता ? इन्टरनेट – वो क्या होता है ? अगर आप इसका प्रयोग करते हैं तो जरूर आप बहुत ही अमीर होंगे !
ज़रा अपनी जिन्दगी को उनके नजरिए से देखने की कोशिश करें| इसे महसूस करें कि जहां आप यह मान बैठे हैं आप बिलकुल कंगाल हो चुके हैं, वहीं हकीकत में आप इतने अमीर हैं!
और भगवान् के लिए इतने बोरिंग इंसान मत बनिए| कंगाल होने का बहाना नहीं चलेगा| खुशी को अपने जीवन में वापस लाइए,| वह काम जो आपको खुशी देता है उसे मत छोडिए तब भी जब आप पूरी तरह से दिवालिया हो चुके हों, इसलिए नहीं कि इससे आप अपना गम थोड़ी देर के लिए भुला सकते है बल्कि इसलिए कि आप इस बात को महसूस कर चुके हैं कि आपके पास पहले ही इतना कुछ है| डरना और खुद को दोषी ठहराना छोडिए| अपने जीवन को आज और अभी खुशियों से पूरी तरह से भर दीजिए| अपने सपनों को सिर्फ इसलिए ठन्डे बस्ते में मत डालिए क्योंकि आपके पास उन्हें पूरे करने के लिए पैसे नहीं हैं| यह तो कोरी नासमझी ही है| और कोई भी ऐसा करना पसंद नहीं करता| आप ही बताइए कि क्या आप ऐसी फिल्म को देखना पसंद करेंगे जिसके अंत में हीरो हार मानकर बैठ जाता है|
आपके पास ज्यादा पैसे नहीं हैं इसके बार-बार सोचकर खुद को परेशान मत कीजिए| इस फकीरी में भी गर्व महसूस कीजिये| इसमें कुछ भी गलत नहीं है| वही हुआ जिससे आपको हमेशा डर लगता था और आप अभी भी अपने पैरों पर खड़े हैं और उसका सामना कर रहे हैं क्या ऐसा करने के लिए हिम्मत नहीं चाहिए?
जीवन में आगे बढ़ने के लिए आपको जरूर कोशिश करनी चाहिए लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वर्तमान को नजरअंदाज करके आप सुंदर भविष्य के सपनों में खोए रहें| आप पहले ही कितने अमीर हैं ज़रा इस पर गौर कीजिये| आज और अभी से जीवन के हरेक पल का पूरा मजा लीजिए|
अपने रिश्तों को अभी से संभालना शुरू कीजिये इस काम को आने वाले कल पर मत टालिए|
इन दिनों मेरे पास धन-दौलत की कमी नहीं है| लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेरा सबसे बड़ा खजाना क्या है? वह यह है कि अब मुझे कंगाल होने से डर नहीं लगता| मैंने तभी अमीर होना सीख लिया था जब कि मेरे पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी| इसलिए अब मैं कंगाल होने के डर से आजाद हूँ| अगर ऐसा फिर से होता है तो न तो यह असफलता होगी और न ही कोई ऐसी चीज जिसे लेकर मुझे शर्मिन्दा होना चाहिए| बल्कि यह तो और भी मजेदार और बड़ी चुनौती होगी|
अब कुछ लोग कहेंगे, “मैं गरीब भी रह चुका हूँ और अमीर भी| अमीर होना अच्छा है|”
मैं तो इसे खुशफहमी ही मानता हूँ! अमीरी-गरीबी से बेहतर नहीं होती| बस यह उससे अलग होती है| आपको यकीन न हो तो अपने किसी ऐसे करीबी रिश्तेदार से पूछ कर देख लीजिए जो आपके हिसाब से बहुत अमीर हो| क्या उसे रात को ठीक से नींद आती है| क्या उसे भूख लगती है? और क्या वह खुश है? अमीर वो होता है जो अपने जीवन के हर पल को पूरी तरह से जीना जानता है| अगर आप वाकई में अमीर हैं तो फिर आप हमेशा अमीर ही रहेंगे और इससे कोई फर्क नहीं पडेगा कि आपके पास कितने पैसे हैं| तो अमीरी-गरीबी का पता इंसान सोच से लगता है न कि उसके पास कितनी धन-दौलत है इससे|
मैं फिर से आप से कहता हूँ कि एक उदास फ़कीर मत बनिए| आखिर दुनिया में कोई भी व्यक्ति कैसे आपकी मदद कर पायेगा अगर आप हमेशा इतने बोरिंग किस्म के इंसान बने रहेंगे?
मुझे ऐसे लोगों से मिलना बहुत अच्छा लगता है जिनके पास ज्यादा पैसे नहीं होते, लेकिन बोरिंग किस्म के व्यक्तियों से नहीं… और ऐसे लोगों से तो बिलकुल भी नहीं जोकि खुद को कोसते रहते हैं… और न ही उन लोगों से जोकि हमेशा इस चिंता में डूबे रहते हैं कि उनके जीवन में पता नहीं आगे क्या गड़बड़ होने वाली है|
जो चीजें बनी हैं वे कभी खराब भी होंगी, उनके चिंता मत कीजिये और इसे हंसी में उड़ा दीजिए|
तो आपके ऊपर late fees लगा दी गई है? आप अपने मकान का किराया नहीं दे सकते| आपकी कार भी खराब होनी वाली है| इतनी बड़ी दुनिया में आपकी यह चिंताएं आखिर क्या मायने रखती हैं? क्या आपका इन बातों को लेकर इतना दुखी हो जाना सही है? दुनिया तो इंसान को मंगल गृह पर भेजने की तैयारी कर रही है और आप अपने किराए को लेकर परेशान हो रहें है| आपको नहीं लगता कि आपको भी अपनी चिंता का स्टैण्डर्ड थोड़ा बढ़ाना चाहिए|
एक मस्त फ़कीर बनिए|
ज्यादा हंसिये, ख़ास कर कि अपनी परेशानियों पर|
पढ़िए
एक्सरसाइज कीजिये
मुस्कराइए
दोस्तों को गले लगाइए
और एक खिलाड़ी बनकर जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना कीजिये|

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Srinivas Ramanujan biography in Hindi

श्रीनिवास रामानुजन् इयंगर (22 दिसम्बर 1887 – 26 अप्रैल 1920) एक महान भारतीय गणितज्ञ थे। इन्हें आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में गिना जाता है। इन्हें गणित में कोई ख़ास ट्रेनिंग नहीं मिली लेकिन फिर भी अपनी प्रतिभा और लगन से न केवल गणित के क्षेत्र में कमाल के अविष्कार किए बल्कि भारत के नाम को दुनिया भर में रौशन कर दिया।

ये बचपन से ही बेहद प्रतिभावान थे। इन्होंने अपने आप ही गणित सीखा और अपने जीवनभर में गणित के 3,884 theorems को इकट्ठा किया। इनमें से ज्यादातर theorems सही साबित किये जा चुके हैं। इन्होंने गणित के सहज ज्ञान और algebra की अपनी समझ के बल पर बहुत से ओरिजनल और अनोखे परिणाम निकाले जिन पर आधारित रिसर्च आज तक हो रही है।

रामानुजन का जन्म 22 दिसम्बर 1887 को भारत में कोयंबटूर के ईरोड नाम के गांव में हुआ था। वह पारंपरिक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। इनकी की माता का नाम कोमलताम्मल और इनके पिता का नाम श्रीनिवास अय्यंगर था। यह तीन वर्ष की आयु तक बोलना भी नहीं सीख पाए थे। जब इतनी बड़ी आयु तक जब रामानुजन ने बोलना आरंभ नहीं किया तो सबको चिंता हुई कि कहीं वे गूंगे तो नहीं हैं। बाद के वर्षों में जब उन्होंने स्कूल में एडमिशन लिया तो भी पढ़ाई में इनका कभी भी मन नहीं लगा। फिर भी रामानुजन ने दस वर्ष की उम्र में प्राइमरी परीक्षा में पूरे जिले में सबसे अधिक नंबर हासिल किये|

रामानुजन को सवाल पूछना बहुत पसंद था। उनके सवाल अध्यापकों को कभी-कभी बहुत अटपटे लगते थे। जैसे कि इस संसार में पहला पुरुष कौन था? पृथ्वी और बादलों के बीच की दूरी कितनी होती है? रामानुजन का व्यवहार बड़ा ही मधुर था। इनका गोल-मटोल शरीर और जिज्ञासा से चमकती आखें इन्हें एक अलग ही पहचान देती थीं। इनके साथियों के अनुसार इनका व्यवहार इतना अच्छा था कि कोई इनसे नाराज हो ही नहीं सकता था। स्कूल में इनकी प्रतिभा ने दूसरे पढने वाले स्टूडेंट्स और शिक्षकों पर छाप छोड़ना शुरू कर दिया। इन्होंने स्कूल के समय में ही कालेज लेवल के गणित को पढ़ लिया था। इनके स्कूल के प्रिंसिपल ने तो यहाँ तक कह दिया था कि स्कूल में होने वाली परीक्षाओं के नियम रामानुजन के लिए लागू नहीं होते हैं। हाईस्कूल की परीक्षा पास करने के बाद इन्हें गणित और अंग्रेजी मे अच्छे अंक लाने के कारण सुब्रमण्यम स्कालरशिप मिली और आगे कालेज की शिक्षा के लिए प्रवेश भी मिला।

तभी एक परेशानी आई। रामानुजन गणित को इतना अधिक पसंद करते थे कि वे दूसरे विषयों पर ध्यान ही नहीं देते थे। यहां तक की वे हिस्ट्री, बायोलॉजी की क्लास में भी गणित के प्रश्नों को हल किया करते थे। इसका नतीजा यह हुआ कि ग्यारहवीं कक्षा के एग्जाम में वे गणित को छोड़ कर बाकी सभी सब्जेक्ट्स में फेल हो गए और परिणामस्वरूप उनको स्कालरशिप मिलनी बंद हो गई। अब एक तो घर की खराब आर्थिक स्थिति और ऊपर से स्कालरशिप भी नहीं मिल रही थी। रामानुजन के लिए यह बड़ा ही कठिन समय था। घर की स्थिति सुधारने के लिए इन्होने गणित के कुछ ट्यूशन तथा बही-खाते का काम भी किया। कुछ समय बाद 1907 में रामानुजन ने फिर से बारहवीं कक्षा की प्राइवेट परीक्षा दी और फेल हो गए। और इसी के साथ रामानुजन की पढ़ाई का यहीं अंत हो गया|

स्कूल छोड़ने के बाद के पांच साल का समय इनके लिए बहुत हताशा भरा था। भारत इस समय गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा था। चारों तरफ भयंकर गरीबी थी। ऐसे समय में रामानुजन के पास न तो कोई नौकरी थी और न ही किसी institution अथवा प्रोफेसर के साथ काम करने का मौका। बस उनका ईश्वर पर अटूट विश्वास और गणित के प्रति उनकी लगन ने उन्हें अपना काम करते रहने के लिए हमेशा प्ररित किया। वे इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी गणित की अपनी रिसर्च को चलाते रहे। इस समय रामानुजन को ट्यूशन से कुल पांच रूपये महीने की कमाई होती थी और इसी में गुजारा होता था। रामानुजन का यह जीवन काल बहुत कष्ट और दुःख से भरा था। इन्हें हमेशा अपने भरण-पोषण के लिए और अपनी शिक्षा को जारी रखने के लिए इधर उधर भटकना पड़ता और अनेक लोगों से वह मदद भी मांगनी पड़ती जो उन्हें कभी भी नहीं मिलती थी।

सन 1908 में इनके माता पिता ने इनकी शादी जानकी नाम की लडकी से कर दी। शादी हो जाने के बाद अब इनके लिए सब कुछ भूल कर गणित में डूबना संभव नहीं था। इसलिए वे नौकरी की तलाश में मद्रास आए। बारहवीं की एग्जाम में फेल होने की वजह से इन्हें नौकरी नहीं मिली और उनका सेहत भी बुरी तरह से गिर रही थी। अब डॉक्टर की सलाह पर इन्हें वापस अपने घर लौटना पड़ा। बीमारी से ठीक होने के बाद वे वापस मद्रास आए और फिर से नौकरी की तलाश शुरू कर दी। ये जब भी किसी से मिलते थे तो उसे अपना एक रजिस्टर दिखाते थे। इस रजिस्टर में इनके द्वारा गणित में किए गए सारे कार्य होते थे। आखिरकार उनकी मुलाक़ात डिप्टी कलेक्टर श्री वी. रामास्वामी अय्यर से हुई जोकि गणित के जाने-माने विद्धवान थे उनकी मदद से इन्हें 25 रूपये महीने की स्कालरशिप मिलनी शुरू हो गई। यहां एक साल पूरा होने पर इन्होने मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में क्लर्क की नौकरी की।

सौभाग्य से इस नौकरी में काम का बोझ कुछ ज्यादा नहीं था और यहां इन्हें अपने गणित के लिए पूरा समय मिलता था। यहां पर रामानुजन रात भर जाग कर नए-नए गणित के formulae लिखा करते थे और फिर थोड़ी देर तक आराम कर के फिर दफ्तर के लिए निकल जाते थे। रामानुजन गणित की अपनी रिसर्च को स्लेट पर लिखते थे। और बाद में उसे एक रजिस्टर में लिख लेते थे। रात को रामानुजन के स्लेट और खड़िए की आवाज के कारण परिवार के अन्य सदस्यों की नींद चौपट हो जाती थी।

इस समय भारतीय और पश्चिमी रहन सहन में एक बड़ी दूरी थी और इस वजह से सामान्यतः भारतीयों को अंग्रेज वैज्ञानिकों के सामने अपने बातों को कहने में काफी संकोच होता था। यहाँ पर रामानुजन के पुराने शुभचिंतक इनके काम आए और इन लोगों ने रामानुजन द्वारा किए गए काम को लंदन के प्रसिद्ध गणितज्ञों के पास भेजा। यहीं पर रामानुजन, प्रोफेसर हार्डी के संपर्क में आए| अब रामानुजन के जीवन में एक नए युग की शुरुआत हुई जिसमें प्रोफेसर हार्डी की बहुत बड़ी भूमिका थी। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जिस तरह से एक जौहरी हीरे की पहचान करता है और उसे तराश कर चमका देता है, रामानुजन के जीवन में वैसा ही कुछ स्थान प्रोफेसर हार्डी का है। शुरू-शुरू में रामानुजन ने जब अपनी रिसर्च को प्रोफेसर हार्डी के पास भेजा तो पहले उन्हें भी पूरा समझ में नहीं आया। जब उन्होंने अपने मित्र गणितज्ञों से सलाह ली तो वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि रामानुजन गणित के क्षेत्र में एक बेशकीमती हीरा हैं और इनके द्वारा किए गए कार्य को ठीक से समझने और उसमें आगे शोध के लिए उन्हें इंग्लैंड आना चाहिए। अतः उन्होने रामानुजन को कैंब्रिज आने के लिए आमंत्रित किया।

लेकिन कुछ व्यक्तिगत कारणों और धन की कमी के कारण रामानुजन ने प्रोफेसर हार्डी के कैंब्रिज के बुलावे को अस्वीकार कर दिया। प्रोफेसर हार्डी को इससे निराशा हुई लेकिन उन्होनें किसी भी तरह से रामानुजन को वहां बुलाने का निश्चय किया। इसी समय रामानुजन को मद्रास विश्वविद्यालय में स्कॉलरशिप मिल गई थी जिससे उनका जीवन कुछ आसान हो गया और उनको रिसर्च के लिए पूरा समय भी मिलने लगा था। इसी बीच आखिरकार प्रोफेसर हार्डी ने रामानुजन को कैंब्रिज आने के लिए मना ही लिया।

इंग्लैण्ड में रामानुजन को बस थोड़ी परेशानी थी और इसका कारण था उनका शर्मीला, शांत स्वभाव और शुद्ध शाकाहारी खान-पान। जब तक वे लंदन में रहे ज्यादातर वे अपना भोजन खुद ही बनाते थे। इंग्लैण्ड की इस यात्रा से उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। अपने एक विशेष रिसर्च के कारण इन्हें कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से बी.ए. की डिग्री भी मिली। लेकिन वहां की जलवायु और रहन-सहन उन्हें रास नहीं आया और उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा।

इसके बाद वहां रामानुजन को रॉयल सोसाइटी का फेलो nominate किया गया। ऐसे समय में जब भारत गुलामी में जी रहा था तब एक भारतीय को रॉयल सोसाइटी की सदस्यता मिलना एक बहुत बड़ी बात थी। रॉयल सोसाइटी के पूरे इतिहास में इनसे कम आयु का कोई सदस्य आज तक नहीं हुआ है। पूरे भारत में उनके शुभचिंतकों ने उत्सव मनाया और सभाएं की। अब ऐसा लग रहा था कि सब कुछ बहुत अच्छी जगह पर जा रहा है। लेकिन रामानुजन का स्वास्थ्य गिरता जा रहा था और अंत में डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें वापस भारत लौटना पड़ा।

भारत लौटने पर भी स्वास्थ्य ने इनका साथ नहीं दिया और हालत गंभीर होती जा रही थी। इस बीमारी की दशा में भी इन्होने मॉक थीटा फंक्शन पर एक बेहद अच्छी क्वालिटी का रिसर्च पेपर लिखा। आजकल उनके इस काम का प्रयोग न केवल गणित बल्कि चिकित्साविज्ञान में कैंसर को समझने के लिए भी किया जाता है।

इनका गिरता स्वास्थ्य सबके लिए चिंता का विषय बन गया और यहां तक की अब डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था। अंत में रामानुजन के विदा की घड़ी आ ही गई। 26 अप्रैल1920 के प्रातः काल में वे अचेत हो गए और दोपहर होते होते उन्होने प्राण त्याग दिए। इस समय रामानुजन की आयु मात्र 33 वर्ष थी। इनका असमय निधन गणित जगत के लिए अपूरणीय क्षति था।

रामानुजन और इनके द्वारा किए गए अधिकांश कार्य अभी भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बने हुए हैं। एक बहुत ही सामान्य परिवार में जन्म ले कर पूरे विश्व को आश्चर्यचकित करने की अपनी इस यात्रा में इन्होने भारत को अपूर्व गौरव प्रदान किया। उनका वह पुराना रजिस्टर जिस पर वे अपने थ्योरम और फोर्मुले लिखते थे 1976 में अचानक ट्रिनीटी कॉलेज के पुस्तकालय में मिला। करीब सौ पन्नों का यह रजिस्टर आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बना हुआ है। इस रजिस्टर को बाद में रामानुजन की नोट बुक के नाम से जाना गया। मुंबई के टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान द्वारा इसका प्रकाशन भी किया गया है।

रामानुजन के शोधों की तरह उनके गणित में काम करने की शैली भी विचित्र थी। वे कभी कभी आधी रात को सोते से जाग कर स्लेट पर गणित से सूत्र लिखने लगते थे और फिर सो जाते थे। इस तरह ऐसा लगता था कि वे सपने में भी गणित के प्रश्न हल कर रहे हों। इन्होने शून्य और अनन्त को हमेशा ध्यान में रखा और इसके बीच के संबंध को समझाने के लिए गणित के सूत्रों का सहारा लिया।

रामानुजन के कार्य करने की एक विशेषता थी। पहले वे गणित का कोई नया सूत्र या प्रमेंय पहले लिख देते थे लेकिन उसकी उपपत्ति पर उतना ध्यान नहीं देते थे| रामानुजन का आध्यात्म के प्रति विश्वास इतना गहरा था कि वे अपने गणित के क्षेत्र में किये गए किसी भी काम को आध्यात्म का ही एक अंग मानते थे। वे धर्म और आध्यात्म में केवल विश्वास ही नहीं रखते थे बल्कि उसे तार्किक रूप से प्रस्तुत भी करते थे। वे कहते थे कि “मेरे लिए गणित के उस सूत्र का कोई मतलब नहीं है जिससे मुझे आध्यात्मिक विचार न मिलते हों।

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अपनी concentration को तीन सरल आसनों से कैसे बढाएं ?

“अगर आप इसे पूरे ध्यान, पूरी एनर्जी, अच्छे दिल और अच्छे प्रदर्शन से कर पाएं तो फिर गीत आपको मंत्रमुग्ध कर देगा|” –लेवोन हेल्म (मशहूर संगीतकार और अभिनेता)

Cambridge Dictionary के अनुसार “concentration अपना ध्यान बाकी सभी चीजों से हटा कर जो काम आप अभी कर रहे हैं उस पर केन्द्रित करने की क्षमता है|”

हम सभी जानते हैं कि जीवन में सफल होने के लिए concentration एक जरूरी हुनर है| जो काम आप अभी कर रहे हैं अपना ध्यान उस पर केन्द्रित करने की क्षमता एक ऐसा अनमोल हुनर है जोकि आपके जीवन में हर कहीं काम आता है| अगर आप एक student हैं तो आपको अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने की जरूरत होती है| अगर आप नौकरी करते हैं तो आपको, अपने काम सही ढंग से करने के लिए, अपना पूरा ध्यान इस पर केन्द्रित करने की जरूरत होती है| अगर आप एक खिलाड़ी हैं तो आपको अपने शरीर और मन को उस खेल पर पूरी तरह से केन्द्रित करना होता है, सिर्फ तभी आप उसे अच्छी तरह से खेल पाएंगे| वास्तव में जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए आपको concentration की जरूरत होती है|

 

क्या आपको लगता है कि अपनी concentration powers को बढ़ाना एक बहुत ही मुश्किल काम है| मैं आपको यकीन दिलाता हूँ कि आप अपनी concentration को इतनी तेजी से बढ़ा सकते हैं जितना कि आपने सोचा भी नहीं होगा|
हम concentrate क्यों नहीं कर पाते?
हम सभी, अपने ध्यान को पूरे तरह से अपने काम पर लगाने की अहमियत जानते हैं, फिर भी हम concentrate क्यों नहीं कर पाते? इसके कुछ मुख्य कारण हैं :
•    तनाव
•    multi-tasking (बहुत सारी चीजें एक ही वक्त पर करने की कोशिश करना)
•    कुछ medical conditions – (जैसे कि ADHD – Attention Deficit Hyperactivity Disorder)
•    Technology – mobile phone, computers पर ज्यादा समय बिताना
•    नींद की कमी
•    exercise की कमी
•    नशे का शिकार होना
•    Depression, procastination और बहुत से अन्य कारण|
Concentrate करने की अपनी क्षमता को कैसे बढ़ाएं?
अगर ध्यान या concentration को बढ़ाना इतना ही जरुरी है तो इसे आखिर कैसे बढ़ाएं?
अगर आपको अपनी concentration को तुरंत बढ़ाना है तो आप क्या करेंगे? ज्यादातर लोग अपने focus को temporary basis पर बढाने के लिए जिन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं उनमें से प्रमुख हैं :
(a)    चाय या काफी पीना
(b)    chocolate या फिर कोई टॉफी खा लेना
(c)    कोई दूसरा खाना या फिर कोई आदत|
हालांकि,  इन आदतों के साथ समस्या यह है कि वे थोड़े समय के लिए काम करती हैं। एक कॉफी थोड़ी देर के लिए अपनी ऊर्जा के स्तर को बढ़ा सकती है, लेकिन यह बात तय है कि कुछ समय के बाद,  आप पर फिर से आलस छा जाएगा|
यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपकी concentration power पूरे दिन आपका साथ निभाये आपको इन बातों पर ध्यान देना होगा|
1. पूरी नींद : अगर आप अपनी जरूरत की नींद (6-8 घंटे हर रोज) नहीं ले रहे हैं तो फिर आप कोई भी तरीका इस्तेमाल कर लें, वह काम नहीं करेगा| याद रखिये कि जिस तरह से आपके mobile की बैटरी को charge होने में समय लगता है उसी तरह से आपके शरीर को भी दिन-भर के काम के दौरान इस्तेमाल हुए chemicals और खुद को सेहतमंद रखने के लिए पूरी नींद की जरूरत होती है|
2. स्वस्थ खान-पान : फिर से, अगर आपके खाने में जरुरी पोषक तत्वों और vitamins की कमी होगी तो भी अपने काम में ध्यान लगाने में आपको दिक्कत होगी| अगर खाने-पीने की अपनी आदतों को बदलना आपको मुश्किल लगता है तो कम से कम आप इतना तो कर ही सकते हैं कि कुछ food supplements जैसी कि chayanprash, dry fruits, और अंकुरित दालों या फिर eggs को आप अपने खाने में शामिल कर लें|
3. Exericse : अगर आप पर्याप्त नींद ले रहे हैं, और आपका भोजन भी स्वास्थवर्धक हैं फिर भी अगर आपको अपना ध्यान एक जगह लगाने में दिक्कत होती है तो फिर आप exercises से आप ऐसा आसानी से कर सकते हैं|
लेख के बाकी हिस्से में  मैं, आपको ऐसी तीन सरल exercises के बारे में बताऊंगा जिनकी मदद से आप अपनी concentration तो बहुत ही कम वक्त में बढ़ा सकते हैं|

अपने मन को स्थिर कीजिये :
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अपना ध्यान एक जगह स्थिर करने के लिए मन का स्थिर होना बहुत जरुरी है| ऐसे बहुत से तरीके हैं जिनका प्रयोग लोग अपनी concentration को स्थाई तौर पर बढाने के लिए करते है, जैसे कि meditation (जिसके बारे में मैं अपने अगले लेखों में विस्तार से बताऊंगा)| फिर भी मैं इन तीन exercises को करने को प्राथमिकता देता हूँ क्योंकि एक तो ये बड़ी ही आसान हैं, दूसरी वजह यह है कि इन्हें करने के लिए आपको रोजाना केवल 20 मिनट का वक्त निकालना पड़ता है और फिर आपको फायदा भी तुरंत होता है| और अगर आपको पढ़ाई में या फिर अपने काम में अपने ध्यान को केन्द्रित करने में दिक्कत होती है तो ये exercises आपके काम की हैं|

आप, इन्हें करने के पहले ही दिन से, अपनी concentration powers में फर्क महसूस कर पाएंगे, और एक महीने के बाद तो आप अपने शुरुआती स्तर से बहुत आगे बढ़ चुके होंगे| ये exercises आपके ‘विचारों से बोझिल’ मन को शांत करने और इसे एक साफ़ दिशा देने में आपकी मदद करेंगी|
पहली exercise : ब्रामारी प्राणायाम
भ्रामरी प्रणायाम को करने के Steps
  1. घर के एक एकांत और हवादार कोने में बैठें और अपनी आँखें बंद कर लें|
  2. अपने हाथों के अंगूठों को दोनों कानों के cartilage(उपास्थि) पर रखकर कानों को बंद कर लें, अपनी index finger (तर्जनी) को माथे पर रख लें| बाकी की उँगलियों से अपनी आँखों को बंद कर लें|
  3. अब दोनों nostrils (नथुनों) से सांस अंदर भरें और जब सांस को छोड़ें तो अपने अंगूठों से  कानों से cartilage को दबा कर एक मधुमख्खी की तरह (Humm…..) आवाज पैदा करें| अपने मुहँ को बंद रक्खें|
  4. अब सांस लें और सांस छोड़ते हुए step 3 to तीन बार दोहराएं|
  5. सांस लेते और छोड़ते हुए step 3 to फिर से तीन बार दोहराएं| इस बार अपना मुहँ खुला रखें|
भ्रामरी प्राणायाम करने के लाभ:
Concentration, memory और confidence को बढाने के साथ-साथ, भ्रामरी-प्राणायाम, तनाव, क्रोध और घबराहट से आपको तुरंत राहत पहुंचाता है| यह hypertension और migrain से पीड़ित लोगों के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि यह व्याकुल मन को शांत कर देता है| यह blood-pressure को भी नीचे लाने में मदद कर सकता है|
Exercise 2 :  सूक्षम प्राणायाम
सूक्षम प्राणायाम करने के Steps
1.    सुखासन में आलथी-पालथी मार कर बैठ जाएँ, ज्यादा हले-डुले नहीं|
2.    धीरे-धीरे गहरी और लम्बी सांस लें और छोड़ें|

3.    इस exercise को कम से कम 5-10 मिनट करें| 

सूक्षम प्राणायाम करने के लाभ : यह आपकी concentration, memory और मानसिक शक्तियों को बढ़ा देता है और आपके अस्थिर मन को शांत करके, अगली exerciese ‘त्राटक’ के लिए आपको तैयार कर देता है|

Exercise 3 : त्राटक
त्राटक को ‘त्राटक क्रिया’ या ‘त्राटक साधना’ के नामों से भी जाना जाता है| इस exericese में हम  अपनी पलकों को झपकाए बिना अपना पूरा ध्यान एक point या फिर दीये/मोमबत्ती की लौ पर लगाते हैं|
इस exercise को करने के लिए आप अपना ध्यान और अपनी नजर को किसी भी चीज जैसे की मोमबत्ती की लौ या फिर किसी भी चीज जैसेकि फूल, पत्ते, पर टिकाते हैं| अगर आपको अपनी आखों में जलन का एहसास हो तो फिर कुछ देर के लिए अपनी आखें बाद कर लें और फिर से इस exercise को जारी रखें| इस exericse के लिए उस वस्तु को आखों के स्तर पर लगभग 20 inch की दूरी पर रखें ताकि आपकी गर्दन पर किसी भी तरह का जोर या तनाव न पड़े|
Sri Yantra

 

[Note : हालाँकि आप त्राटक की practicse करने के लिए किसी भी वस्तु का प्रयोग कर सकते हैं| फिर भी मैं आपको ‘श्री यन्त्र’ से इसकी practise करने की सलाह दूंगा इसकी वजह इससे होने वाले फायदे हैं| अगर आपकी आख़ें central point से जरा भी इधर-उधर होती हैं तो इसका पता आपको तुरंत लग जाता है और आप अपने ध्यान को फिर से इस पर टिका सकते हैं| इससे साथ-साथ आपको अपने concentration के वर्तमान स्तर का भी पता चल जाता है|
आप श्री यंत्र की image को या फिर इस लेख के अंत में दिए गए pdf फाइल के लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं| एक A4 sheet पर इसका printout निकालिए और दीवार पर अपने आखों के स्तर पर इसे टांग दीजिए और उसके बाद centre के सफ़ेद point पर अपना ध्यान लगाइए|]
त्राटक के लाभ : त्राटक के फायदों की list लम्बी है| Concentration, intelligence और memory बढाने के साथ-साथ यह आपकी आखों की eyesight को भी बढाता है| यह self-confidence, संतोष और willpower को भी बढाता है| त्राटक, मन को भी शांत करता है और निर्णय लेने की क्षमता को भी बेहतर बनाता है| यह तनाव से मुक्ति और थकान से गहरी राहत भी पहुंचाता है|
सावधानी : त्राटक करने के समय इन बातों का ध्यान करें|
त्राटक करते समय खुद के साथ जोर-जबरदस्ती न करें| अगर आपकी आखों थक जाएँ तो उनको कुछ देर के लिए बंद कर लें| इसे शुरुआत में 10 मिनट तक करें| ध्यान लगाने के लिए आखों पर जोर न डालें| आखों को इसकी आदत डालने में कुछ दिनों का समय लगता है और फिर आप बिना पलकें झपकाए चीजों को 1-2 minutes तक देख पाएंगे| शुरुआत में, अगर आप बिना पलकें झपकाए चीजों को 10-20 seconds तक भी देख पाते हैं तो यह एक अच्छी शुरुआत है| Focus करने की आपकी क्षमता, practice के साथ बढ़ती जाएगी|
इन exercises को सुबह के वक्त करना अच्छा रहता है क्योंकि फिर concentration का आपका स्तर पूरे दिन अच्छा रहता है| लेकिन अगर सुबह समय न मिले तो इन्हें शाम को भी कर सकते हैं|

याद रखिए कि concentration एक skill है जिस पर महारत हासिल करके आप इसका प्रयोग अपने जीवन को बेहतर बनाने में कर सकते हैं|

त्राटक की  practice के लिए pdf file Download करें 

[यह लेख Full-length लेख लिखने की मेरी पहली कोशिश है यह article आपको कैसा लगा, कृपया comments के जरिए इस पर अपनी राय जाहिर करें, धन्यवाद]


How to improve your concentration by 3 simple exercises ?
“If you give it good concentration, good energy, good heart and good performance, the song will play you.”- Levon Helm (Famous Musician and actor)

According to the Cambridge Dictionary, concentration is defined as “The ability to think carefully about something you are doing and nothing else.”

We all know that concentration is a must for achieving success in life. The ability to concentrate on the work in hand is one of the most rewarding skills you can acquire. If you are a student, you need to focus on your studies. If you have a job, you are required to focus on your work in hand to do it effectively. If you are a player, you need to involve your whole body and mind in the sport you are playing, only then you will be able to play it effectively. In fact you need concentration to achieve success in any area of your life.

Do you think it’s hard to improve your concentration powers. Let me assure you that you can improve your concentration faster than you think it possible.

Why we can’t concentrate?
We all already know the value of concentrating on our work, then why we can’t concentrate. Some of the main reasons are :
•    Stress
•    Boredom or Lack of challenge
•    multi-tasking (doing many things at once)
•    some medical conditions – (such as ADHD – Attention Deficit Hyperactivity Disorder)
•    Technology – Using mobile phones, computers for a long period of time
•    Lack of sleep
•    Too little exercise
•    Use of Drugs
•    Depression, procrastination etc
How to improve our ability to concentrate ?
If focus or ability to concentrate is so much important, how can we develop it.

If you want to increase your concentration immediately what will you do? Some of the most popular methods, people use to boost their concentration are :

(a)    Drink a cup of tea/cofee
(b)    eat a small amount of chocolate or some kind of candy
(c)    any other food or ritual.

However, problem with these habits is they work for a short time. A coffee may boost your energy level for a while, but after some time, you are bound to feel lethargic again.

So in order to ensure, that your concentration powers remains on their peak throughout the day. You need to ensure that you :

1.    Sleep Properly : Believe me, if you refuses to take required sleep (6-8 hours per night) than no matter what method you use, it will not work. Remember just as your mobile battery needs charging, your body also needs sleep to replenish chemicals used up during the daily activities and to repair itself.

2.    Eat Healthy :  Again, if you will find it difficult to concentrate on your work if your diet lack the essential nutrients and vitamins. If you find managing your diet a huge task then at least consider adding some food supplements such as chayanprash, dry fruits, sprouts beans or eggs to your diet.

3.    Exercise : If you are taking an adequate amount of sleep, eating healthy and even then you are finding it difficult to concentrate, exercise comes to rescue.

In the rest of the article, I will show you three simple exercises to improve your concentration quickly.

Bring your mind to silence

It’s is no secret that to concentrate properly your mind has to be still. There are many methods people use to silence their mind : such as meditation (which I will discuss in my upcoming posts). However, I prefer these exercises for the improvement as they are simple and takes very little time (20 minutes/day in total) to produce desired results. Also, these exercises are very effective if you find it difficult to focus your mind in the work you are doing, such as study or your job.

You will find difference in your concentration immediately from the day one and in one month you will be miles ahead from your starting place.  These exercises will help you to calm down your clouded mind and gives it a clear direction.

Exercise 1 : Bhramari Pranayama

Steps to practice Bhramari Pranayama

  1. Sit in a quiet and well ventilated corner and close your eyes.
  2. Place your thumb on your ears right at the cartilage, your index finger on the forehead. From the remaining fingers close the eyes.
  3. Take breath from both nostrils and while breathing out press the cartilage with your thumbs. Keep the cartilage pressed while making a loud humming sound like a bee (Humm……). Keep your mouth closed.
  4. Breathe in again and out and continue the same pattern for around 3 times.
  5. Repeat the step 3 with your mouth open for 3 more times.

 

Benefits of Bhramari Pranayama
In addition to improve concentration, memory and building confidence, Bhramari pranayama gives you instant way to relieve tension, anger and anxiety. It is also affective in People suffering from hypertension and migrains, as it calms down the agitated mind. It also helps in reducing blood pressure.
Exercise 2 : Suksham Pranayama

Rules of Suksham Pranayama :
1.    Sit in Sukhasan without any body movement
2.    Take in and release long deep breaths slowly
3.    Do this exercise for at least 5-10 minutes.

Benefits of Suksham Pranayama

It will Improve your concentration, memory, mental power and will calm down your mind to get ready for the next exercise ‘Tratak’.

Exercise 3 : Tratak
Tratak is also known as ‘Tratak Kriya’ or ‘Tratak sadhna’. In this exercise we focus our attention with concentration on a point or on the flame of a lamp continuously, without blinking.

To do this exercise focus your eyes and attention on either the flame or an object. If you get a burning sensation in your eyes, close your eyes for some time and then again repeat this exercise (process). For this exercise, keep the object at a distance of 20 inches at eye level so that there is no strain or pressure on your neck.

[Note : Although you can use any object, picture to practice Tratak. However, I preferably like to use ‘Sri Yantra’ drawing which has many benefits as compared to other objects. The Chart here provides has an extra benefit. If your eyes wander in even a fraction from the central point of the chart, the pattern of triangles will alter immediately which will provide you with a visual clue about your current concentration level.

You can download the Tratak (Sri Yantra) chart or the pdf file provided along with this post. Take printout on A4 sheet and hang it on the wall parallel to your eyes and focus on the central white dot.]
Benefits of Tratak
Tartak has a long list of benefits. Apart from improving concentration, intelligence and memory, it also improves eyesight and vision. It enhances self-confidence, patience and willpower. It calms the mind and provides inner peace and silence. Tratak brings greater clarity in mind and improves decision-making ability. It provides stress relief and deep relaxation.
Cautions : Before you start here are a few word of caution.

Don’t try to force yourself while doing Tratak. If your eyes need rest, close them for a few minutes. Do it initially for 10 minutes. Don’t try to force yourself to look at the object. Eyes needs some time to get used to (say some days) before you will be able to look without blinking for 1-2 minutes. Initially, if you can focus on the object for 10-20 seconds without blinking your eyes, it’s a good start. Your focus time will increase with practice.

It is better to do these exercise in the morning as that will keep your concentration level higher through the day, however you can do them in the evening also.

Remember, concentration is a skill that you can master and use it to your benefit for achieving success in your life.

[This is my first attempt to write an full-length article. Do you find it useful? Please give your opinion in your comments.]


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How to Bounce Back in Life – जीवन में पीछे छूटने पर वापसी कैसे करें?

 

बचपन में, मैं साइकिल चलाना सीखना चाहता था लेकिन इसमें मुझे उम्मीद से ज्यादा वक्त लग रहा था| मैं हमेशा साईकल के दोनों तरफ supporting wheels लगा कर ही इसे चला पाता था और ज्यादा practice भी नहीं करता था, इसलिए मैं साईकल को बैलेंस करना नहीं सीख पा रहा था|
एक दिन मैंने देखा कि मेरी छोटी बहन (जोकि मुझसे ढाई साल छोटी थी) साईकल चलाना सीखने लगी है| अभी भी उसे ठीक से इसे चलाना नहीं आता था लेकिन वह इसे, मुझसे बेहतर तरीके से balance कर पा रही थी| यह विचार, कि वह मुझे हरा देगी, मेरे लिए हजम करना मुश्किल था!
इसलिए मैंने अपनी साईकल उठाई और इसे सड़क पर उतार दिया, मैंने ठान लिया था कि चाहे जो हो जाए मुझे ‘आज और अभी’ इसे चलाना सीखना है| मैंने, अपनी साईकल में supporting wheels लगाए और फिर पागलों की तरह इसे चलाने लगा| जितना संभव था, मैंने सड़क के किनारे उगी हुई घास के करीब रहने की कोशिश की ताकि अगर मैं गिरूँ भी तो मुझे ज्यादा चोट न लगे|
कई बार चलाने और रुकने के बाद आखिरकार मुझे साईकल को बैलेंस करना आ गया| फिर तो जैसे मुझे पंख लग गए| मैंने उन गर्मियों में काफी साईकल चलाई और फिर मैंने हमेशा के लिए इसे चलाना सीख लिया|
उस वक्त तक मुझे लगता था कि साईकल चलना सीखना बहुत मुश्किल काम है| यह डरावनी और सुन्न कर देने वाली चीज थी| मुझे गिरने से बहुत डर लगता था| लेकिन एक बार मैंने डर का सामना करने और तकलीफ झेलने की हिम्मत जुटा ली, तो मैं बड़ी तेजी से दूसरी तरफ पहुँच गया और मैंने इस नए हुनर को सीख लिया| फैसला लेने और साईकल चलाने के बुनियादी हुनर को सीखने में मुझे केवल एक घंटे का वक्त लगा|
तो आखिर किस चीज ने मुझे डर का सामना करने और इसे हराने के लिए motivate किया? वह विचार था कि मैं पिछड़ रहा हूँ और मेरे साथी मुझे छोड़ कर आगे निकल जाएंगे| वे साइकिल चलाना सीख जाएंगे और मैं इसे नहीं सीख पाउँगा| अगर मेरी छोटी बहन ने इसे पहले सीख लिया तो फिर इस बात में कोई शक नहीं कि इसे लेकर मुझे ताने मारे जाएंगे, और मैं बिलकुल भी नहीं चाहता था कि ऐसा हो|

मेरे सिर पर सवार इस pressure ने मेरे फायदे में लिए काम किया| दरअसल, मुझमें डर का सामना करने और इस हुनर को सीखने की काबलियत थी, लेकिन मैं इससे दूर भाग रहा था| मैं डर को खुद पर हावी होने का मौक़ा दे रहा था| उस pressure ने मुझे वह धक्का दिया जिसकी मुझे बेहद जरूरत थी|
कुछ सालों के बाद मैंने खुद को फिर से इससे मिलती-जुलती परिस्थिति में पाया| जब मैं कॉलेज में था तो मैंने पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और ज्यादातर कॉलेज से गायब ही रहता था| तो आखिर मैं अपना वक्त कहाँ बिताता था – चोरी करने, शराब पीने और जुए में| और इसका नतीजा यह हुआ कि मुझे आखिरकार कॉलेज से निकाल दिया गया| जब मुझे होश आया और मैंने फिर से कॉलेज में एडमिशन लिया तो मेरे दोस्त अपने final year में पहुँच चुके थे जबकि मैं ग्रेजुएशन के अपने पहले ही साल में था| मैं अपने दोस्तों से तीन साल पीछे था, और यह बात मेरे दिलो-दिमाग पर पत्थर की तरह रखी हुई थी|
एक बार फिर से, ‘पिछड़ जाने के एहसास’ ने मेरे लिए एक शक्तिशाली motivational force का काम किया| ग्रेजुएशन में चार साल लगाने के बजाए, मैंने खुद से एक बहुत बड़ा वादा किया कि मैं time-management में माहिर होकर, अपनी डिग्री को काफी कम समय में हासिल करने की कोशिश करूंगा| मैंने तीन semisters की किताबें एक ही semister में पढ़ डालीं और मैंने एक नहीं बल्कि दो ग्रेजुएशन की डिग्रियां हासिल कीं – Bachelor of Science (in mathematics and computer science) – और वह भी केवल 18 महीनों में| इसके अलावा मैंने जब अपनी ग्रेजुएशन पूरी की तो मुझे faculty की तरफ से, top कंप्यूटर साइंस student का एक अवार्ड भी मिला|
मुझे बिलकुल भी कोई अंदाजा नहीं था कि ऐसा करने की काबलियत मेरे अंदर थी, ठीक उसी तरह, जिसे तरह मुझे पता नहीं था कि मैं इतनी जल्दी साइकिल चलाना सीख सकता था| पिछड़ जाने की feeling ने मेरे लिए एक शक्तिशाली motivator का काम किया| निराशा की उन feelings को दबाने की बजाय, जैसा कि मैं अक्सर किया करता था, मैंने खुद को, उस pressure के वजन को महसूस करने दिया| वे feelings जोकि negative नजर आती थीं उनका इस्तेमाल मैंने खुद को motivate करने और रुकावट को पार करने में किया|
Social Pressure का Positive पहलु
Social Pressure का सामना आप दो तरीकों से कर सकते हैं, खासकर कि तब जब आपसे कहा  जा रहा हो कि ‘आपको तो ऐसा बनना चाहिए’| आप या तो इस पर सवाल उठा सकते हैं – अगर आपको वैसा बनना पसंद नहीं है तो| या फिर आप इस बात को मान सकते हैं और फिर उस pressure का इस्तेमाल आप, खुद को बेहतर बनाने में कर सकते हैं|
मैंने दुसरे लोगों को, इसी तरह के pressure को इस्तेमाल करके, खुद को बेहतर बनाते हुए देखा है| वे लोग जोकि अपनी कैरियर में लड़खडा रहे थे उन्होंने अपनी दबी हुए इच्छाओं को बाहर निकालकर उन्हें साकार किया है| शर्मीले या समाज से अलग-थलग रहने वाले लोगों ने, अपने social skills को बेहतरीन बनाया है| वे लोग जोकि मुश्किल से ही अपना गुजारा चला पाते थे उन्होंने आर्थिक-संपन्नता का रास्ता ढूंढ निकाला है|

अधिकतर बार, ऐसे लोग सफल होते हैं, और कभी-कभी तो उनकी सफलता हैरान कर देती है| वे ‘पीछे छूटने’ के एहसास को motivation के एक शक्तिशाली स्रोत के रूप में बदल देते हैं| वे साथियों के साथ अपने पुराने रिश्तों को नई परिभाषा देते हैं| ऐसे लोग, हमेशा लेट पहुँचने वाले, पिछड़ने वाले या फिर गैर-भरोसेमंद व्यक्ति बनने की बजाय जल्दी सीखने वाले, हमेशा आगे रहने वाले और अपने लक्ष्य को हासिल करने वाले व्यक्ति बन जाते हैं|

वापस पटरी पर कैसे लौटें
Social pressure की वजह से खुद को लाचार बनाने से बात नहीं बनेगी| ऐसा करने की बजाए,  इसका प्रयोग नई शुरुआत के लिए खुद को motivate करने के लिए कीजिए|
जब आपको यह एहसास होने लगे कि आप पिछड़ रहे हैं तो कैसे आप इस feeling का प्रयोग, खुद को आगे बढाने के लिए कर सकते हैं?
सबसे पहले, आपके मन पर जो भारी बोझ है उसे स्वीकार कीजिए| इस दबाने, रोकने या फिर कम करने की कोशिश मत कीजिए| दर्द को महसूस कीजिए| निराशा को खुद पर छाने दीजिए| अगर आपको ऐसा महसूस होता है कि जीवन में आप कुछ नहीं कर पाए, तो उन feelings को कुछ देर के लिए अपने मन में चलने दीजिए| उन्हें स्वीकार कीजिए| ऐसी feelings आपके मन में बस कुछ देर के लिए ही टिक पाती हैं|
एक बार आपने उन feelings को बहने का मौक़ा दे दिया और उन feelings को express करने की वजह से आपका मन हल्का हो जाए तो फिर एक पल रुकिए और खुद को माफ़ कर दीजिए| ‘कोई बात नहीं|’ ‘ऐसा सबके साथ होता है|’ ‘आखिर मैं एक इंसान ही तो हूँ|’ खुद से कहिए, “मैं आज और अभी से, खुद को पूरी तरह से माफ़ करता हूँ|”
मैं तो आपसे यही कहूंगा कि इस बात को तब तक दोहराते रहिए जब तक कि आपको दिल से यह न लगने लगे कि आपने खुद को वाकई में माफ़ कर दिया है| अपनी डायरी में खुद को माफ़ करने के बारे में लिखिए| लिखिए या टाइप कीजिए, “मैंने खुद को पूरी तरह से माफ़ कर दिया है|”, इसे बार-बार लिखते रहिए| अपना ध्यान खुद को माफ़ करने और खुद को तसल्ली देने पर रखिए जबतक कि आपके दिल का गुबार बाहर नहीं निकल जाता (खासकर के कुछ आंसुओं के रूप में)| अगर आपने वाकई में खुद को माफ़ कर दिया है तो फिर आप ऐसा करने के बाद काफी हल्कापन महसूस करेंगे|
खुद को माफ़ कीजिए पर खुद को बच निकलने का मौक़ा मत दीजिए| ठोकर खा कर गिरने में कुछ भी गलत नहीं है लेकिन गिरने के बाद उठने की कोशिश न करना गलत है| खुद से वादा कीजिए कि “पहले जो हो गया सो हो गया, लेकिन अब इसे मैं फिर से नहीं दोहराऊंगा| अब और ‘पिछड़ना’ नहीं!”

इस बात को जानिए कि आप उठ सकते हैं| आप तेजी से चल सकते हैं| आप ‘पटरी’ पर फिर से लौट सकते हैं|

स्वीकार कीजिए कि यह आसान नहीं होगा| इसे आसान होना भी नहीं चाहिए| यह challenge आपको और मजबूत बनाएगा| यह आपको नींद से जगाएगा| इसकी वजह से आप अपने जीवन में ऊँचे स्तर तक उठ पाएंगे|

अब अपना ध्यान इस बात पर focus कीजिए कि आगे बढ़ने के लिए आप कौन से कदम उठा सकते हैं?
सफलता की अपनी परिभाषा को बदल दीजिए और इसे action-based बनाइए न कि result-based| जैसा कि गीता में लिखा है, “कर्म किए जा, फल की चिंता मत कर|” हमारे पिछड़ जाने की एक बड़ी वजह यह होती है कि हम असफल होने से घबराते हैं| लेकिन बहुत से काम ऐसे होते हैं (जैसेकि साइकिल चलाना सीखना) जिन्हें सीखने के लिए हम बार-बार गिरना पड़ता है, कई बार तो अनेकों बार, और सिर्फ तभी हम उन्हें सीख पाते हैं| इसलिए खुद पर सफल होने के लिए बहुत ज्यादा pressure मत डालिए| इसके बजाय, छोटे-छोटे कदम उठाने के लिए ‘खुद पर बढ़ते हुए pressure’ को महसूस कीजिए| इस दबाव को सही दिशा दीजिए|
जब मैंने साइकिल चलाना सीखने की ठानी थी तब मैंने अपना focus इससे मिलने वाले result पर रखने के बजाय, इससे दूर हटा लिया| मैंने अपना focus उस काम को करने पर रक्खा जिसे करने से मुझे डर लगता था| मेरे लिए वह काम था साइकिल चलाते हुए गिरना और घायल होना| इसलिए मैंने ठान लिया कि मैं आगे बढूंगा और अपना बेहतरीन प्रदर्शन करूंगा, अगर मुझे गिरना पड़े तो मैं गिरूंगा और धूल झाड कर खडा हो जाऊंगा और फिर से साइकिल पर सवार होकर इसे चलाने की कोशिश करूंगा| मैंने स्वीकार कर लिया था कि हो सकता है कि चोट लगे और खून निकले अगर ऐसा हुआ तो मैं दर्द और जख्म के बावजूद साइकिल चलाना जारी रखूंगा| जिन नतीजों से मुझे डर लगता था उन्हें स्वीकार करके मैंने काम करने की सबसे बड़ी रुकावट को दूर कर लिया| मैंने तय कर लिया कि एक डरपोक लड़का बनने के बजाय मैं एक ऐसा लड़का बनना पसंद करूंगा जिसे चोट लगी हुई है और जो घायल है लेकिन जिसे साइकिल चलाना आता है|
अब बताइए कि वे कौन सी चोटें और तकलीफें हैं जिनसे आप बचने की कोशिश कर रहे हैं और जिनकी वजह से आप पीछे और भी पीछे छूटते जा रहे है? क्या आपको लम्बे समय तक पढने से तकलीफ होती है? क्या आप reject किए जाने से घबराते हैं? क्या आपको डर लगता है कि आप गलतियां करके अपना सारा पैसा खो बैठेंगे? आप इन सभी चीजों का सामना कर सकते हैं| इन सब चीजों के होने के बाद भी आप अपना काम जारी रख सकते हैं| इन सब डरों का सामना, हरेक व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी जरुर करता है| आपके पास भी इनका सामना करने की शक्ति है|
कॉलेज में, मैं अपने कोर्स की जितनी भी claases join कर सकता था उन सभी में मैंने अपना नाम लिखा दिया| मैंने ठान लिया कि बेहतर यही रहेगा कि मैं उन classes में जाऊं, अपना होमवर्क करूँ, exam दूं और अपनी पढ़ाई ठीक से करूँ|

जी-जान से कोशिश करें|

खुद से कहें, “अगर इस काम में मैं अपना 100% effort डाल रहा हूँ तो मैं सफल हूँ|” डर का सामना करें| एक soldier की तरह संघर्ष करें और ‘फल की चिंता न करें|’
हो सकता है कि आप यह महसूस करें कि आप इसलिए पिछड़े क्योंकि आपने ठीक से कोशिश ही नहीं की| यहाँ आप इस बात को लेकर परेशान नहीं होते कि दुसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते थे? बल्कि आप खुद यह मानते हैं कि आप सफल हो सकते थे| यह एहसास कि आपने अपना 100% effort नहीं डाला, बड़ा ही disturb करने वाला विचार होता है|
खुद से पूछिए, “अगर मैं अपना बेहतरीन प्रयास करता तो वह कैसा होता?”
खुद से पूछने के लिए यह एक बहुत ही अच्छा सवाल है| लेकिन फिर भी हम यह सवाल खुद से कभी नहीं पूछते क्योंकि जवाब में हमें अपने जीवन के उन हिस्सों का पता चलता है जहां हम पिछड़ रहे होते हैं| और यहीं पर आपको पीछे छूट जाने की तकलीफ का सामना करना होता है|
तकलीफ का सामना कीजिए| इन feelings को खुद पर हावी होने दीजिए| ‘पीछे छूट जाने’ से होने वाले भारीपन और निराशा को महसूस कीजिए|
और फिर खुद से पूछिए कि आप क्या कर सकते हैं? कैसे आप अपना 100% effort इस काम में डाल सकते हैं? आप क्या कर सकते हैं? आपको सबसे पहले क्या करना है?
आप कोशिश करके असफल हो सकते हैं| आपको कोशिश करने के बाद भी reject किया जा सकता है| आप कोशिश करके सीख सकते हैं|
अगर आप बार-बार अपना 100% effort डालते रहें तो आप जल्द ही पुराने डरों और ‘दीमक की  तरह आपको खोखला करने’ वाली चिंता से, मुक्ति पा लेंगे| और फिर वह वक्त दूर नहीं होगा जब सपने हकीकत का रूप लेने लगेंगे, और फिर वे पूरे तरह से साकार हो जाएंगे|
तो आपको कहाँ लगता है कि आप पिछड़ रहे हैं? अपने जीवन के किन हिस्सों में आपको मनचाही सफलता नहीं मिल रही है? इसकी वजह से होने वाली निराशा को महसूस कीजिए| खुद को माफ़ कीजिए| पता कीजिए कि आपका बेहतरीन प्रयास क्या होगा? आगे बढिए और काम कीजिए| कोशिश कीजिए| गिरिए| घायल होइए| फिर से कोशिश कीजिए| और तब तक लगे रहिए जब तक कि आपको सफलता नहीं मिल जाती|
यह सब साइकिल चलाने जैसा ही तो है|

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मुश्किलों का स्वागत कीजिए

अपनी काम की समस्याओं का धन्यवाद दीजिए| क्योकिं आपको अपनी आधी इनकम उन्हीं की वजह से मिलती है| क्योंकि अगर गलत होने वाली चीजें नहीं होतीं, या फिर ऐसे कठिन लोग नहीं होते जिनका सामना आपको करना पड़ता है, या फिर समस्याएं नहीं होती, या फिर आपका काम उबाऊ नहीं होता, तो कोई भी व्यक्ति आपको मिलने वाली सैलरी के आधे में ही, इस काम करने लिए तैयार हो जाता|

किसी भी काम की मुश्किलों को हल करने के लिए समझदारी, सूझ-बूझ, कुशलता और हिम्मत की जरूरत पड़ती है| और आपके पास आपकी वर्तमान नौकरी होने की यही वजह है| और शायद यही वजह है कि आप इससे बेहतर कोई दूसरी नौकरी नहीं कर रहे| 

अगर हममें से हरेक और ज्यादा मुश्किलों का स्वागत करने लगे, और उन्हें खुशी-खुशी, एक अच्छे विवेक के साथ संभालना सीख जाए, बजाय उनसे परेशान होने के, तो हम बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ सकते हैं| क्योंकि यह तो एक सच्चाई है कि काफी तादाद में बड़ी नौकरियाँ उन लोगों का इन्तजार कर रहीं होती हैं जोकि उनसे जुडी मुश्किलों से नहीं घबराते|

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फ्री में काम कीजिए !

(Original Post : Working for free, Dec 7th, 2007 by Steve Pavlina)

बहुत से लोग मुझसे पूछते है कि वे कैसे नई दिशा में काम करके इनकम कमा सकते हैं, खासकर कि वैसा काम जोकि काफी रचनात्मक या कलात्मक होता है| कुछ लोग तो पहले ही काफी सामग्री जैसेकि एल्बम या फिर किताबें या पेंटिंग बना चुके होते हैं, लेकिन वे उससे कोई धन नहीं कमा रहे होते| कुछ के पास काफी अच्छे स्तर का हुनर होता है लेकिन उनके पास कोई ग्राहक या खरीददार नहीं होते और वे नहीं जानते कि कैसे लोगों को अपना सामान खरीदने के लिए मनाया जाए?

मैं आमतौर पर ऐसे लोगों से कहता हूँ कि उन्हें अपना ध्यान पैसे कमाने पर फोकस करने के बजाए वैल्यू पहुंचाने पर लगाना चाहिए| मैं इस बात पर जोर देता हूँ कि कलाकारी का एक नमूना बनाने से या फिर एक हुनर विकसित करने से किसी को कोई वैल्यू नहीं मिलती और इसलिए इससे कोई इनकम भी नहीं उत्पन्न होती | वास्तव में अपनी कलाकृति या हुनर को दूसरों के साथ बांटना, दूसरों तक वैल्यू  पहुंचाता है और वहीं पर अपने काम से इनकम कमाने की संभावना होती है|

अगर आपने एक एल्बम, एक किताब, या फिर एक कलाकृति बनाई है, तो आखिर कितने लोग हर रोज इसे देखते हैं? अगर यह आपके स्टोर रूम के एक कोने में पडी हुई है, तो फिर इससे धन कमाने की संभावना नहीं के बराबर है क्योंकि यह दूसरों को कोई वैल्यू प्रदान नहीं करती|

लोगों को अपने काम की वैल्यू दिखाने का एक सबसे बेहतर तरीका है कि इसे उनके साथ फ्री में बाँट दिया जाए| इससे लोगों का रिस्क कम हो जाता है और इससे, उनके लिए, आपकी वैल्यू हासिल करना आसान हो जाता है| इस तरीके से आप अपनी वैल्यू दूसरों के साथ फौरन बाँट सकते हैं|


उदाहरण के तौर पर, अगर आप एक वेब-साईट डेवलपर के तौर पर इनकम कमाने की शुरुआत करना चाहते हैं तो अपने हुनर को फ्री में दूसरों के साथ बांटने पर ध्यान केन्द्रित कीजिए| वेबसाइट डेवेलप करने का जितना काम आप संभाल सकते हैं उतने काम को स्वीकार कर लीजिए| रेफेर्रल्स के लिए अनुरोध कीजिये| उन ग्राहकों पर ध्यान लगाइए जिनको आप अपनी महारत वाले हुनर का इस्तेमाल करके काफी कम समय में काफी अधिक वैल्यू प्रदान कर सकें| अगर आप अपना काम थोड़ी भी मेहनत से करेंगे, तो आपके पास उन छोटे व्यवसायों की जोकि आपसे फ्री में काम कराना चाहेंगे, कोई कमी नहीं रहेगी| एक बार आपके पास फ्री रेफेर्रल्स की संख्या इतनी बढ़ जाए जोकि आपकी क्षमता से बाहर हो तो फिर आप अपने काम के लिए एक उचित कीमत मांगना शुरू कर सकते हैं| अगर आप प्रभावित कर सकें तो आपके फ्री ग्राहकों में से शायद कई ग्राहक कीमत अदा करने वाले ग्राहकों में बदल जायेंगे, और आपको भी अपने बढ़ते हुए रेफेर्रल्स का फ़ायदा मिलने लगेगा|

इसी बुनियादी तरीके का उपयोग ‘ईरिन’ ने तब किया जब उसने ‘सहज ज्ञान से रीडिंग्स’(intuitive readings) की शुरुआत की थी| उसने अपने परिवार, दोस्तों, और कुछ-एक निजी ग्राहकों को फ्री रीडिंग्स देने से शुरुआत की जबतक कि उस यह नहीं लगने लगा कि अब उसे अपनी सेवाओं के लिए एक कीमत मांगने की शुरुआत करनी चाहिए| पहले ही साल में, उसे बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए चार बार अपनी कीमतों में बढौतरी करनी पडी|


रचनात्मक कार्यों जैसे कि कलाकृति या फिर संगीत या लेखन के मामलों में, अपने काम को लोगों के हाथों तक फ्री में पहुंचाने का एक तरीका ढूंढिए| उनसे पूछिए कि आपका काम उनको कैसा लगा, और उन्हें आपके काम को, दूसरों के साथ बांटने के लिए प्रेरित कीजिए| शुरुआत में कमाई की चिंता मत कीजिए| केवल अपने काम को दूसरों तक पहुंचाने पर ध्यान लगाइए|

फिर से, अगर आपका काम अच्छा है तो लोगों को इससे कुछ वैल्यू मिलेगी, और वे इसे खुशी-खुशी दूसरों के साथ बांटेंगे|

लोगों के द्वारा अपनी रचनाओं को बांटना कुछ इस तरह से सरल बनाइये कि इस दौरान आपका खर्चा कम-से-कम हो| उदाहरण के तौर पर, अगर आप एक पेंटर हैं, तो अपनी सभी कलाकृतियों को दूसरों के साथ बांटना बेहद खर्चीला साबित होगा, लेकिन आप कंप्यूटर के वॉलपेपर, जिन्हें लोग फ्री में डाउनलोड कर सकें, के रूप में इन कलाकृतियों को दूसरों के साथ बाँट सकते हैं| और फिर, अगर आप इन्हें एक रेस्टोरेंट के साथ बाँट सकें जहां पर बहुत से लोग आपकी कलाकृतियों को देख और सराह सकें, तो  शायद यह भी एक अच्छा तरीका साबित हो सकता है|

मैंने इसी तरीके का इस्तेमाल अपने कंप्यूटर गेम्स के बिजनेस में किया| मैंने डाउनलोड किये जाने लायक गेम्स के डेमो, मैं जितने लोगों के साथ बाँट सकता था, बाँट दिए| उनमें से एक निश्चित अनुपात में लोग पूरे खेल को खरीदने के लिए वापस आए| उनके रिस्क को और भी कम करने के लिए मैंने, हरेक खरीद पर 60-दिनों की मनी-बैक गारंटी भी दे डाली| मेरे दोस्तों ने इस अतिरिक्त गारंटी को ‘डाउनलोड किये जाने लायक सॉफ्टवेअरों’ के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया था, लेकिन आज यह एक आम सी बात हो गई है| इसके पीछे प्रमुख विचार यही था कि जो वैल्यू में दूसरों के साथ बांटना चाहता हूँ, लोग उसे आसानी से स्वीकार करें और उसका आनंद उठा पाएं|

अगर लोग आपके काम को फ्री में भी स्वीकार करने से कतरा रहें हैं, और अगर रेफेर्रल्स आने की भी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है, तो शायद लोग आपके काम की कद्र नहीं कर रहे हैं| यह इस बात का संकेत है कि या तो आपको अपने हुनर को और अधिक बेहतर बनाने की जरूरत है, या फिर आपको अपना ध्यान एक ख़ास तरह के ग्राहकों पर केन्द्रित करने की जरूरत है|

बहुत से लोगों के पास जीवन जीने का एक निम्नतर स्तर होता है जिसे कि वे बनाए रखना चाहते हैं| मैं आपको सलाह दूंगा कि आप वैल्यू बाँटने का भी एक निम्नतर स्तर बनाएं| अगर आप वैल्यू बांटने का एक निम्नतर स्तर बना पाते हैं, तो फिर आपको अपने जीवन का निम्नतर स्तर बनाए रखने में कोई मुश्किल नहीं होगी|

हालांकि ऊपर से ऐसा नजर नहीं आता लेकिन फ्री में काम करना आपके समय का एक बहुत अच्छा उपयोग हो सकता है | मैंने इसे बहुत से अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए देखा है| हालांकि यह प्रतिभा की कमी को पूरा करने का कोई उपाय नहीं है, लेकिन यह लोगों को अपनी पसंद के काम करते हुए एक इनकम स्ट्रीम बनाने की दिशा में एक बेहतरीन शुरुआत देता है|

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अपने काम को खुशी से कीजिए या फिर काम ही मत कीजिए|
क्या आप अपनी धुन मन में ही लिए दुनिया से चले जाएंग…
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आपको कभी भी नौकरी क्यों नहीं करनी चाहिए – दस कारण

(Original Post : 10 Reasons You Should Never Get a Job, July 21st, 2006 by Steve Pavlina)

अभी कुछ समय पहले मैंने यूं ही मजे के लिए एरिन से पूछ लिया, “अब जबकि बच्चे भी स्कूल जाने लगे हैं, तुम्हें नहीं लगता कि अब तुम्हें बाहर जाकर अपने लिए एक नौकरी ढूंढनी चाहिए? तुम इतने समय से बेरोजगार हो, यह मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता|”

वह मुस्कुराई और बोली, “वाकई| मुझे नौकरी छोड़े हुए इतना लंबा वक्त हो गया| लेकिन अजीब बात है कि यह मुझे पसंद है!”

हममें से किसी के पास भी 90 के दशक से कोई नौकरी नहीं है(मैंने पहली और आखिरी बार 1992 में नौकरी की थी), इसलिए हम काफी लम्बे समय से सेल्फ-एम्प्लोयेड(self-employed) हैं| हमारे घर में तो अक्सर यह मजाक चलता रहता है जिसमें हम एक-दूसरे से कहते रहते हैं, “आवारागर्दी बहुत हो गयी, अब जाओ और अपने लिए एक नौकरी ढूंढो!”

यह ‘थ्री स्टूजिस’ के एक दृश्य की तरह हैं जहां पर मोए, कर्ली से एक नौकरी करने के लिए कहता है और कर्ली कुछ इस तरह से वापस जवाब देता है, “नहीं, कृपया करके यह नहीं! और कुछ भी चलेगा बस यह नहीं!”

यह एक मजेदार बात है कि जब लोग एक खास उम्र पर पहुँचते हैं, जैसे कि कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद, वे यह मान लेते हैं कि अब, बाहर निकलकर अपने लिए एक नौकरी तलाश करने का वक्त आ गया है| लेकिन, उन बहुत सी चीजों की तरह जिन्हें लोग करते हैं, ऐसा करना और यह मान लेना कि यही करना सही है कोई अच्छा विचार नहीं है| वास्तव में, अगर आप सामान्य(reasonably) रूप से एक समझदार व्यक्ति हैं, तो नौकरी हासिल करना, अपना जीवन-यापन(support yourself) करने के लिए किए जाने वाले उपायों में से सबसे बुरा उपाय है| अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए, खुद को बंधुआ-मजदूर(indentured servitude) बनाकर, बेचने के अलावा और कहीं बेहतर तरीके मौजूद हैं|

यहाँ कुछ कारण दिए गए हैं कि क्यों आपको नौकरी हासिल करने से बचने के लिए अपनी पूरी कोशिश करनी चाहिए :

1. अनाड़ियों के लिए इनकम|
नौकरी हासिल करना और धन कमाने के लिए अपने समय को बेचना एक अच्छा विचार लग सकता है| इसके साथ केवल एक ही समस्या है| यह बेवकूफी भरा विचार है| जिन तरीकों से आप आय(Income) कमा सकते हैं यह उनमें से सबसे ज्यादा मूर्खतापूर्ण तरीका है| यह वाकई में अनाड़ियों के लिए आमदनी का जरिया है|

आखिर नौकरी हासिल करना इतना बचकाना विचार क्यों है? क्योंकि जितना वक्त आप काम करते हैं आपको केवल उसी समय के लिए वेतन मिलता है| क्या आपको इसमें कोई समस्या नजर नहीं आती, या फिर आपके दिमाग में यह विचार अच्छी तरह से बिठा दिया गया है कि जितना समय आप काम करेंगे उतने ही समय का वेतन आपको मिलेगा, और आप सोचने लगे हैं कि आखिर इसमें गलत क्या है, यही सही और समझदारी भरा विचार है| क्या आपने यह कभी नहीं सोचा कि कितना अच्छा होता अगर आपको उस समय का वेतन भी मिलता जब आप आराम कर रहे होते? यह आपको किसने बताया कि आप केवल काम करते वक्त ही ‘इनकम’ कमा सकते हैं? शायद किसी दूसरे ब्रेनवाशड(brainwashed) कर्मचारी ने?


क्या आपको नहीं लगता कि आपका जीवन कहीं ज्यादा आसान होता अगर आपको उस वक्त का वेतन भी मिलता जब आप खाना खा रहे होते, सो रहे होते या फिर बच्चों के साथ खेल रहे होते? आपको 24 घंटे और 7 दिनों का वेतन क्यों नहीं मिलना चाहिए? वेतन मिलता रहे चाहे आप काम कर रहे हों या फिर आराम से बैठे हों! जिस वक्त आप अपने पौधों की देखभाल नहीं कर रहे होते क्या वे बढना छोड़ देते हैं? फिर आपका बैंक अकाउंट भी क्यों न पौधों की तरह ही बढ़ता रहे?

किसे परवाह है कि आप ऑफिस में कितने घंटे काम करते हैं? इस पूरी धरती पर केवल मुठ्ठी-भर लोग ही परवाह करते हैं कि आप ऑफिस में कितना समय बिताते हैं| हममें से ज्यादातर लोगों को तो पता भी नहीं चलता कि आप हफ्ते में 6 घंटे काम करते है कि 60 घंटे| लेकिन अगर आपके पास हमें देने के लिए कुछ मूल्यवान(value) वस्तु है, तो हममें से काफी लोग खुशी-खुशी अपना बटुआ निकालकर आपको इसकी कीमत चुकाने के लिए तैयार हो जाएँगे| हमें आपके समय की परवाह नहीं है – हम सिर्फ, प्राप्त होने वाले मूल्य के लिए, सही कीमत चुकाने की परवाह करते हैं| क्या आपको वास्तव में इस बात की परवाह है कि यह लेख लिखने में मुझे(Steve Pavlina) को कितना वक्त लगा? अगर इसे लिखने में 3 घंटे के बजाय 6 घंटे का समय लगा हो तो क्या आप मुझे इसकी दोगुनी कीमत देंगे?

समझदार लोग, अक्सर अनाड़ियो के रास्ते पर चलकर, परम्परागत तरीके से वेतन कमाने से शुरुआत करते हैं| इसलिए, अगर आपको अभी इस बात का एहसास हो रहा है कि आपको निचोड़ लिया गया है, तो बुरा महसूस मत कीजिए| गैर-अनाड़ियों को आखिरकार इस बात का एहसास हो जाता है कि धन कमाने के लिए अपने समय को बेचना, वास्तव में कोरी मुर्खता ही है और यह भी कि इससे बेहतर कोई तरीका भी होना चाहिए| और बेशक इससे बेहतर एक तरीका है| इसका राज है अपने मूल्य को अपने समय से अलग करना||

स्मार्ट(बुद्धिमान) लोग ऐसे सिस्टम बनाते हैं जिनसे कि 24 घंटे/7तों दिन कमाई होती है, खासकर कि निष्क्रिय-आय(passive income)| इसमें शामिल हो सकता है, एक बिजनेस शुरू करना, एक वेब-साईट का निर्माण, एक निवेशक(investor) बनना, या फिर रचनात्मक काम से रॉयल्टी-इनकम कमाना| सिस्टम लगातार मूल्य लोगों तक पहुंचाता रहता है और इससे इनकम उत्पन्न करता रहता है, और एक बार यह रफ़्तार पकड़ ले, तो यह लगातार चलता रहता है फिर चाहे आप इसके देखभाल करें या न करें| उस पल से, आपका अधिकतर समय अपनी आमदनी को बढाने में लग सकता है(आपके सिस्टम को और बेहतर बनाने में या फिर नए सिस्टम बनाने में) बजाय इसके कि वह समय केवल अपनी आमदनी को बरकरार(maintain) रखने में ही इस्तेमाल हो पाए|


यह वेबसाइट(www.stevepavlina.com) एक ऐसी ही प्रणाली का एक उदाहरण है| इस लेखन के समय, यह सिस्टम, मेरे(स्टीव पव्लिना) लिए लगभग 9,000 डॉलर(Rs.4,14,000) प्रति-माह (ताजा जानकारी: $40,000 (Rs.18,40,000) एक महीने में 31/10/06) की आमदनी उत्पन्न करता है, और ऐसा भी नहीं कि यह मेरी आमदनी का एकमात्र स्रोत्र(Source of income) ही हो| मैं हरेक लेख सिर्फ एक बार (एक निश्चित समय का निवेश) ही लिखता हूँ, और लोग उनसे साल-दर-साल मूल्य हासिल कर सकते हैं. वेब सर्वर(Web Server) लोगों तक मूल्य पहुंचाते हैं, और दूसरे सिस्टम (जिनमें से ज्यादातर मेरे बनाए हुए नहीं हैं और जिन्हें मैं ठीक से समझता भी नहीं) आमदनी इकट्ठा करके इसे मेरे बैंक खाते में स्वचालित(automatic) रूप से जमा कर देते है| यह पूरी तरह से निष्क्रिय(passive) नहीं है, लेकिन मुझे लिखने से प्यार है और मैं तो इसे मुफ्त में भी करने के लिए तैयार हूँ| लेकिन बेशक, मुझे इस बिजनेस को शुरू करने के लिए बहुत सारा पैसा खर्च करना पडा होगा? हाँ भई, $9(Rs. 550) इन दिनों एक बहुत बड़ी रकम है (डोमेन नाम रजिस्टर करने के लिए)| उसके बाद तो यह फायदे में ही रहा|

बेशक, अपने खुद के ऐसे सिस्टम डिजाइन करने को, अमल(implement) में लाने के लिए, जोकि आपकी आमदनी का जरिया बनें, शुरुआत में कुछ समय और प्रयास की जरूरत होती है| लेकिन आपको सबकुछ शुरुआत से करने की कोई मजबूरी नहीं होती – आप मौजूदा सिस्टम जैसेकि विज्ञापन नेटवर्क और एफिलिएट(affiliate) प्रोग्रामों, का उपयोग करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र होते है| एक बार काम चल निकलने के बाद आपको खुद की रोजी-रोटी कमाने के लिए इतने ज्यादा घंटे काम करने की ज़रूरत नहीं होगी| क्या ही अच्छा रहेगा कि आप अपने जीवन-साथी के साथ रात का खाना बाहर खा रहे हों और आप जानते हों कि आप खाना खाते वक्त भी पैसे कमा रहे हैं|  अगर आप लगातार कई घंटों तक इसलिए काम करते रहना चाहते हैं क्योंकि ऐसा करना आपको खुशी देता हो तो आगे बढिए और काम कीजिए| अगर आप पैर फैला कर खाली बैठना चाहते हैं तो आप ऐसा करने के लिए भी आजाद हैं| जब तक आपका सिस्टम दूसरों तक मूल्य पहुंचाना जारी रखेगा, आपको कमाई होती रहेगी चाहे आप काम करें या न करें|

आपकी करीबी किताबों की दुकानें ऐसी किताबों से भरी पडी हैं जिनमें दूसरो के द्वारा बनाए गए, परीक्षण किए गए और कमियाँ दूर किए गए, सिस्टम्स का जिक्र है| कोई भी इंसान यह जानकारी लेकर तो इस दुनिया में नहीं आता कि बिजनेस कैसे शुरू किया जाए या इन्वेस्टमेंट से पैसा कैसे कमाया जाए, लेकिन इसे आसानी से सीखा जा सकता है| यह जानकारी हासिल करने में आपको कितना समय लगता है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि समय को तो आखिर गुजरना ही है| आप भविष्य के किसी मुकाम पर इनकम-कमाने वाले सिस्टम्स के मालिक बन सकते हैं बजाय इसके कि आप जीवन-भर बंधुआ मजदूर की तरह काम करें| यह आर-या-पार वाली बात नहीं है| अगर आपका सिस्टम महीने-भर में कुछ सौ डॉलर ही उत्पन्न(generate) कर पाता है तो भी यह सही दिशा में उठाया गया एक कदम है|

2. सीमित अनुभव
आपको लग सकता है कि अनुभव पाने के लिए एक नौकरी हासिल करना अहम् होता है| लेकिन यह बात कुछ ऐसी ही हुई कि आपको गोल्फ का अनुभव हासिल करने के लिए गोल्फ खेलनी चाहिए| आप अपने जीवन से अनुभव हासिल करते हैं, फिर चाहे आप नौकरी करें या न करें| एक नौकरी आपको केवल उसी काम का अनुभव देती है, लेकिन अनुभव तो आप किसी भी काम से हासिल कर सकते हैं, इसलिए इससे कोई वास्तविक फायदा नहीं होता| कुछ सालों तक सिर्फ इधर-उधर खाली बैठे रहिए, और आप खुद को अनुभवी दार्शिनिक, महात्मा या फिर पॉलिटिशियन कहलवा सकते हैं|

एक नौकरी से अनुभव हासिल करने के साथ समस्या यह है कि आप आमतौर पर केवल वही सीमित अनुभव बार-बार दोहराते रहते हैं| आप शुरुआत में बहुत कुछ सीखते हैं और फिर ठहर जाते हैं| यह, आपको दूसरे ऐसे अनुभव जो आपके लिए कहीं अधिक मूल्यवान होते, की कमी महसूस करने के लिए मजबूर करता है|  और अगर आपका सीमित कौशल(skill-set) कहीं चलन से बाहर हो जाता है, तो फिर आपका अनुभव कूड़ेदान के लायक भी नहीं रहेगा| वास्तव में, खुद से पूछिए क्या जो अनुभव आप अभी वर्तमान में हासिल कर रहे हैं, उसकी कीमत 20-30 सालों तक भी कायम रहेगी| क्या तब तक आपकी नौकरी का कोई वजूद भी होगा?

ज़रा इस पर विचार करें| आप कौन सा अनुभव हासिल करना ज्यादा पसंद करेंगे? यह जानकारी कि एक ख़ास काम को किस तरह से अच्छे ढंग से किया जाए – एक ऐसा काम जिसमें आप केवल अपने समय को बेच कर धन कमा सकते हैं – या फिर यह जानकारी कि कैसे आप अपने बाकी के जीवन में फाइनेंसियल अबंडेंस  (भरपूर धन-दौलत) हासिल कर सकते हैं वह भी एक नौकरी की जरूरत के बिना? अब मैं आपके बारे में तो नहीं जानता, लेकिन मैं तो दूसरा अनुभव हासिल करना पसंद करूंगा| यह वास्तविक दुनिया में कहीं ज्यादा उपयोगी नजर दिखाई देता है, क्या आपको नहीं लगता?


3.    जीवन-भर की गुलामी :
एक नौकरी हासिल करना मानव-दासता(human domestication) प्रोग्राम में दाखिला लेने की तरह है| आप सीखते हैं कि किस तरह से एक अच्छा गुलाम बना जाता है|

ज़रा अपने चारों-ओर देखिए| वाकई देखिए| आपको क्या नजर आता है? क्या एक आजाद मनुष्य का माहौल ऐसा होता है? या फिर आप बेजुबान जानवरों के लिए बनाए गए एक पिंजरे में रह रहे हैं? क्या आपको अपने खूबसूरत पट्टे(beidge) से लगाव हो गया है?

आज्ञापालन(obdience) की आपकी ट्रेनिंग कैसी चल रही है? क्या आपका मालिक अच्छे व्यवहार पर आपको ईनाम देता है? अपने मालिक की आज्ञा नहीं मानने पर क्या आपको अनुशासित किया जाता है?

क्या आजादी की कोई चिंगारी आपके अंदर अभी-भी बाकी है? या फिर आपके सामाजिक-अनुकूलन(social conditioning) ने आपको जीवन-भर के लिए एक गुलाम बना दिया है?

इंसान पिंजरों में बड़े होने के लिए नहीं बने है| प्यारे गुलाम…

4. एक अनार सौ बीमार.
कर्मचारियों का वेतन पर सबसे ज्यादा टैक्स लगाया जाता है| ‘संयुक्त राज्य अमेरिका’ में आप यह उम्मीद कर सकते हैं कि आपका आधा वेतन टैक्स में ही चला जाएगा| टैक्स सिस्टम इस बात को छुपाने के लिए इस तरह से डिजाईन किया जाता है कि आपको पता ही न चले कि आखिर आप कितना टैक्स दे रहे हैं, क्योंकि इनमें से कुछ टैक्स आपके मालिक(employer) द्वारा दिए जाते हैं, और कुछ आपकी तनख्वाह से काट लिए जाते हैं| लेकिन इस बात की तो आप शर्त लगा सकते हैं कि आपके मालिक के नजरिए से वे सभी टैक्स आपके वेतन का ही हिस्सा समझे जाते हैं, इसके अलावा आपको मिलने वाला किसी तरह का लाभ(मुआवजा/Compensation) भी आपके वेतन का ही हिस्सा होते हैं| यहाँ तक कि ऑफिस में आपको मिलने वाली जगह का किराया भी ध्यान में रखा जाता है, इसलिए आपको और ज्यादा मूल्य (value) पैदा करना होता है ताकि आप खर्चों(expenses) को पूरा (cover) कर पाएं| आपको लग सकता है कि कॉर्पोरेट का वातावरण(corporate environment) आपको सहारा दे रहा है, लेकिन ध्यान रखिए कि इसकी कीमत चुकाने वाले आप ही हैं|

आपके वेतन का एक और हिस्सा मालिकों और निवेशकों के पास चला जाता है| एक अनार सौ बीमार|

यह समझना मुश्किल नहीं है कि कर्मचारी अपनी आय के हिसाब से सबसे अधिक टैक्स क्यों चुकाते हैं| आखिरकार, टैक्स सिस्टम पर किसका अधिक नियंत्रण होता है? बिज़नेस मालिकों(business owners) का या फिर कर्मचारियों का?

आपको, अपने द्वारा उत्पन्न(generated) वास्तविक मूल्य के एक अंश का ही भुगतान(get paid) मिलता है, आपकी वास्तविक आय, आपके वर्तमान वेतन के तीन गुने(triple) से भी अधिक हो सकती है, लेकिन उसमें से अधिकतर पैसे को आप कभी देख भी नहीं पाएंगे| यह सीधे दूसरे लोगों की जेबों में चला जाता है.

आप कितने दरियादिल(generous) इंसान हैं!

5. रिस्क(जोखिम) बहुत ज्यादा है|
कई कर्मचारियों को यकीन होता है कि नौकरी हासिल करना अपनी रोजी-रोटी कमाने का सबसे सुरक्षित और रिस्क-फ्री (risk-free) तरीका है|

अनाडी|

सामाजिक-अनुकूलन(social conditioning) कमाल का होता है| यह इतना अच्छा होता है कि यह लोगों को सच्चाई से एकदम उल्ट बातों का भी यकीन दिला सकता है|

क्या खुद को एक ऐसी स्थिति में रखना जहां पर कोई दूसरा व्यक्ति आपका पूरा वेतन सिर्फ कुछ शब्द कहकर (“आपको नौकरी से निकाला जाता है”) बंद कर सकता है, आपको सबसे सुरक्षित और रिस्क-फ्री (risk-free) लगता है? ईमानदारी से बताइए कि आय का केवल एक स्रोत(source) होना, आय के दस स्रोत होने से अधिक सुरक्षित लगता है?

यह विचार कि एक नौकरी ही आय कमाने का सबसे सुरक्षित तरीका है, बेहद बचकाना(silly) है| अगर आपके पास नियंत्रण(control/कंट्रोल) नहीं है तो आप सुरक्षित नहीं रह सकते, और कर्मचारियों के पास सबसे कम नियंत्रण होता है| अगर आप एक कर्मचारी हैं तो आपकी नौकरी का असली शीर्षक(title) ‘पेशवर जुआरी(professional gambler)’ होना चाहिए|

6. एक बुरा मंदबुद्धि मालिक |

अगर आप इंटरप्रेन्योर(self-employment) की दुनिया में एक बेफकूफ से टकराते हैं, तो आप वापस मुडकर दूसरी ओर चल देते हैं| लेकिन जब आप कॉर्पोरेट जगत में किसी बेफकूफ से टकराते हैं, तो आपको वापस मुड़कर कहना पड़ता है, “Sorry, Boss.”

क्या आप जानते हैं कि ‘बॉस/Boss’ का शब्द, डच(Dutch) शब्द bass से निकला है, जिसका ऐतिहासिक अर्थ होता है मालिक? बॉस शब्द का दूसरा अर्थ होता है “एक गाय या मंदबुद्धि”| और कुछ विडियो गेमों में बॉस वह बुरा किरदार होता है जिसे आपको हर स्तर के अंत में ख़त्म करना होता है|

तो अगर आपका बॉस वाकई में आपका दुष्ट मंदबुद्धि मालिक है, तो फिर आप क्या बन जाएंगे? कूड़ेदान में एक और कीड़े के सिवाय कुछ भी नहीं|

इसका अपनी फैमिली से आपके संबंधों पर क्या असर पडेगा?

7. पैसे के लिए भीख माँगना

जब आप वेतन बढ़ाना चाहते हैं, तो क्या आपको देर तक ऑफिस में बैठकर अपने मालिक से ज्यादा पैसों की भीख मांगनी पड़ती है? क्या जब-तब कुछ ज्यादा बिस्कुट अपनी तरफ उछाल दिया जाना आपको अच्छा लगता है?

या फिर आप खुद के अलावा किसी और की इजाजत लिए बिना यह तय करने के लिए स्वतंत्र हैं कि आप कितना वेतन हासिल करना चाहते हैं?

अगर आपका खुद का बिजनेस हो और एक ग्राहक आपसे कहे “नहीं”, तो आप बरबस(simply) कह देते हैं “अगला”|

8. एक सीमित सामाजिक जीवन

बहुत से लोग अपनी नौकरियों को समाज से खुद को जोड़ने वाले दरवाजे की तरह मानते हैं| वे उसी फील्ड(field) में काम कर रहे उन्हीं लोगों से मिलते-जुलते रहते हैं| ऐसे करीबे रिश्ते समाज की बंद गलियों(dead ends) की तरह होते हैं| एक रोमांचक दिन, कंपनी के बारे में गहन-वार्तालाप(deep conversation) से शुरू होकर जल्द ही फुलझड़ियों से   तीखें तीरों(arrowheads), राजनीति में किसने क्या कहा, और क्रिकेट में ताजा स्कोर क्या चल रहा है, में बदल जाता है| ज़रा सोचिए कि बाहर जाकर अजनबियों से बाते करना कैसा रहेगा| बेहद डरावना| अच्छा होगा कि अन्दर की सुरक्षा में ही रहा जाए|

अगर आपके साथी-गुलामों में से एक दूसरे मालिक को बेच दिया जाए, क्या आप एक दोस्त खो देंगे? अगर आप एक पुरुष-प्रधान(male dominated) फील्ड में काम करते हैं, तो इसका मतलब यह होगा कि आपको  कभी भी रिसेप्शनिस्ट की पद(rank) से ऊपर की महिलाओं से बात करने का मौका नहीं मिल पायेगा? क्यों नहीं आप खुद इस बात का निर्णय लें कि आप किसके साथ मेल-जोल रखना चाहते हैं बजाय इसके कि आप अपने मालिक को खुद के लिए निर्णय लेने की इजाजत दें? आप मानें या ना मानें, इस धरती पर ऐसी भी जगहें हैं जहां पर आजाद लोग इकठ्ठा होते हैं| बस उन बेरोजगार लोगों से ज़रा होशियार रहिए¬ – वे तो पूरी तरह से पागल हैं!

9. आजादी खो देना|
एक इंसान को एक कर्मचारी के रूप में ढालने में बहुत ज्यादा मेहनत लगती है| पहली चीज जो आपको करनी होती है वह है इंसान की स्वतंत्र इच्छा को तोडना| यह करने का एक अच्छा तरीका है उन्हें बेतुके नियम और कायदे से भरी हुई एक गाईड पकड़ा देना| यह नए कर्मचारी को ज्यादा आज्ञाकारी बनाने में मदद करता है, डराते हुए कि उसे समझ से बाहर किसी भी चीज के लिए किसी भी पल अनुशासित किया जा सकता है| इसलिए कर्मचारी शायद निष्कर्ष निकाल लेगा कि बिना सवाल किये मालिक की आज्ञा मान लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका है| इसमें थोडा सा ऑफिस पॉलिटिक्स का तडका लगा दीजिए, और लीजिए हमें ताजा तैयार हुआ एक मानसिक गुलाम मिल गया|

उनकी आज्ञापालन(obedience) की ट्रेनिंग के हिस्से के तौर पर, कर्मचारियों को कपडे पहनने, बात करने, चलने और भी बहुत से तरीके सिखाए जाने चाहिएं| हमें ऐसे कर्मचारी नहीं चाहिएं जो अपने बारे में बहुत अच्छा सोचते हों, या फिर चाहिएं? अगर ऐसा हो गया तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा|

भगवान ना करे कि आप अपनी मेज पर एक पौधा रख दें जबकि यह कम्पनी के नियमों के खिलाफ हो | हे प्रभु, अब तो दुनिया ही ख़त्म हो जाएगी| ‘सिंडी’ की मेज पर एक पौधा है ! मैनेजर को बुलाओ ! ‘सिंडी’ को फिर से कड़ी ट्रेनिंग के लिए भेजो|

आजाद इंसान बेशक ऐसे नियमों और कायदों(regulations) को बचकाना मानते हैं| उन्हें केवल एक ही नीति(policy) की जरूरत होती है : “स्मार्ट बनिए| अच्छे बनिए| वह कीजिए जिससे आपको प्यार हो| आनंद उठाइए|”

10. एक कायर बन जाना|
क्या आपने कभी गौर किया है कि कर्मचारी लोगों के पास शिकायत करते रहने की अनंत(endless) क्षमता होती है जब वे अपनी कम्पनियों में काम कर रहे होते हैं? लेकिन वास्तव में वे समाधान नहीं चाहते वे तो केवल अपनी भड़ास निकालना चाहते हैं और बहाने बनाना चाहते हैं कि क्यों यह सब किसी दूसरे की गलती है| यह कुछ ऐसा है जैसे कि नौकरी हासिल करना किसी तरह से सम्पूर्ण स्वतंत्र-इच्छा(free-will) को लोगों से बाहर निकाल फेंकता है और उन्हें रीढ़-रहित कायरों में बदल देता है| अगर आप कभी कभार अपने बॉस को, नौकरी से निकाले जाने के डर के बगैर, पागल नहीं कह सकते, तो फिर आप आजाद नहीं रहे| आप अपने मालिक की संपत्ति बन गए हैं|

जब आप कायरों के साथ पूरे दिन काम करेंगे, तो आपको नहीं लगता कि यह आप पर असर डालने लगेगा? बेशक ऐसा ही होगा| यह केवल कुछ समय की ही बात है जब आप अपनी मानवता का सबसे अच्छे हिस्से को डर की बलि-वेदी(बलि देने की जगह) पर कुर्बान कर देंगे| आपने अपनी इंसानियत को केवल एक भ्रम(illusion) के लिए बेच दिया|और अब आप सबसे बड़ा डर होता है इस सच्चाई का पता करना कि आप क्या बन चुके हैं|

मैं इस बात की परवाह नही करता कि आपको कितनी बुरी तरह से हराया(beaten down) गया है| अपनी हिम्मत को फिर से हासिल करने के लिए कभी भी देर नहीं होती (देर आए – दुरुस्त आए)| कभी नहीं !

अभी भी एक नौकरी करना चाहते हैं?
अगर आप वर्तमान में एक आज्ञाकारी, सभ्य कर्मचारी हैं तो, ऊपर लिखे गए वाक्यों पर, आपकी सबसे संभावित प्रतिक्रिया बचाव की ही होगी| यह सब कंडीशनिंग का ही हिस्सा है| लेकिन ज़रा विचार कीजिए कि अगर ऊपर लिखे गए वाक्यों में सच्चाई का अंश नहीं होता तो, आप कोई भी भावनात्मक प्रतिक्रिया(emotional reaction) महसूस नही करते| यह, जो कुछ आप पहले से ही जानते हैं, उसे याद दिलाने का सिर्फ एक तरीका भर था| आप जितना मर्जी चाहें अपने पिंजरे के अस्तित्व से इनकार कर सकते हैं, लेकिन पिंजरा तो अभी भी वहीं पर है| शायद यह सबकुछ इतना धीरे धीरे हुआ कि आपने इस पर अभी तक गौर नहीं किया उस झींगा मछली की तरह जोकि कढाई(pan) के एक गर्म बढ़िया स्नान(bath) का आनंद ले रही थी|

अगर यह सब सोचना आपको पागल बना देता है, तो यह सही दिशा में उठाया गया एक कदम है| क्रोध, उदासीनता के तुलना में एक कहीं ऊंचा चेतना-स्तर है, इसलिए यह हर वक्त जड़(numb) बने रहने से कहीं ज्यादा अच्छा है| कोई भी भाव(emotion) यहाँ तक कि भ्रम भी उदासीनता से बेहतर होता है| अगर आप अपनी भावनाओं को दबाने की बजाय उनके साथ काम कर सकें, तो आप जल्द ही हिम्मत के दरवाजे पर खड़े होंगे| और जब ऐसा होता है, तो आपके पास, अपनी स्थिति के बारे में कुछ करने और एक शक्तिशाली मनुष्य की तरह जीने की, (जैसा कि आपको जीना चाहिए बजाय इसके कि आप उस पालतू गुलाम की तरह बनें जिसकी ट्रेनिंग आपको दी गई है), इच्छाशक्ति होनी चाहिए|
खुशी से बेरोजगार|

तो फिर नौकरी हासिल करने के अलावा और दूसरा विकल्प(alternative) क्या है ? वह विकल्प है जीवन-भर खुशी-खुशी बेरोजगार रहना और दूसरे साधनों के जरिए आय(income) कमाना| इस बात को जानिए कि आप इनकम, मूल्य(वैल्यू) को देकर कमाते हैं न कि समय देकर इसलिए अपनी बेहतरीन वैल्यू दूसरों तक पहुंचाने का एक रास्ता ढूंढिए, और इसके लिए एक उचित कीमत तय कीजिए| इसका एक सबसे आसान और सुलभ(accessible) तरीका है अपने खुद के बिजनेस की शुरुआत करना| जो कुछ काम आप अपनी नौकरी में वैसे भी करते, उसी वैल्यू को सीधे उन लोगों तक, जिनको इससे सबसे अधिक फायदा हो, पहुंचाने का एक रास्ता ढूंढिए| इसे शुरू करने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है, लेकिन शुरुआत में अपना समय और ऊर्जा लगाने के बदले आपको जो आजादी मिलती है वह इसकी भरपाई कर देती है| फिर तो आप कभी-कभार अपनी खुद की कमाई से अपने लिए कुछ खरीदारी भी कर सकते हैं|

और बेशक इस रास्ते पर चलकर आप जो कुछ भी सीखते हैं, वह दूसरे के साथ बांटकर और ज्यादा वैल्यू भी उत्पन्न(generate) कर सकते हैं| यहाँ तक कि आपकी गलतियां भी आपकी कमाई का जरिया बन सकती हैं|

यहाँ पर कुछ लेख हैं जोकि शुरुआत करने में आपकी मदद कर सकते हैं : “सचेत होकर जीवन-जीने की हिम्मत” (अधिक सार्थक(meaningful) कार्य की तरफ कदम कैसे बढाएं इस पर एक लेख)|

पॉडकास्ट # 006 नौकरी के बिना पैसे कैसे कमाएं (ऑडियो)| (जल्द ही उपलब्द्ध होगा)
पॉडकास्ट # 009 अपना खुद का व्यापार फ़ौरन(kick-start) कैसे शुरू करें (ऑडियो)| (जल्द ही उपलब्द्ध होगा)
पॉडकास्ट # 014 अपने जुनून को गले कैसे लगाएं (ऑडियो)| (जल्द ही उपलब्द्ध होगा)
10 गलतियां जोकि नए सेल्फ-एम्प्लोयेड(स्व-नियोजित) लोग करते हैं|(लेख-जल्द ही उपलब्द्ध होगा)
एक हाई-ट्रैफिक(High-Traffic) वेब साईट (या ब्लॉग) कैसे बनाएं| (लेख-जल्द ही उपलब्द्ध होगा)
अपने ब्लॉग से पैसे कैसे कमाएँ (लेख)| (जल्द ही उपलब्द्ध होगा)

एक सबसे बड़ा डर जिसका सामना आप करेंगे वह है कि शायद आपके पास कोई असली वैल्यू ही नहीं है जिसे आप दूसरों के साथ बाँट सकें| शायद एक कर्मचारी के रूप में घंटों के हिसाब से वेतन हासिल करना ही वह सबसे बेहतर काम है जिसे आप कर सकते हैं| या शायद आप इससे ज्यादा के लायक ही नहीं हैं| इस तरह से सोचना केवल आपकी कंडीशनिंग का ही हिस्सा है| कोरी बकवास| जब आप ऐसी ब्रेनवाशिंग(दिमाग में कूट-कूट कर भरी बात) को कूड़ेदान में फेंकना शुरू कर देते हैं, तो आपको जल्द ही महसूस होने लगता है कि आपके पास दूसरों के साथ बांटने के लिए वैल्यू का निर्माण करने की अपार(enormous) क्षमता है और यह भी कि लोग आपको इसकी कीमत चुकाने के लिए खुशी-खुशी तैयार हो जाएंगे| केवल एक ही चीज आपको इस सच्चाई देखने से रोक सकती है और वह है डर|

आपको सिर्फ अपनी स्वाभाविकता में रहने के लिए केवल हिम्मत की जरूरत होती है| आपकी असली वैल्यू, आप कौन हैं इसमें निहित(rooted in) होती है न कि आप क्या करते हैं? आपको हकीकत में केवल अपने वास्तविक रूप को दुनिया के सामने जाहिर करने की जरूरत होती है| आपको दुनिया भर के झूठ बताए गए होंगे कि आप ऐसा क्यों नहीं कर सकते| लेकिन जब तक आप ऐसा करने की हिम्मत नहीं जुटा लेते तब तक आप कभी नहीं जान पाएंगे कि सच्ची खुशी और संतुष्टि क्या होती हैं |

तो अगली बार जब कोई आपसे यह कहे कि नौकरी कर लो, तो मैं आपको वही जवाब देने की सलाह दूंगा जोकि ‘कर्ली’ ने दिया था : नहीं, बस यह नहीं! इसके सिवा कुछ भी बस यह नहीं! और फिर उसकी आखों में झाँक कर देखिए|

आप पहले से ही जानते है कि एक नौकरी हासिल्र करना आपका सपना नहीं था| इसलिए किसी दूसरे के विचारों को अपने सपनों पर हावी होने की इजाजत मत दीजिए| अपने खुद के विवेक(wisdom) पर भरोसा करना सीखिए, तब भी जब सारी दुनिया आपसे यह कहने लगे कि ऐसा कर के आप गलती कर रहे हैं या फिर आप मूर्ख हैं | आज से कुछ सालों के बाद आप जब मुड कर आज को देखेंगे तो आप पाएंगे कि यह आपका अब तक का सबसे बेहतरीन निर्णय था|

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